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सरकार जारी रखे सुधार, तेजी के संकेत लंबे वक्त तक बरकरार रखने की जरूरत: शक्तिकांत दास

दास ने कहा कि चीन में कोरोना वायरस के प्रभाव पर हर नीति निर्माता को करीब से नजर रखने की जरूरत है ताकि उसके अनुसार उपयुक्त कदम उठाए जा सकें.

February 17, 2020 8:52 PM

Government must continue reforms; green shoots of recovery need to sustain: Shaktikanta Das

रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने सोमवार को कहा कि सरकार ने संरचनात्मक सुधारों को लेकर जो कदम उठाए हैं, मांग को पटरी पर लाने और अर्थव्यवस्था की मदद के लिए उसे जारी रखे जाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था में शुरुआती तेजी के संकेत हैं और देश को मौजूदा नरमी से बाहर निकालने के लिए उसे बनाए रखने की जरूरत है. दास ने कहा कि चीन में कोरोना वायरस के प्रभाव पर हर नीति निर्माता को करीब से नजर रखने की जरूरत है ताकि उसके अनुसार उपयुक्त कदम उठाए जा सकें.

आरबीआई गर्वनर ने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतामरण के बजट 2020-21 और हाल के कदमों से इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को गति देने के जरिए मांग को पटरी पर लाने और खपत बढ़ाने का एक अनुकूल आर्थिक माहौल बना है. अब यह जरूरी है कि भूमि और श्रम सुधारों को आगे बढ़ाया जाए, कृषि मार्केटिंग में कार्य कुशलता लाई जाए और कौशल विकास पर जोर हो.

2019 की शुरुआत में ही भांप लिया था स्लोडाउन

उन्होंने कहा कि आरबीआई ने 2019 की शुरूआत में आर्थिक वृद्धि में आने वाली नरमी को महसूस किया था और मुद्रास्फीति में नरमी से जो गुंजाइश बनी थी, उसका उपयोग लगातार पांच बार नीतिगत दर में कटौती करने में किया गया. दास ने अर्थव्यवस्था में नरमी के कारणों के बारे में कहा कि कमजोर मांग के साथ वैश्विक व्यापार और व्यवसाय में अनिश्चितता से कारखानों में क्षमता का उपयोग कम हो रहा है. इसके अलावा एक तरफ बैंकों और कंपनियों दोनों जगह बढ़ते एनपीए या फंसा कर्ज और दूसरी तरफ कंपनियों पर भारी कर्ज से यह स्थिति बनी है.

आगे कहा, ‘‘कुछ सकारात्मक चीजें दिख रही हैं. चीजें सुधर रही हैं लेकिन हमें अभी इंतजार करना और यह देखना है कि ये सब टिकाऊ हैं या नहीं.’’ दास ने इस बारे में कुछ भी कहने से मना कर दिया कि जुलाई-सितंबर तिमाही में 4.5 फीसदी की आर्थिक वृद्धि दर निचला स्तर था और यह अब इससे नीचे नहीं जाएगी. उन्होंने कहा, ‘‘जैसा मैंने कहा कि सकारात्मक गतिविधियों के सबूत हैं. लेकिन यह कहना कि यहां से अर्थव्यवस्था में तीव्र वृद्धि आएगी, उससे पहले हमें यह देखना है कि ये चीजें कितनी टिकाऊ हैं.’’

उन्होंने कहा, ‘‘अगर आप हमारे अनुमान को देखें जो हमने दिया है, चीजें अगले वित्त वर्ष से सुधरनी चाहिए. हमने 2020-21 में जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि दर 6 फीसदी रहने का अनुमान जताया है, जो चालू वित्त वर्ष में 5 फीसदी रह सकती है.’’ केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने 2019-20 में आर्थिक वृद्धि दर 5 फीसदी रहने का अनुमान जताया है, जो 11 साल का न्यूनतम स्तर है.

AGR भुगतान हालात पर है नजर

दास ने यह भी कहा है कि केंद्रीय बैंक दूरसंचार क्षेत्र पर समायोजित सकल आय (एजीआर) के बकाए के मामले पर करीबी नजर रखे हुए है. दूरसंचार कंपनियों पर 1.47 लाख करोड़ रुपये का सांविधिक बकाया है और दूरसंचार कंपनियों के चूक की स्थिति में बैंकों पर इसका प्रभाव पड़ेगा. दास ने कहा कि अब तक कहीं से चूक के खतरे की कोई चेतावनी नहीं आई है लेकिन केंद्रीय बैंक स्थिति पर कड़ी नजर रखे हुए है.

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