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कृषि कर्ज माफी से क्रेडिट कल्चर पर पड़ता है बुरा असर, कर्जदारों का बर्ताव भी है बिगड़ता: RBI गवर्नर

गवर्नर दास का यह बयान ऐसे समय आया है, जब हाल में कई राज्य सरकारों ने कृषि कर्ज को सामान्य तरीके से माफ करने की घोषणा की है.

January 7, 2019 5:35 PM
Generalised farm loan waiver impacts credit culture, says RBI Governorहाल ही में तीन राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की नई सरकार ने किसानों का कर्ज माफ करने की घोषणा की है.

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि कृषि कर्जों को सामान्य रूप से माफ करने के चलन से ऋण संस्कृति यानी क्रेडिट कल्चर पर बुरा असर पड़ता है. साथ ही कर्ज लेने वालों का व्यहार भी बिगड़ता है.

गवर्नर दास का यह बयान ऐसे समय आया है, जब हाल में कई राज्य सरकारों ने कृषि कर्ज को सामान्य तरीके से माफ करने की घोषणा की है. हाल ही में तीन राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की नई सरकार ने किसानों का कर्ज माफ करने की घोषणा की है. कांग्रेस ने इन राज्यों में चुनाव से पहले किसानों से सामान्य कर्ज माफी का वादा किया था.

राज्य सरकारों को कर्ज माफी से पहले राजकोष पर कर लेना चाहिए गौर

यह पूछे जाने पर कि इस तरह की कृषि कर्ज माफी को वह किस रूप में देखते हैं, दास ने कहा कि कृषि ऋण माफी संबंधित राज्य सरकार के राजकोष में इसके लिए गुंजाइश से जुड़ी होती है. चुनी गई सरकारों को अपने वित्त के संबंध में फैसले लेने का अधिकार है, लेकिन प्रत्येक राज्य सरकार को इस तरह का कोई निर्णय करने से पहले अपने राजकोष में इसके लिए गुंजाइश पर सावधानी से गौर करना चाहिए.

आगे कहा कि राज्य सरकार को यह भी देखना चाहिए कि क्या वे बैंकों को तत्काल कर्ज का पैसा चुका सकती हैं? सामान्य कर्ज माफी क्रेडिट कल्चर पर असर डालती है. साथ ही इससे कर्ज लेने वालों के भविष्य के व्यवहार पर भी असर पड़ता है.

पहले भी माफ हो चुका है कृषि कर्ज

मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में 1.47 लाख करोड़ रुपये का कृषि कर्ज बकाया है. हाल में इन राज्यों ने कृषि कर्ज माफ करने की घोषणा की है. 2017 में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और पंजाब ने किसानों के बकाया कर्ज को माफ करने की घोषणा की थी. इससे पहले इसी साल कर्नाटक की गठबंधन सरकार ने भी किसानों का कर्ज माफ किया है.

2000 के नोटों पर नहीं की टिप्पणी

यह पूछे जाने पर कि क्या 2000 के नोट को धीरे-धीरे हटाया जा रहा है, दास ने कहा कि आर्थिक मामलों के विभाग ने पहले ही इस पर स्थिति साफ कर दी है और अब इसमें और जोड़ने के लिए कुछ नहीं है.

पिछले सप्ताह सरकार ने संकेत दिया था कि 2000 के नोटों की छपाई बंद कर दी गई है, क्योंकि प्रणाली में पर्याप्त मात्रा में ये नोट हैं. आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा था कि इन नोटों की छपाई अनुमानित जरूरत के हिसाब से की जाती है. प्रणाली में 2000 के नोट पर्याप्त मात्रा में हैं और इस समय चलन में कुल नोटों के मूल्य का 35 फीसदी 2000 के नोटों का है.

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