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इनकम टैक्स रेट में कटौती के आसार नहीं, सरकार पर वित्तीय दबाव बना वजह

हाल के दिनों में यह सुझाव जोर पकड़ रहा है कि अर्थव्यवस्था में मांग को बढ़ावा देने के लिए व्यक्तिगत आयकर दरों में कटौती की जानी चाहिए.

Updated: Oct 30, 2019 8:28 PM

Govt unlikely to go for income tax cut due to fiscal stress

आर्थिक नरमी और राजस्व प्राप्तियों के अनुमान से कम रहने के मद्देनजर सरकार की ओर से धनाढ्यों को व्यक्तिगत आयकर की दरों में राहत दिए जाने की संभावना फिलहाल नहीं दिखाई देती है. सूत्रों ने यह बात कही है. हाल के दिनों में यह सुझाव जोर पकड़ रहा है कि अर्थव्यवस्था में मांग को बढ़ावा देने के लिए व्यक्तिगत आयकर दरों में कटौती की जानी चाहिए. सरकार ने मांग और निवेश बढ़ाने के लिए इससे पहले कंपनियों के लिए कॉरपोरेट टैक्स में 10 प्रतिशत की बड़ी कटौती की है. उसके बाद से व्यक्तिगत आयकर में राहत की मांग तेज हो गई है.

सूत्रों का कहना है कि मौजूदा स्थिति में व्यक्तिगत आयकर दरों में कटौती बहुत मुश्किल है. आर्थिक सुस्ती, कर प्राप्ति कम होने और गैर-कर प्राप्ति भी अनुमान से कम रहने जैसे कई कारण हैं, जिनकी वजह से आयकर की दरों में कटौती करना काफी मुश्किल काम होगा. सरकार पिछले वित्त वर्ष में भी अपना प्रत्यक्ष कर प्राप्ति लक्ष्य हासिल नहीं कर पाई थी. प्रत्यक्ष कर में कॉरपोरेट टैक्स, व्यक्तिगत आयकर शामिल है. चालू वित्त वर्ष के लिए प्रत्यक्ष कर प्राप्ति का लक्ष्य 13.80 लाख करोड़ रुपये रखा गया है.

योजनाओं के लिए सरकार को चाहिए काफी पैसा

सरकार को आयुष्मान भारत, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, पीएम-किसान और पीएम आवास योजना जैसी सामाजिक सुरक्षा की योजनाओं के लिए अधिक धन की जरूरत है. इन योजनाओं के लिए सरकार को धन की काफी जरूरत है क्योंकि अप्रत्यक्ष कर प्राप्ति पर भी पहले ही दबाव बना हुआ है. जीएसटी में राजस्व प्राप्ति हाल के महीनों में कम हुई है. इसके अलावा कॉरपोरेट टैक्स कटौती के रूप में सरकार ने 1.45 लाख करोड़ रुपये के राजस्व छोड़ने का अनुमान लगाया है.

सरकार ने अर्थव्यवस्था को उठाने के लिए 28 साल में पहली बार कंपनियों के लिए कॉरपोरेट टैक्स में सीधे 10 प्रतिशत तक की कटौती की है. चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर छह साल के निम्न स्तर पांच प्रतिशत पर पहुंच गई.

करदाताओं को पहले से मिल रही हैं रियायतें

सूत्रों का कहना है कि सरकार करदाताओं को पहले ही कई तरह की रियायतें दे रही है. व्यक्तिगत करदाताओं की पांच लाख रुपये सालाना की आय करीब-करीब कर मुक्त कर दी गई है. सरकार ने सामाजिक सुरक्षा के कार्यों पर खर्च बढ़ाते हुए 2019-20 के बजट में अति धनाढ्यों पर कर अधिभार में वृद्धि की है. दो करोड़ से लेकर पांच करोड़ रुपये सालाना कमाई करने वाले धनाढ्यों पर अधिभार बढ़ाने से उन पर कर की दर 39 प्रतिशत और पांच करोड़ रुपये से अधिक कमाई करने वालों पर बढ़े अधिभार से कर की दर 42.74 प्रतिशत तक पहुंच गई.

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कुल राजस्व में प्रत्यक्ष कर की बड़े पैमाने पर हिस्सेदारी

सरकार ने जैसे ही कॉरपोरेट टैक्स में कटौती की घोषणा की, उसके बाद से व्यक्तिगत आयकर दर में कटौती की मांग भी उठने लगी. डायरेक्ट टैक्स कोड पर गठित समिति ने भी अपनी रिपोर्ट में व्यक्तिगत आयकर में नरमी लाए जाने की बात की है. दूसरी तरफ राजस्व प्राप्ति बढ़ाने के लिए कर अनुपालन को बेहतर बनाने का सुझाव दिया गया है.

देश के कुल कर राजस्व में प्रत्यक्ष कर का हिस्सा काफी ज्यादा है. वर्ष 2009-10 में कुल कर राजस्व में प्रत्यक्ष कर का हिस्सा 61 प्रतिशत तक रहा. पिछले साल यह 55 प्रतिशत के आसपास रहा. पिछले वित्त वर्ष में व्यक्तिगत आयकर प्राप्ति 4.7 लाख करोड़ रुपये यानी जीडीपी का 2.5 प्रतिशत रही, जबकि इस साल व्यक्तिगत आयकर प्राप्ति में 23 प्रतिशत की महत्वकांक्षी वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है. 2018-19 में यह वृद्धि केवल 10 प्रतिशत ही रही थी.

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