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बजट में मास्टर स्ट्रोक! कैसे 25 करोड़ लोगों की चुनावी उम्मीदों को पूरा कर गए मोदी?

सरकार को अर्थव्यवस्था की सेहत के नजरिए से चुनौती का सामना करना पड़ सकता है.

February 2, 2019 7:53 AM
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार का चुनावी साल में आया बजट सही मायनों में चुनावी उम्मीदों पर खरा उतरता है. इसमें देश के अन्नदाता से लेकर देश के करदाता तक दोनों का ख्याल रखा गया है. किसानों को कैश ट्रांसफर, मिडिल क्लास को कर छूट और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को पेंशन का एलान चुनाव में मोदी के पक्ष में खड़ा हो सकता है. कुल मिलाकर, सरकार ने एक झटके में करीब 25 करोड़ लोगों की चुनावी उम्मीदों को पूरा करने का प्रयास किया है. हालांकि, सरकार को अर्थव्यवस्था की सेहत के नजरिए से चुनौती का सामना करना पड़ सकता है. मुमकिन है कि सरकार वित्त वर्ष 2019-20 में राजकोषीय घाटे के लक्ष्य से चूक सकती है.

बजट से कुछ दिन पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के न्यूनतम इनकम की गारंटी का मास्टर स्ट्रोक चला, लेकिन वह यह भूल गए कि मोदी भी इसी राजनीतिक व्यवस्था में पले बढ़े हैं. अंतरिम बजट में किसानों को सीधे उनके खाते में कैश ट्रांसफर करने और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को पेंशन देने की योजना को राहुल गांधी के मास्टर स्ट्रोक का काफी हद तक मुक्कमल जवाब माना जा सकता है.

क्या विधान सभा की चुनावी हार का सबक?

माना जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने हाल में हुए विधानसभा चुनावों में, खासकर मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में मिली शिकस्त को एक सबक के रूप में लिया. यही वजह है कि शायद मोदी सरकार को बजट में दो हेक्टेयर तक की जोत वाले किसानों को 6,000 रुपये सालाना कैश सपोर्ट और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए 3000 रुपये प्रति माह पेंशन का एलान करना पड़ा.

गरीब-किसान को कैसे फायदा?

‘‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना तथा असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिये तीन हजार रुपये की पेंशन देने के लिए ‘‘प्रधानमंत्री श्रम-योगी मानधन वृहद पेंशन योजना’’ शुरू करने का प्रस्ताव किया गया है. किसानों को सालभर में दो- दो हजार रुपये की तीन किस्तों में कुल 6,000 रुपये उनके खाते में ट्रांसफर किए जाएंगे. इसके लिए अगले वित्त वर्ष में 75,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. गोयल ने कहा, यह योजना इसी वित्त वर्ष से लागू हो जाएगी और इसके लिए 20,000 करोड़ रुपये को प्रावधान किया गया है.

एक झटके में खुश हो गया मिडिल क्लास!

पीयूष गोयल ने मिडिल क्लास और नौकरी पेशा तबके की मांग को स्वीकार करते हुए 5 लाख रुपये तक की पर्सनल इनकम को टैक्स फ्री कर दिया. हालांकि, टैक्स स्लैब में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है. इसके अलावा यदि होम लोन लिया गया है तो उसके 2 लाख रुपये तक के ब्याज भुगतान पर भी टैक्स छूट उपलब्ध होगी. पेंशन योजना एनपीएस पर पचास हजार रुपये की अतिरिक्त टैक्स छूट है. बजट में स्टैंडर्ड डिडक्शन को 40,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दिया गया है.

25 करोड़ लोगों को साधने की कोशिश

किसानों को कैश सपोर्ट, मिडिल क्लास को टैक्स राहत और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को पेंशन के एलान से बजट प्रस्तावों में कुल मिला कर करीब सवा लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसके जरिए करीब 25 करोड़ लोगों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य है. इस मोदी सरकार ने सिर्फ तीन एलान के जरिए करीब 25 करोड़ लोगों की चुनावी उम्मीदों को पूरा कर दिया. किसानों की योजना से सीधे 12 करोड़ किसानों को फायदा होगा. जबकि असंगठित मजदूरों की पेंशन स्कीम से 10 करोड़ लोग लाभान्वित होंगे. वहीं, पांच लाख तक की इनकम टैक्स फ्री होने से करीब 3 करोड़ टैक्स पेयर्स फायदे में होंगे. इस तरह, इन तीनों ही एलान से करीब 25 करोड़ लोगों को सीधे फायदा होगा.

वित्त मंत्री ने खुद माना बढ़ेगा घाटा

वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने अंतरिम बजट पेश करते हुए कहा कि चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे के थोड़ा बढ़कर 3.4 फीसदी पर रहने का अनुमान है. सरकार ने 2019-20 के लिए राजकोषीय घाटे के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 3.4 फीसदी पर ही रहने का अनुमान रखा है.

गोयल ने कहा, “हम 2018-19 में राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 3.3 फीसदी पर बनाए रख सकते थे और 2019-20 में राजकोषीय घाटे को समेकित करने के लिए भी कदम उठा सकते थे, लेकिन किसानों की आमदनी बढाने में सहायता प्रदान करने के लिए हमने 2018-19 के संशोधित अनुमान में 20,000 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2019-20 के बजट अनुमान में 75,000 करोड़ रुपये मुहैया कराए हैं. यदि हम इसे अलग कर दें तो राजकोषीय घाटा 2018-19 में 3.3 फीसदी से कम और 2019-20 में 3.1 फीसदी से कम होता.”

चुनाव बाद फिर लाना होगा बजट

आम चुनाव से पहले परंपरा के अनुसार सरकार अंतरिम बजट पेश करती है. जिसमें नई सरकार बनने तक के लिए संसद से खर्चों की अनुमति ली जाती है. जिसे लेखानुदान या वोट आन अकाउंट कहते हैं. चुनाव के बाद पावर में आने वाली नई सरकार जुलाई में पूर्ण बजट पेश करेगी.

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