Five States Assembly Elections 2022: यूपी-पंजाब समेत पांच राज्यों में चुनावी बिगुल, राज्यवार जानिए कि किससे तय होगी नतीजों की दिशा

Five States Assembly Elections 2022: ये चुनाव अयोध्या में राम मंदिर निर्माण, किसान आंदोलन व कोरोना महामारी से बुरी तरह प्रभावित व्यवस्था के बीच हो रहे हैं और चुनाव नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं.

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उत्तर प्रदेश और पंजाब समेत पांच राज्यों की 690 सीटों पर मतदान होंगे.

Five States Assembly Elections 2022: उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में चुनावी बिगुल बज चुका है और अगले महीने 10 फरवरी से मतदान शुरू हो जाएगा. शनिवार (10 जनवरी) को चुनाव आयोग ने प्रेस कांफ्रेंस कर जानकारी दी थी कि उत्तर प्रदेश में 10 फरवरी से लेकर सात मार्च के बीच सात चरणों में; पंजाब, उत्तराखण्ड व गोवा में 14 फरवरी को और मणिपुर में 27 व 3 मार्च को मतदान होंगे. इसके अलावा कोरोना महामारी के बढ़ते खतरे को देखते हुए अहम निर्देश जारी किए हैं जिसमें 15 जनवरी तक किसी भी प्रकार से फिजिकल रैली से मना कर दिया है.

पांचों राज्यों में चुनावी तस्वीर देखें तो स्पष्ट रूप से किसी एक पार्टी की जीत के बारे में सुनिश्चित तौर पर नहीं कहा जा सकता है. ये चुनाव अयोध्या में राम मंदिर निर्माण, किसान आंदोलन व कोरोना महामारी से बुरी तरह प्रभावित व्यवस्था के बीच हो रहे हैं और चुनाव नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं.

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UP Assembly Elections

  • दिल्ली का रास्ता लखनऊ से होकर जाता है और इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश को लेकर अधिक जोर-आजमाइश हो रही है. पिछले चुनाव में बीजेपी को शानदार बहुमत मिला था और उसे करीब तीन-चौथाई सीटें हासिल हुई थीं लेकिन इस बार मुकाबला बहुकोणीय दिख रहा है. हालांकि मुख्य मुकाबला बीजेपी और सपा के बीच माना जा रहा है लेकिन बसपा और कांग्रेस भी अपनी मौजूदगी फिर साबित करने की कोशिश कर रही है तो आम आदमी पार्टी भी अपने प्रसार की कोशिश कर रही है.
  • उत्तर प्रदेश के चुनावी समर को अयोध्या में राम मंदिर निर्माण, किसान आंदोलन, कोरोना महामारी के कारण उपजी अव्यवस्था के साथ ही पीएम मोदी और हिंदुत्व जैसे कारक प्रभावित करेंगे.
  • राज्य में सात चरणों में चुनाव हो रहे हैं और पहले चरण की शुरुआत किसान आंदोलन के गढ़ यानी पश्चिमी उत्तर प्रदेश से हो रही है. चुनावों का अंत पूर्वांचल से होगा.
  • वर्तमान विधानसभा के लिए करीब पांच साल पहले 2017 में चुनाव हुए थे जिसमें बीजेपी किंग साबित हुई थी. यह चुनाव 2017 में 11 फरवरी से 8 मार्च के बीच सात चरणों में हुए थे और इसमें बीजेपी को तीन-चौथाई सीटें (कुल सीट-403) हासिल हुई थीं. जीत के बाद योगी आदित्यनाथ प्रदेश के मुख्यमंत्री बने.
  • 2017 विधानसभा चुनाव परिणाम:
    बीजेपी- 312 सीटें
    सपा- 47 सीटें
    बसपा- 19 सीटें
    कांग्रेस- 7 सीटें
    निर्दलीय- 3 सीटें

