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गोल्ड हॉलमार्किंग: ग्राहक को पुरानी ज्वैलरी बेचने में नहीं होगी दिक्कत, केवल 30-35 रु में चेक करा सकता है शुद्धता

सोने के गहनों की बिक्री में ग्राहक को धोखा न दिया जा सके, इसके लिए देश में गोल्ड हॉलमार्किंग अनिवार्य हो चुकी है. यह नियम 15 जनवरी 2021 से कानून का रूप लेगा.

February 22, 2020 8:22 AM
gold hallmarking: customer can do purity check of jewellery on bis centers at a cost of 30-35 rupee, will sell his old gold jewellery easily after 15th january 2021 tooImage: Reuters

Gold Hallmarking: सोने के गहनों की बिक्री में ग्राहक को धोखा न दिया जा सके, इसके लिए देश में गोल्ड हॉलमार्किंग अनिवार्य हो चुकी है. यह नियम 15 जनवरी 2021 से पर अमल शुरू हो जाएगा.  15 जनवरी 2021 से देश में केवल बीआईएस हॉलमार्क वाली गोल्ड ज्वैलरी और कलाकृतियां ही बिकेंगी, जो कि सोने के तीन ग्रेड- 14, 18 और 22 कैरेट में होंगी. नए कानून से ग्राहक को ठगा नहीं जा सकेगा और खरीदी जाने वाली हॉलमार्क्ड गोल्ड ज्वैलरी उतने ही कैरेट की होगी, जितने के ग्राहक ने पैसे दिए हैं.

लेकिन इस कानून से क्या किसी ग्राहक के घर पर मौजूद पुरानी गोल्ड ज्वैलरी की बिक्री पर भी असर पड़ेगा? इस बारे में पीसी ज्वैलर्स के एमडी बलराम गर्ग ने फाइनेंशियल एक्सप्रेस हिंदी ऑनलाइन को बताया कि पुरानी गोल्ड ज्वैलरी खरीदने के बाद ज्वैलर उसे पिघलाकर नई ज्वैलरी बनाता है. पुरानी ज्वैलरी एक तरह से ज्वैलर के लिए रॉ मैटेरियल होती है. इसलिए ग्राहक द्वारा उसकी बिक्री और ज्वैलर द्वारा उसकी खरीदारी करने पर 15 जनवरी 2021 के बाद भी कोई दिक्कत नहीं होगी. लेकिन जब ज्वैलर नई ज्वैलरी बेचेगा, तो उस पर बीआईएस हॉलमार्क होना जरूरी है.

दिल्ली के सराफा बाजार कूंचा महाजनी में बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के प्रमुख योगेश सिंघल के मुताबिक, नया लागू होने वाला कानून केवल ज्वैलर्स के लिए है. ज्वैलर्स 15 जनवरी 2021 से बिना हॉलमार्क वाली ज्वैलरी की बिक्री नहीं कर पाएंगे. ग्राहक तो अपनी पुरानी ज्वैलरी की बिक्री वैसे ही कर सकता है जैसे मौजूदा वक्त में करता है.

क्या ग्राहक पुरानी ज्वैलरी की जांच सकता है शुद्धता?

क्या ग्राहक पुरानी बिना हॉलमार्क वाली ज्वैलरी की शुद्धता की जांच करा सकता है? इस बारे में योगेश सिंघल का कहना है कि ग्राहक देश में मौजूद बीआईएस हॉलमार्किंग सेंटर्स पर जाकर पुरानी ज्वैलरी की शुद्धता की जांच करा सकता है. इससे उसे पता चल जाएगा कि पहले उसे बेची गई ज्वैलरी कितने कैरेट सोने से बनी है. इसके लिए उसे 30-35 रुपये का मामूली अमाउंट देना होगा.

ग्राहक की पुरानी ज्वैलरी के ​लिए भी हॉलमार्क जरूरी है?

रतनचंद ज्वैलर्स के तरुण गुप्ता बताते हैं कि गोल्ड ज्वैलरी पर हॉलमार्किंग कराने के लिए एक प्रॉपर एग्रीमेंट साइन होता है, जो कि ज्वैलर्स के लिए है. इस एग्रीमेंट में नियम व शर्तें रहती हैं. इस एग्रीमेंट के बाद ज्वैलर्स को हॉलमार्किंग कराने के लिए लाइसेंस जारी होता है और इसके बाद वे गोल्ड ज्वैलरी को बीआईएस सेंटर्स से हॉलमार्क करा सकते हैं. ग्राहक को लाइसेंस नहीं मिलता, लिहाजा ग्राहक खुद से अपनी पुरानी ज्वैलरी ले जाकर हॉलमार्किंग नहीं करा सकता.

आखिर क्या है हॉलमार्किंग?

भारतीय मानक ब्यूरो यानी बीआईएस हॉलमार्किंग सोने की शुद्धता को प्रमाणित करने की एक प्रणाली है. बीआईएस का चिन्ह प्रमाणित करता है कि आभूषण बीआईएस के मानकों पर खरा उतरता है. हॉलमार्किंग के तहत किसी भी गोल्‍ड आइटम पर पांच चीजें मार्क होती हैं- BIS लोगो, सोने की शुद्धता या फाइननेस दर्शाने वाला नंबर जैसे 22 कैरेट या 916, एसेइंग या हॉलमार्किंग सेंटर का लोगो, मार्किंग का साल और ज्‍वैलर्स आइडेंटिफिकेशन नंबर.

नियम तोड़ने पर होगी कार्रवाई

ज्वैलर्स को एक साल का वक्त पुराने बिना हॉलमार्क वाले सोने के आभूषणों को बेचने के लिए दिया गया है. ज्वैलर्स चाहें तो हालॅमार्किंग सेंटर्स जाकर पुराने स्टॉक को हॉलमार्क करा सकते हैं. इसके लिए एक निश्चित फीस का भुगतान करना होगा. 15 जनवरी 2021 के बाद अगर किसी ज्वैलर ने नए कानून का उल्लंघन किया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, जिसमें जुर्माना और जेल का प्रावधान है.

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