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आत्मनिर्भर भारत: तीसरी किस्त में 11 एलान, कृषि इंफ्रा पैकेज और कानूनी सुधार से बढ़ेगी किसानों की आय

आर्थिक पैकेज की तीसरी किस्त का ब्योरा वित्त मंत्री​ निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को साझा किया. पूरा फोकस कृषि क्षेत्र और उससे जुड़े सेक्टर पर रहा.

May 15, 2020 7:22 PM
Nirmala Sitharaman Press Conference Updates, FM on agriculture sectorवित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फार्म गेट इंफ्रा के लिए जहां 1 लाख करोड़ रुपये का एलान किया गया है.

FM Nirmala Sitharaman announcement for the agriculture: कोरोनावायरस महामारी (Coronavirus Pandemic) से उबरने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की तरफ से किए गए 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज की तीसरी किस्त का ब्योरा वित्त मंत्री​ निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने शुक्रवार को साझा किया. तीसरी किस्त का पूरा फोकस कृषि क्षेत्र और उससे जुड़े सेक्टर पर रहा. इसमें न केवल बुनियादी ढांचे में रिफॉर्म कर बाजार तक पहुंच बढ़ाने, सप्लाई और कोल्ड चेन को दुरुस्त करने पर फोकस किया गया बल्कि किसानों को हर समय वाजिब कीमत मिल सके, इसके लिए व्यापक कानूनी बदलाव के एलान हुए.​ फार्म गेट इंफ्रा के लिए जहां 1 लाख करोड़ रुपये का एलान किया गया वहीं, 65 साल पुराने आवश्वक वस्तु अधिनियम में भी सरकार संशोधन करने जा रही है.

वित्त मंत्री सीतारमण ने कोरोना महामारी के चलते देशभर में लागू लॉकडाउन के कारण काफी दबाव में आए खेती और सहायक गतिविधियों जैसेकि पशुपालन, मछली पालन, मधुमक्खी पालन, हर्बल खेती आदि के लिए पैकेज की घोषणा की. वित्त मंत्री की तरफ से कृषि और उससे जुड़े सेक्टर के लिए जो अहम 11 एलान किए गए उसमें 8 घोषणाएं कृषि इंफ्रा को मजबूत करने, क्षमता और लॉजिस्टिक डेवलपमेंट से थे. जबकि 3 एलान प्रशासनिक सुधारों के क्षेत्र में किए गए. देखा जाए तो सरकार का यह एलान एग्री सेक्टर के लिए एक मिनी बजट की तरह है.

फार्म गेट इंफ्रा पर 1 लाख करोड़ का दाव

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कृषि उपज के रखरखाव, ट्रांसपोर्टेशन एवं मार्केटिंग सुविधाओं के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 1 लाख करोड़ रुपये के एग्री इंफ्रा फंड की घोषणा की. इस फंड का इस्तेमाल कोल्ड स्टोरेज, कटाई के बाद स्टोरोज ढांचे पर किया जाएगा. वित्त मंत्री का कहना था कि किसान सर्दी, गर्मी, बरसात तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उत्पादन करता है और 130 करोड़ देशवासियों को पेट भरता है. लेकिन फसलों के भंडारण और उनकी खरीद की सही व्यवस्था के अभाव में उन्हें बहुत नुकसान झेलना पड़ता है. इसे देखते हुए कोल्ड स्टोरेज, फसल कटाई के बाद मैनेजमेंट आदि के लिए 1 लाख करोड़ रुपये का फंड जल्द बनाने का फैसला किया गया है.

घरेलू उत्पाद बनेंगे ब्रांड! 10 हजार करोड़ दिए

सरकार ने अब घरेलू कृषि उत्पादों को बढ़ावा देने पर फोकस किया है. घरेलू कृषि उत्पादों को ब्रांड बनाने और दुनियाभर में पॉपुलर करने के लिए सरकार फेमस फूड प्रोडक्ट्स के लिए क्लस्टर बनाएगी. ये क्लस्टर अलग अलग राज्यों में बनाए जाएंगे, जहां का जो उत्पाद पॉपुलर होगा. वित्त मंत्री सीतारमण ने सूक्ष्म खाद्य उपक्रमों (एमएफई) को संगठित करने के लिए 10,000 करोड़ रुपये की योजना की भी घोषणा की. यह योजना दो लाख एमएफई की मदद के लिए शुरू की जाएगी. इसके तहत क्लस्टर आधारित रुख अपनाया जाएगा. मसलन उत्तर प्रदेश के लिए आम, बिहार में मखाना, जम्मू-कश्मीर में केसर, पूर्वोत्तर के लिए बांस, आंध्र प्रदेश के लिए लाल मिर्च जैसे क्लस्टर बनाने की सुविधा के लिये इस फंड इस्तेमाल किया जाएगा. इस कोष के जरिये नए बाजारों को भारतीय उत्पादों का निर्यात किया जाएगा.