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Punjab Assembly Elections

  • करीब पांच साल पहले पंजाब में हुए विधानसभा चुनाव में कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस ने प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाया था. हालांकि अब कैप्टन के कांग्रेस से बाहर जाकर बीजेपी से हाथ मिलाने और किसान आंदोलन के चलते सभी समीकरण बदल गए हैं और तस्वीर उलझ गई है. सत्तारूढ़ पार्टी कांग्रेस नए चेहरे के साथ मैदान में है और मौजूदा मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के दम पर उसकी नजरें राज्य के करीब 32 फीसदी दलित वोटरों पर हैं.
  • पिछले चुनाव में आम आदमी पार्टी मुख्य विपक्षी दल बनकर उभरी थी लेकिन उसके सामने मजबूत चेहरे की दिक्कत है जबकि अकाली दल के सामने नाराज किसानों की चुनौती है. किसान आंदोलन के समय अकाली दल ने एनडीए गठबंधन से अलग होने का फैसला किया था लेकिन किसानों की नाराजगी कितनी दूर हुई, यह चुनावी नतीजों से साबित होगा. राज्य में दलितों की अच्छी-खासी संख्या है और उनका वोट हासिल करने के लिए अकाली दल ने बसपा के साथ गणबंधन किया है.
  • राज्य में एक और मोर्चा उभरा है जिसकी मजबूती पीएम मोदी और कैप्टन अमरिंदर सिंह हैं. बीजेपी को भरोसा है कि कृषि कानूनों की वापसी के बाद कैप्टन व सुखदेव सिंह ढींढसा के साथ साझेदारी से वह अपनी स्थिति को मजबूत कर सकती है.
  • अभी हाल में पीएम मोदी की पंजाब यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में सेंध भी चुनावी गणित को प्रभावित कर सकती है. राज्य में करीब 39 फीसदी मतदाता हिंदू हैं और बीजेपी की नजर मुख्य रूप से इन्हीं मतदाताओं पर हो सकती है.
  • 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में बड़ी जीत हासिल की थी. 117 विधानसभा सीटों पर हुए चुनाव में कांग्रेस को 77 सीटों पर फतह हासिल हुई थी और कैप्टन मुख्यमंत्री बने थे. हालांकि कार्यकाल पूरा होने से पहले पार्टी से मतभेद के चलते उन्होंने अपना पद छोड़ दिया और पिछले साल सितंबर 2021 में चरणजीत सिंह चन्नी ने राज्य संभाला.
  • 2017 चुनाव परिणाम (कुल सीटें- 117):
    कांग्रेस- 77
    आम आदमी पार्टी- 20
    शिरोमणि अकाली दल- 15
    भाजपा- 3
    लोक इंसाफ पार्टी- 2

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Uttrakhand Assembly Elections

  • पिछले चुनाव में उत्तराखंड में बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी लेकिन पांच साल में प्रदेश में तीन मुख्यमंत्री बन चुके हैं. यह चुनाव पीएम मोदी और इसे उनके करीबी माने जाने वाले राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अग्नि परीक्षा माना जा रहा है.
  • यह राज्य करीब 22 साल पहले बना था और तब से अब तक इसने हर पांच साल में सत्ता परिवर्तन किया है और इस हिसाब से कांग्रेस की सरकार बनने की संभावना अधिक है लेकिन वह केरल के नतीजों के बाद इस भुलावे में नहीं रहना चाहेगी. केरल में भी पांच साल में सत्ता परिवर्तन की परंपरा रही है लेकिन हाल ही में हुए केरल चुनाव में कांग्रेस गठबंधन लगातार दूसरी बार सत्ता से बाहर रही.
  • राज्य की दोनों पार्टियों कांग्रेस और बीजेपी को सबसे अधिक पार्टी के अंदर की कलह से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
  • राज्य में बीजेपी और कांग्रेस की ही अहम मौजूदगी अब तक रही है लेकिन इस बार आम आदमी पार्टी भी मजबूत तैयारियों के साथ मुकाबले को दिलचस्प बना सकती है.
  • उत्तराखण्ड की वर्तमान विधानसभा के लिए करीब पांच साल पहले 2017 में चुनाव हुए थे जिसमें बीजेपी किंग साबित हुई थी. यह चुनाव 2017 में 15 फरवरी को एक चरण में हुआ था और इसमें बीजेपी को सबसे अधिक सीटों पर जीत हासिल हुई थी. पिछले चार वर्षों में प्रदेश में तीन मुख्यमंत्री बन चुके हैं. 2017 के चुनावों में जीत के बाद त्रिवेंद्र सिंह रावत मुख्यमंत्री बने और फिर 3 वर्ष 357 दिनों के बाद तीरथ सिंह रावत मुखिया बने. तीरथ सिंह रावत महज 116 दिन तक मुख्यमंत्री रहे और उनके बाद अभी पुष्कर सिंह धामी सरकार के प्रमुख हैं.
  • 2017 चुनाव परिणाम (कुल सीटें- 70):
    बीजेपी- 57 सीटें
    कांग्रेस- 11 सीटें
    निर्दलीय- 2 सीटें

