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बैंकिंग सेक्टर में नए संकट की आहट! पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन ने किया आगाह

RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने आने वाले वक्त में बैंकिंग क्षेत्र में संकट का अंदेशा लगाया है. उन्होंने कहा कि महत्वाकांक्षी क्रेडिट लक्ष्यों को तय करना और लोन में छूट देना ही अगले बैंकिंग संकट की वजह बनेगा.

September 11, 2018 5:10 PM
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RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने आने वाले वक्त में बैंकिंग सेक्टर में नए संकट का अंदेशा जताया है. उन्होंने सरकार की कर्ज माफी और मु्द्रा स्कीम जैसी योजनाओं के लिए तय लक्ष्यों और उससे जुड़े जोखिम को लेकर आगाह किया है. राजन ने कहा कि लोन में छूट देना ही अगले बैंकिंग संकट की वजह बनेगा, इससे बचना चाहिए.

रघुराम राजन ने बैंक NPA पर बनी संसदीय अनुमान समिति को दिए एक नोट में कहा कि सरकार को आने वाले बैंकिंग संकट से निपटने के बारे में सोचना चाहिए, न कि पिछले संकट के बारे में.

उन्होंने सरकार से महत्वाकांक्षी क्रेडिट लक्ष्यों को तय करने और लोन में छूट देने से बचने का सुझाव दिया है. क्रेडिट लक्ष्य तय करने को लेकर उन्होंने कहा कि इन लक्ष्यों को पूरा करने के चक्कर में कभी-कभी लोन देते वक्त कई चीजों की अनदेखी की जाती है, जिससे पैसा डूबने का खतरा बढ़ जाता है. बता दें, गृहराज्य मंत्री हंसराज अहिर ने 6 जून को सरकारी बैंकों के उन शाखा प्रबंधकों के वेतन वृद्धि को रोकने की सिफारिश की थी जो मुद्रा लोन लक्ष्य को पूरा करने में नाकाम रहे थे.

अपने नोट में राघुराम राजन ने मुद्रा लोन और किसान क्रेडिट कार्ड का भी जिक्र किया. उन्होंने इनका जिक्र करते हुए लिखा कि मुद्रा लोन और किसान क्रेडिट कार्ड दोनों ही लोकप्रिय हैं लेकिन इनमें जोखिम भी ज्यादा है. ऐसे में इसपर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है.

दरअसल, सरकार ने साल 2015 में मुद्रा लोन की शुरुआत की थी जिसके तहत छोटे उद्योगों के लिए 10 लाख रुपये तक का लोन बिना किसी गारंटी के दिया जा सकता था. इसके लिए सरकार ने इस साल के बजट में 3 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए थे.

रघुराम राजन ने अपने नोट में साफ तौर पर लिखा कि लोन में छूट देना अच्छा नहीं है. हालांकि उन्होंने ये भी जिक्र किया कि किसानों के लिए काम करने की जरूरत है लेकिन लोन में छूट देकर नहीं, इसके लिए कुछ और सोचना होगा.

संसदीय अनुमान समिति को दिए नोट में पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन ने कहा कि बैंकों का बढ़ा हुआ NPA साल 2006 से 2008 के बीच लोन देने में बरती गई लापरवाही की ही देन है। इस बात को लेकर अब केंद्र सरकार ने पूर्व की UPA सरकार को घेरना शुरू कर दिया है.

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