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पूर्व CBI निदेशक आलोक वर्मा ने सर्विस से दिया इस्तीफा

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद फिर से CBI निदेशक का पद संभालने वाले आलोक वर्मा को एक दिन बाद ही पद से हटा दिया गया था. 

Updated: Jan 11, 2019 4:34 PM
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CBI डायरेक्टर के पद से हटाए जाने के करीब 24 घंटे के भीतर ही आलोक वर्मा ने शुक्रवार को अपनी सर्विस से इस्तीफा दे​ दिया है. पीटीआई ने वर्मा का त्याग-पत्र एक्सेस किया है, जिसके मुताबिक वर्मा ने अपने इस्तीफे में लिखा है कि यह ‘सामूहिक आत्मनिरीक्षण’ का समय है. वर्मा का तबादला करते हुए उन्हें फायर सर्विसेज का डायरेक्टर बनाया गया था लेकिन पहले तो उन्होंने चार्ज लेने से इनकार किया और बाद में इस्तीफा ही दे दिया. इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद फिर से CBI निदेशक का पद संभालने वाले आलोक वर्मा को एक दिन बाद ही पद से हटा दिया गया था.

वर्मा को पद से हटाने का फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में उच्चाधिकार प्राप्त चयन समिति की 2 घंटे तक चली मैराथन बैठक में लिया गया. इस समिति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और चीफ जस्टिस के प्रतिनिधि जस्टिस एके सिकरी थे. खड़ने ने वर्मा के हटाए जाने का विरोध किया था.

बता दें कि सरकार ने दो महीने पहले भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते वर्मा और डिप्टी स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को लंबी छुट्टी पर भेज दिया था. इन दोनों ने एक दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे और CBI की अंदरूनी टसल जगजाहिर हो गई थी. 9 जनवरी 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने वर्मा को फिर से CBI में बहाल कर दिया.

हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा था कि वर्मा नीतिगत फैसले नहीं लेंगे. इसलिए उन्हें क्या नया पद दिया जाए, यह फैसला उच्चाधिकार प्राप्त चयन समिति को लेना था. इसके लिए सरकार को एक सप्ताह का वक्त दिया गया था.

बनाए गए थे DG फायर सर्विस, सिविल डिफेंस एंड होम गार्ड

अधिकारियों ने बताया कि 1979 बैच के AGMUT कैडर के IPS अधिकारी वर्मा को भ्रष्टाचार और कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही के आरोप में पद से हटाया गया. इसके साथ ही एजेंसी के इतिहास में इस तरह की कार्रवाई का सामना करने वाले वह CBI के पहले प्रमुख बन गए हैं. अब वर्मा को डीजी फायर सर्विसेज, सिविल डिफेंस और होम गार्ड बना दिया गया था.

CVC की रिपोर्ट में लगे थे 8 आरोप

सीवीसी की रिपोर्ट में वर्मा के खिलाफ आठ आरोप लगाए गए थे. यह रिपोर्ट उच्चाधिकार प्राप्त समिति के समक्ष रखी गई. समिति में लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के प्रतिनिधि के रूप में सुप्रीम कोर्ट के सीनियर जज जस्टिस एके सीकरी भी शामिल थे.

अधिकारियों ने बताया कि वर्मा को पद से हटाने का फैसला बहुमत से किया गया. हालांकि खड़गे ने इस कदम का विरोध किया. अतिरिक्त निदेशक एम नागेश्वर राव को नए निदेशक की नियुक्ति तक सीबीआई प्रमुख का पद सौंपा गया है.

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