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Goa Assembly Elections

  • गोवा में मुकाबला कई दलों की मौजूदगी के चलते अधिक उलझा हुआ है. पिछले चुनाव में कांग्रेस बहुमत से बीजेपी की तुलना में कम दूरी पर थी लेकिन गणबंधन के जरिए बीजेपी लगातार तीसरी बार सरकार बनाने में सफल रही.
  • गोवा में मुख्य मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच होता आया है लेकिन दो अहम क्षेत्रीय पार्टियां महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी और गोवा फारवर्ड पार्टी ब्लॉक इन्हें नुकसान पहुंचाती रही हैं. इस बार दलों की संख्या और बढ़ने से मुकाबला और उलझ गया है. इस बार टीएमसी (तृणमूल कांग्रेस) समेत दो अन्य दलों ने भी राज्य के चुनावी समर में प्रवेश किया है. वहीं एनसीपी, आप (आम आदमी पार्टी) और शिवसेना भी राज्य में सक्रिय है.
  • पिछले विधानसभा चुनाव में किसी भी एक पार्टी को सरकार बनाने के लिए जरूरी सीटें नहीं हासिल हुई थी. 40 सीटों पर हुए चुनाव में कांग्रेस को बीजेपी की तुलना में अधिक सीटें हासिल हुई थीं लेकिन सरकार नहीं बना सकी. मनोहर पर्रिकर गठबंधन के जरिए किसी तरह बीजेपी की सरकार बनाने में सफल रहे. गोवा में इस समय प्रमोद सावंत की सरकार है. बता दें कि गोवा देश का पहला राज्य है जहां 2017 में पहली बार पूरे राज्य में वीवीपैट लगी हुई ईवीएम पर मतदान हुए.
  • 2017 चुनाव परिणाम (कुल सीटें- 40):
    बीजेपी- 13
    कांग्रेस- 17
    महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी- 3
    निर्दलीय- 3
  • गोवा फारवर्ड पार्टी- 3
    एनसीपी- 1

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Manipur Uttrakhand Assembly Elections

  • बीजेपी से सात सीटें अधिक जीतने के बावजूद मणिपुर में पिछली बार कांग्रेस सरकार नहीं बना सकी थी और बीजेपी ने गणबंधन के जरिए पहली बार सरकार बनाने में सफलता हासिल किया.
  • इस बार के चुनाव में सबसे अहम मुद्दा अफस्पा बन सकता है. कुछ दिनों पहले नगालैंड में सेना की फायरिंग में 14 नागरिकों की मौत के बाद यह चर्चा का विषय बन गया है जो चुनावी समर को प्रभावित कर सकता है.
  • मणिपुर का चुनाव इसलिए अहम है क्योंकि पूर्वोत्तर के राज्यों में असम और मणिपुर के नतीजों का असर शेष पांच राज्यों पर भी पड़ता है.
  • पिछले साल राज्य के मुख्यमंत्री के खिलाफ बगावत हुई थी लेकिन सरकार इसे संभालने में सफल रही. हालांकि स्थिति कितनी नियंत्रण में है, इसका पता चुनावी नतीजों से लगेगा.
  • 2017 में मणिपुर में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी लेकिन बीजेपी ने नेशनल पीपुल्स पार्टी, नगा पीपुल्स फ्रंट और लोक जनशक्ति पार्टी के साथ मिलकर पहली बार मणिपुर में एन बीरेन सिंह के नेतृत्व में सरकार बनाने में सफलता हासिल किया.
  • 2017 चुनाव परिणाम (कुल सीटें- 60):
    कांग्रेस- 28
    बीजेपी- 21
    नगा पीपुल्स फ्रंट- 4
    नेशनल पीपुल्स पार्टी- 4
    निर्दलीय- 1
    लोक जनशक्ति पार्टी- 1
    तृणमूल कांग्रेस- 1

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