सरकार का PMFBY में बदलाव का इरादा, अब फसल बीमा लेने में चलेगी किसानों की मर्जी

Govt plans to amend PMFBY to make crop insurance voluntary to all farmers

कृषि मंत्रालय ने राज्य के स्तर के निवेश कोष का गठन करने और बचत को राष्ट्रीय स्तर के बीमा जोखिम में ट्रांसफर करने का प्रस्ताव किया है.

केंद्र सरकार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) में कुछ प्रमुख बदलाव करने की तैयारी कर रही है. एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी. इसके तहत सरकार का इरादा सभी किसानों के लिए फसल बीमा को ऑप्शनल बनाने, ऊंचे प्रीमियम वाली फसलों को हटाने, राज्यों को विशिष्ट ग्राहक की जरूरत के हिसाब से प्रोडक्ट उपलब्ध कराने के लिए लचीलापन देने का है. अधिकारी ने कहा कि लोगों के बीच से यह धारणा दूर करने को कि बीमा कंपनियां इस योजना से मुनाफा कमा रही हैं, कृषि मंत्रालय ने राज्य के स्तर के निवेश कोष का गठन करने और बचत को राष्ट्रीय स्तर के बीमा जोखिम में ट्रांसफर करने का प्रस्ताव किया है.

PMFBY के लिए दिए गए सुझाव

अधिकारी ने कहा कि इसके अलावा यह भी सुझाव दिया गया है कि योजना के तहत किसी फसल के लिए सिंचाई क्षेत्र 50 फीसदी से अधिक होने पर कवरेज के लिए प्रीमियम की अधिकतम सीमा 25 फीसदी और फसल में सिंचाई क्षेत्र 50 फीसदी से कम है तो प्रीमियम की सीमा 30 फीसदी रखने का सुझाव दिया गया है. इसमें हर साल संशोधन की सिफारिश है. PMFBY अप्रैल, 2016 में शुरू की गई थी. इसमें ऐसे प्राकृतिक जोखिम जिन्हें रोका नहीं जा सकता है, से बचाव को बुवाई से पहले से लेकर कटाई के बाद तक की अवधि के लिए सबकुछ कवर करने वाला फसल बीमा उपलब्ध कराया जाता है. इसमें खरीफ फसल के लिए निचली दो फीसदी की प्रीमियम दर लगती है. वहीं रबी फसल के लिए यह दर 1.5 फीसदी और कमर्शियल फसलों के लिए यह पांच फीसदी है.

PMFBY का यह सातवां सत्र है

अधिकारी ने कहा, ‘‘PMFBY का यह सातवां सत्र है. इस योजना के लागू करने के दौरान कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा. मंत्रालय ने इस खामियों की पहचान की है और कई बदलावों का प्रस्ताव किया है. इस पर राज्य सरकारों से विचार मांगे गए हैं. मंत्रालय ने कई बदलावों का सुझाव दिया है इसमें कर्ज लेने वाले किसानों सहित सभी किसानों के लिए इस योजना को स्वैच्छिक बनाना भी शामिल है. अधिकारी ने कहा कि यह इसलिए किया जा रहा है कि कर्ज लेने वाले किसान के अनिवार्य नामांकन से असंतोष पैदा हो रहा है.
इसके अलावा मंत्रालय ने फसल नुकसान के आकलन को दो स्तरीय प्रक्रिया का प्रस्ताव किया है.

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