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1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का आएगा दूसरा राहत पैकेज, सरकार जल्द कर सकती है एलान: रिपोर्ट

नए पैकेज का फोकस मझोले कारोबारियों के ब्याज दरों में छूट, रीयल्टी के लिए राहत और सरकारी बैंकों के रिकैपिटलाइजेशन पर रह सकता है.

April 9, 2020 2:52 PM
Govt may soon announce second stimulus package worth over Rs 1 lakh crore amid coronavirus pandemic says a BofA reportकेंद्र सरकार पहले ही गरीबों के लिए 1.70 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज का एलान कर चुकी है.

केंद्र सरकार जल्द ही एक और वित्तीय पैकज का एलान कर सकती है, जो पिछले महीने 1.70 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज की तरह रह सकता है. एक रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है. बैंक आफ अमेरिका सिक्युरिटीज (BofA) का कहना है कि नए पैकेज का फोकस मझोले कारोबारियों के ब्याज दरों में छूट, रीयल्टी के लिए राहत और सरकारी बैंकों के रिकैपिटलाइजेशन पर रह सकता है.

पिछले महीने सरकार ने कोविड-19 महामारी के झटके से निपटने में आम लोगों और कमजोर तबके के लिए 1.70 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज का एलान किया था. इस पैकेज को हालांकि नाकाफी बताया गया है.

एसबीआई के अर्थशास्त्रियों ने कहा है कि पहले जो राहत पैकेज जारी किए गए हैं उनमें से अधिकांश का एलान बजट में पहले ही हो चुका है. केवल 70,000 करोड़ रुपये का नया एलान है. BofA के अर्थशास्त्रियों का कहना है कि हमारा मानना है, वित्त मंत्रालय जीडीपी का 0.3 फीसदी के आर्थिक राहत पैकेज का एलान करेगा. जहां ​तक वित्तीय घाटे और महंगाई दर की बात है तो सरकार का इस दिशा में अभी तक समझदारी भरा निर्णय रहा है.

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छोटे कारोबारियों के लिए सबवेंशन की वकालत

ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि मौजूदा हालात में रिकवरी के लिए वित्तीय पैकेज की जरूरत है. सरकार को वित्तीय घाटे की शर्त पर गिरते विकास दर को संभालने के लिए इससे बचना नहीं चाहिए. बैंक आफ अमेरिका ने छोटे कारोबारियों के सभी बकाया लोन पर एक साल के लिए 2 फीसदी सबवेंशन की वकालत की है. इसकी लागत जीडीपी का 0.1 फीसदी आएगी. ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि बैंकों के एनजीए बढ़ने को देखते हुए पर्याप्त लिक्विडिटी बनाए रखने के लिए सरकार बैंकों के रिकैपिटलाइजेशन के मद में जीडीपी का 0.75 फीसदी तक खर्च करना चाहिए.

FY21 में 4.8% हो सकता है वित्तीय घाटा

ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि सुझाए गए राहत पैकेज और पहले से हुए एलान से वित्त वर्ष 2020-21 में सरकार का राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.8 फीसदी हो सकता है. जोकि बजट अनुमान से 1.30 फीसदी अधिक होगा. फर्म का कहना है कि आरबीआई जून और अक्टूबर में ग्रोथ को रफ्तार देने के लिए ब्याज दरों में 0.25 फीसदी की कटौती कर सकती है. आरबीआई ने इससे पहले पिछले महीने रेपो रेट में 0.75 फीसदी की कटौती की थी. ग्रोथ को लेकर फर्म का कहना है कि जून तिमाही में भारत की विकास दी गिरकर 2.5 फीसदी आ सकती है.

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