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कभी आसमान में बोलती थी Jet Airways की तूती, क्या हुआ कि डूबती चली गई कंपनी

क्यों डूबती चली गई Naresh Goyal की जेट एयरवेज

April 18, 2019 12:20 PM
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Naresh Goyal Jet Airways: एक दौर था जब एविएशन मार्केट में जेट एयरवेज का उंका बजने लगा है. पहले से स्थापित जेट एयरलाइंस को इसने बाजार हिस्सेदारी में पीछे छोड़ दिया था. देश भर में जेट एयरवेज की सेवाएं पॉपुलर हो गईं. लेकिन बुधवार आधी रात यानी 17/18 अप्रैल को जेट एयरवेज की लैंडिंग हो गई. कैश की कमी से जूझ रही कंपनी ने अपनी विमान सेवाएं अस्थाई तौर पर बंद करने का निर्णय लिया है. फिलहाल कंपनी और इसके कर्मचारियों का भविष्य भी अधर में है. आखिर ऐसा क्या हुआ कि कंपनी के बंद होने की नौबत आ गई, जानें जेट एयरवेज का पूरा सफरनामा……

महज 18 साल की उम्र में 300 रुपये महीने की नौकरी शुरू करने वाले नरेश गोयल को भी नहीं पता था कि वह एक दिन एविएशन इंडस्ट्री के बादशाह बन जाएंगे. 1993 यानी 34 साल की उम्र होते होते उन्होंने 2 विमानों को लेकर जेट एयरवेज नाम से एविएशन कंपनी लॉन्च कर दी. महज कुछ सालों में ही यह भारत की टॉप एविएशन कंपनी बन गई. लेकिन कहते हैं कि कब किसकी किस्मत पलट जाए, कहा नहीं जा सकता है. समय का चक्र घूमा और जेट एयरवेज का सूरज अस्त होने लगा.

Naresh Goyal पर परिवार की जिम्मेदारी

पंजाब के संगरूर में जन्मे नरेश गायेल पर जल्द ही परिवार की जिम्मेदारी आ गई. उनके पास इतने पैसे नहीं थे कि वह बेहतर तरीके से पढ़ाई कर सकें. रिश्ते में मां के अंकल ने रहने के लिए पनाह दी. किसी तरह से बैचलर की डिग्री पूरी कर वह दिल्ली आ गए.

300 रु की नौकरी

1967 में महज 18 साल की उम्र में उन्होंने अपने अंकल की कंपनी में बतौर ट्रैवल एजेंट नौकरी शुरू की और उन्हें इसके एवज में 300 रुपये महीने मिलते थे. इस नौकरी में रहते हुए उन्होंने ट्रैवल बिजनेस के बारे में ज्यादा से ज्यादा सीखने की कोशिश की.

शुरू की अपनी कंपनी

1973-74 का दौर था, जब नरेश गोयल ने अपनी मां से कुछ पैसे उधार लिए और अपनी बचत भी निवेश कर खुद की ट्रैवल एजेंसी खोल ली. उन्होंने अपनी ट्रैवल एजेंसी का नाम जेट एयरवेज रखा. शायद उनके दिमाग में उसी समय कुछ बड़ा चलने लगा था.

1993 में Jet Airways लॉन्च

1993 आते आते वह दौर भी आ गया जब नरेश गोयल ने 2 विमानों के साथ जेट एयरवेज लॉन्च कर दिया. माना जा रहा है कि उनकी कंपनी के लिए मिडिल ईस्ट की कंपनियों से फंडिंग हुई थी. इसी दशक में उनकी कंपनी की फंडिंग को लेकर भी विवाद हुआ.

D-कंपनी से लिंक का आरोप

उनपर D-कंपनी से लिंक होने का आरोप लगा. मीडिया रिपोर्ट आई कि दाऊद इब्राहिम ने फंडिंग में मदद की. गोयल ने इन आरोपों को खारिज किया. इस बारे में उनसे पूछताछ भी हुई थी.

2005 में कंपनी का आईपीओ

मार्च 2005 में जेट एयरवेज की शेयर बाजार में लिस्टिंग हुई. कंपनी के 20 फीसदी शेयर बेचे और 1100 का शेयर 1155 रुपये में लिस्ट हुआ. यहीं से गोयल की किस्मत ने उड़ान भरी. गोयल ने आईपीओ से 8000 करोड़ रुपये जुटाए. कंपनी की भारतीय बाजार में हिस्सेदारी एयर इंडिया से ज्यादा हो गई.

Jet Airways की परेशानी की वजह

  • जेट एयरवेज के लिए मुसीबत तब शुरू हुई जब इंडिगो और स्पाइस जेट ने लो कास्ट आॅफर देना शुरू किया. जेट एयरवेज की हिस्सेदारी धीरे धीरे घटने लगी और कंपनी पर कर्ज बढ़ने लगा.
  • 2006 में कंपनी ने एयर सहारा को करीब 2250 करोड़ रुपये में खरीदा. माना जाता है कि यह फैसला भी सही साबित नहीं हुआ.
  • गोयल की जिद भी कहीं न कहीं जेट की इस हालत के लिए जिम्मेदार मानी जाती है. गोयल किसी भी तरह से कंपनी से अपना कंट्रोल कम करने को तैयार नहीं थे. मीडिया रिपोर्ट की मानें तो एतिहाद एयरवेज शुरू में जेट एयरवेज में निवेश बढ़ाने को तैयार थी, लेकिन गोयल कंपनी के चेयरमैन पद से हटने को लेकर मना कर दिया. वह अपनी हिस्सेदारी घटाने को तैयार नहीं थे.

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