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मछली पालन,  इंफ्रा पर 20,000 करोड़ खर्च 

मोदी सरकार ने मछली पालन, मत्स्य इंफ्रा और उससे जुड़ी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए 20,000 करोड़ रुपये के फंड का एलान किया है. वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि समुद्री और अंतर्देशीय मत्स्य पालन के विकास के लिए 20,000 करोड़ रुपये की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना शुरू की जाएगी. इसके तहत समुद्री और अंतर्देशीय मत्स्यपालन में सम्मीलित विकास के लिए 11 हजार करोड़ रुपये दिए जा रहे हैं. जबकि, 9,000 करोड़ रुपये इंफ्रा डेवलपमेंट पर खर्च होंगे. इसमें फिशिंग हार्बर्स, कोल्ड चेन, मंडियां आदि का निर्माण शामिल है. वित्त मंत्री ने कहा कि इससे अगले पांच सालमें मछली उत्पादन 70 लाख टन बढ़ जाएगा, 55 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा और 1 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त निर्यात होगा.

13,343 करोड़ से पशुओं का टीकाकरण

केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत 100 फीसदी पशुओं के टीकाकरण का लक्ष्य तय किया है. इस योजना पर 13,343 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का प्रस्ताव है. इससे 53 करोड़ पशुओं को मुंहपका, खुरपका रोगों से निजात दिलाई जाएगी. वित्त मंत्री का कहना है कि इससे हमारे पशु उत्पाद की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मांग और स्वीकार्यता बढ़ेगी. अब तक इस योजना में 1.5 करोड़ गायों और भैसों का टीकाकरण हो चुका है.

पशुपालन इंफ्रा के लिए 15,000 करोड़

वित्त मंत्री सीतारमण ने एक अहम एलान पशुपालन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को लेकर किया. उन्होंने पशुपालन के बुनियादी ढांचे के लिए 15 हजार करोड़ रुपये का एलान किया. पशुपालन बुनियादी ढांचा विकास कोष के तहत डेयरी प्रोसेसिंग की इंडस्ट्री लगाने, पशु आहार इंफ्रा, वैल्यु एडीशन करने आदि के लिए 15 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे. निर्यात के मकसद से विशेष प्लांट लगाने के लिए भी इस फंड से प्रोत्साहन दिया जाएगा.

हर्बल खेती पर 4000 करोड़ का दाव

कोविड19 जैसी महामारी के बीच सरकार ने हर्बल खेती पर एक बड़ा दाव लगाया है​. वित्त मंत्री सीतारमण ने इसके लिए 4000 करोड़ रुपये के फंड का एलान किया. उन्होंने कहा कि हर्बल और औषधीय पौधों की खेती के लिए नैशनल मेडिसिनल प्लांट्स बोर्ड (NMPB) के अंतर्गत योजना बनाई गई है. इसमें 2.25 लाख हेक्टेयर जमीन पर औषधीय पौधों की खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा. उन्होंने कहा कि अगले 2 साल में 4 हजार करोड़ रुपये की लागत से 1 लाख हेक्टेयर जमीन पर औषधीय पौधों की खेती होगी. वित्त मंत्री ने यह भरोसा जताया कि इससे किसानों को 5000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आमदनी होगी. इस योजना के तहत औषधीय पौधों की क्षेत्रीय मंडियां बनाई जाएंगी. इसके अलावा गंगा किनारे हजारों एकड़ में इसके पौधरोपण की मुहिम चलाई जाएगी. NMPB इसके लिए 800 हेक्टेयर क्षेत्र में कॉरिडोर विकसित करेगा. हर्बल खेती के लिए 4000 करोड़ का मेगा प्लान, किसानों को होगी 5000 करोड़ की अतिरिक्त आमदनी

मधुमक्खी पालन के लिए 500 करोड़

सरकार ने इस समय में मधुमक्खी पालन पर भी जोर दिया है. इसके लिए वित्त मंत्री ने 500 करोड़ रुपये की योजना का एलान किया. उन्होंने कहा कि इस योजना का 2 लाख से ज्यादा मधुमक्खी पालकों को फायदा मिलेगा.

