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गरीब कल्याण रोजगार अभियान: PM मोदी ने प्रवासी मजदूरों की मदद के लिए लॉन्च की योजना, 116 जिलों में मिलेगा रोजगार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज ‘गरीब कल्याण रोजगार मिशन’ की शुरुआत की.

Updated: Jun 20, 2020 12:24 PM
pm modi garib kalyan rojgar abhiyaan today migrant workers coronavirus pandemicप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज ‘गरीब कल्याण रोजगार मिशन’ की शुरुआत करेंगे. (Image: ANI)

Garib Kalyan Rojgar Abhiyaan: देश के गांवों में स्थायी बुनियादाी ढांचा तैयार करने और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज ‘गरीब कल्याण रोजगार मिशन’ की शुरुआत की. इस अभियान को 6 राज्यों के 116 जिलों में 125 दिनों तक प्रवासी श्रमिकों की सहायता के लिए मिशन मोड में चलाया जाएगा.

पीएम मोदी ने कहा कि आज का दिन बहुत ऐतिहासिक है. आज गरीब के कल्याण के लिए, उसके रोजगार के लिए एक बहुत बड़ा अभियान शुरू हुआ है. ये अभियान समर्पित है हमारे श्रमिक भाई-बहनों के लिए, हमारे गांवों में रहने वाले नौजवानों-बहनों-बेटियों के लिए. इनमें से ज्यादातर वो श्रमिक हैं जो लॉकडाउन के दौरान अपने घर वापस लौटे हैं. वो अपनी मेहनत और हुनर से अपने गांव के विकास के लिए कुछ करना चाहते हैं. वो जब तक अपने गांव में हैं, अपने गांव को आगे बढ़ाना चाहते हैं. मेरे श्रमिक साथियों, देश आपकी भावनाओं को भी समझता है और आपकी जरूरतों को भी.

श्रमिकों और कामगारों को घर के पास काम देना लक्ष्य: पीएम मोदी

मोदी ने कहा कि आज खगड़िया से शुरू हो रहा गरीब कल्याण रोजगार अभियान इसी भावना, इसी जरूरत को पूरा करने का बहुत बड़ा साधन है. हमारा प्रयास है कि इस अभियान के जरिए श्रमिकों और कामगारों को घर के पास ही काम दिया जाए. अभी तक आप अपने हुनर और मेहनत से शहरों को आगे बढ़ा रहे थे, अब अपने गांव को, अपने इलाके को आगे बढ़ाएंगे.

पीएम मोदी ने बताया कि सरकारी स्कूल में रहते हुए, इन श्रमिकों ने अपने हुनर से, स्कूल का ही कायाकल्प कर दिया. मेरे श्रमिक भाई-बहनों के इस काम ने, उनकी देशभक्ति ने, उनके कौशल ने, मुझे इस अभियान का आइडिया दिया, प्रेरणा दी. आप सोचिए, कितना टैलेंट इन दिनों वापस अपने गांव लौटा है. देश के हर शहर को गति और प्रगति देने वाला श्रम और हुनर जब खगड़िया जैसे ग्रामीण इलाकों में लगेगा, तो इससे बिहार के विकास को भी कितनी गति मिलेगी.

गरीब कल्याण रोज़गार अभियान के तहत आपके गांवों के विकास के लिए, आपको रोजगार देने के लिए 50 हज़ार करोड़ रुपए खर्च किए जाने हैं. इस राशि से गांवों में रोजगार के लिए, विकास के कामों के लिए करीब 25 कार्यक्षेत्रों की पहचान की गई है. ये 25 काम या प्रोजेक्ट्स ऐसे हैं, जो गांव की मूलभूत सुविधाओं से जुड़े हैं, जो गांव के लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए हैं. ये काम अपने ही गांव में रहते हुए, अपने परिवार के साथ रहते हुए ही किए जाएंगे.

लॉन्च के दौरान बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए अलग-अलग जिलों में बिहार वापस आने वाले मजदूरों से बातीचत की. उन्हें महसूस हुआ कि वे दूलरे राज्यों में काम के लिए वापस नहीं जाने चाहते हैं.

पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश लद्दाख में सैनिकों द्वारा दिए गए बलिदान पर गर्व करता है. आज जब बिहार के लोगों से बात कर रहे हैं, वे कहेंगे कि बिहार रेजीमेंट की वीरता पर हर बिहारी को गर्व है.

इस अभियान के तहत 50,000 करोड़ रुपये के सार्वजनिक कार्य कराए जाएंगे. बता दें, कोरोना महामारी के समय लाखों की संख्या में प्रवासी मजदूर महनगरों से वापस लौटकर अपने गृह राज्य/जिले में आए हैं. ऐसे में उनके लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना अहम चुनौती है.

125 दिन का अभियान, 50 हजार करोड़ का फंड

पीएमओ के अनुसार, 125 दिनों का यह अभियान मिशन मोड में चलाया जाएगा. 50 हजार करोड़ रुपये के फंड से एक तरफ प्रवासी श्रमिकों को रोजगार देने के लिए विभिन्न प्रकार के 25 कार्यों को तेजी से कराया जाएगा. वहीं दूसरे ओर देश के ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का निर्माण किया जाएगा.

यह अभियान 12 विभिन्न मंत्रालयों/विभागों- ग्रामीण विकास, पंचायती राज, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, खान, पेयजल और स्वच्छता, पर्यावरण, रेलवे, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, नई और नवीकरणीय ऊर्जा, सीमा सड़क, दूरसंचार और कृषि का एक समन्वित प्रयास होगा.

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दो तिहाई प्रवासी श्रमिकों को होगा लाभ

पीएमओ के अनुसार, 116 जिलों के 25 हजार से ज्यादा प्रवासी श्रमिकों के साथ इस अभियान में बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड और ओडिशा इन 6 राज्यों को चुना गया है. इसमें इच्छा जताने वाले 27 जिले शामिल हैं. इन जिलों से दो तिहाई प्रवासी श्रमिकों के लाभान्वित होने का अनुमान है.

इस बीच सरकार ने प्रस्तावित राष्ट्रीय रोजगार नीति (NEP) पर काम तेज कर दिया है. इस नीति को 50 करोड़ श्रमशक्ति को संगठित क्षेत्र के दायरे में लाने के लिहाज से डिजाइन किया गया है.

वहीं, लेबर मार्केट में मौजूदा जॉब संकट के बीच केंद्र और कई राज्य देश में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए श्रम कानूनों को सरल बना रहे हैं. योगी आदित्यनाथ वाली यूपी सरकार ने हाल ही में एक श्रम आयोग का गठन किया है, जोकि श्रमिकों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा को सुनिश्चित करने की दिशा में काम करेगा.

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