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धारा 377 पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला- भारत में समलैंगिक संबंध अपराध नहीं

इस मामले पर फैसला सुनाते हुए चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि एलजीबीटी कम्युनिटी के लोगों को भी उतने ही अधिकार हैं, जितने किसी भी सामान्य व्यक्ति के पास हैं. एक-दूसरे के अधिकारों को सम्मान करना चाहिए.

September 6, 2018 12:38 PM
Section 377, LGBT, Supreme court decision on Section 377, LGBT community, CJI, Depak Mishra, IPC Section 377इस मामले पर फैसला सुनाते हुए चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि एलजीबीटी कम्युनिटी के लोगों को भी उतने ही अधिकार हैं, जितने किसी भी सामान्य व्यक्ति के पास हैं. एक-दूसरे के अधिकारों को सम्मान करना चाहिए. (Express Photo)

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अपने ऐतिहासिक फैसले में कहा कि देश में दो बालिग लोगों के बीच समलैं​गिक संबंध अपराध नहीं हैं. चीफ जस्टिस आॅफ इंडिया की अगुवाई वाली पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने आईपीसी की धारा 377 के उस हिस्से को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि समलैंगिक संबंध बनाना अपराध है. इस मामले पर फैसला सुनाते हुए चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि एलजीबीटी कम्युनिटी के लोगों को भी उतने ही अधिकार हैं, जितने किसी भी सामान्य व्यक्ति के पास हैं. एक-दूसरे के अधिकारों को सम्मान करना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने इस तरह दिसंबर 2013 को सुनाए गए अपने ही फैसले को पलट दिया है. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, के साथ जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा की संवैधानिक पीठ ने 10 जुलाई को मामले की सुनवाई शुरु की थी और 17 जुलाई को फैसला सुरक्षित रख लिया था.

जस्टिस मिश्रा ने कहा कि संवैधानिक लोकतांत्रिक व्यवस्था में बदलाव आवश्यक है. जीवन का अधिकार मानवीय अधिकार है. शीर्ष कोर्ट ने अपने फैसले में सेक्शुअल ओरिएंटेशन बायलॉजिकल बताया है. कोर्ट का कहना है कि इस पर किसी भी तरह की रोक संवैधानिक अधिकार का हनन है. इसलिए समलैंगिक संबंधों को अपराध मानना तर्कहीन और अन्याय है.

धारा 377 क्या है?
भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 377 के अनुसार, कोई किसी पुरुष, स्त्री या पशुओं से प्रकृति की व्यवस्था के विरुद्ध संबंध बनाता है तो यह अपराध होगा. इस अपराध के लिए उसे उम्रकैद या 10 साल तक की कैद के साथ अर्थदंड की सजा भुगतनी पड़ेगी. यानी, धारा-377 के मुताबिक अगर दो बालिग आपसी सहमति से भी समलैंगिक संबंध बनाते हैं तो वह अपराध होगा.

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