आपरेशन ग्रीन: ‘टॉप’ टु टोटल  

सप्लाई चेन बाधित होने से किसानों को अपने उत्पाद बाजारों में बेचना मुश्किल हो जाता है. लॉकडाउन के समय यह सबसे बड़ी समस्या बनकर सामने आए. इसके चलते किसानों को औने—पोने दाम पर अपने उत्पाद बेचना पड़ा. किसानों को इस परेशानी से बचाने के लिए वित्त मंत्री ने ऑपरेशन ग्रीन का दायरा टमाटर, प्याज और आलू यानी ‘टॉप’ से बढ़ाकर टोटल यानी सभी फल—सब्जियों तक कर दिया है. इसके तहत अब 50 फीसदी सब्सिडी माल ढुलाई में और 50 फीसदी सब्सिडी कोल्ड स्टोरेज में भंडारण पर दी जाएगी. यह प्रावधान अभी छह महीने के लिए पायलट के रूप में किया गया है.

65 साल पुराना कानून बदलेगा  

कृषि क्षेत्र में सुधार की दिशा में सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया, जिसकी मांग सालों से चली आ रही थी. वित्त मंत्री सीतारमण ने शुक्रवार को आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 में संशोधन करने का एलान किया है. इसका मकसद कृषि क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और निवेश बढ़ाना है. वित्त मंत्री का कहना है कि कानून में बदलाव से किसानों की आय में बढ़ोतरी का संभावना बढ़ जाएगी। संशोधन के तहत सरकार ने अनाज, खाद्य तेल, तिलहन, दालें, प्याज और आलू को डिरेग्युलेट यानी आवश्यक वस्तुओं के दायरे से बाहर निकालने का फैसला किया है. हालांकि, वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि आपात परिस्थिति, सूखा जैसे हालात में सरकार इसमें बदलाव कर सकेगी.

Essential Commodities Act: किसानों की बढ़ेगी आय! 65 साल पुराने आवश्यक वस्तु अधिनियम में होगा बदलाव

कृषि मार्केटिंग सुधार

किसानों के सामने अबतक एक अहम दिक्कत उत्पाद बेचने को लेकर रहती है. मौजूदा व्यवस्था के तहत APMC के जरिए सिर्फ लाइसेंस वालों के पास ही किसाना अपना उत्पाद बेच सकते हैं. बाकी औद्योगिक उत्पाद को बेचने के लिए ऐसी मजबूरी नहीं है. वित्त मंत्री ने कहा कि कानून में सुधार लाकर अब किसानों को भी अपना उत्पाद कहीं भी बेचने की छूट दी जाएगी. किसान को भी बेहतर दाम मिल पाए और अंतरराज्यीय व्यापार हो सके, यह सुनिश्चित किया जाएगा. इसके लिए केंद्र सरकार के एक कानून लाएगी . वित्त मंत्री ने कहा कि किसानों की उपज को अच्छा मूल्य उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त विकल्प प्रदान करने को एक केंद्रीय कानून तैयार किया जाएगा, जिससे बिना रोकटोक अंतरराज्यीय व्यापार और कृषि उपज के ई-ट्रेडिंग के लिए रूपरेखा तैयार की जा सके.

कीमत और गुणवत्ता निर्धारण का कानून

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि किसानों के लिए सुविधानजक कानूनी ढ़ांचा बनाने के लिए सरकार नया कानून लेकर आएगी. इससे किसानों का उत्पीड़न न हो, जोखिम रहित आय भी सुनिश्चित हो सके. वित्त मंत्री ने कहा कि किसानों को प्रोसेसरों, एग्रीगेटर्स, बड़े रिटेलर्स, निर्यातकों के साथ निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से जुड़ने के लिए एक सुविधाजनक कानूनी ढांचा बनाया जाएगा.

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