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लगातार दो साल वित्तीय घाटा लक्ष्य पूरा न होना क्रेडिट रेटिंग के लिए निगेटिव: मूडीज

सरकार ने अप्रैल-मई में होने वाले आम चुनावों को देखते हुए 2019-20 के अंतरिम बजट(interim budget) में किसानों को आय समर्थन देने के लिए ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि’ योजना की घोषणा की है जिससे उसका खर्च बढ़ेगा तो दूसरी तरफ मिडिल क्लास के लिए कटौती का भी प्रस्ताव किया है.

Updated: Feb 06, 2019 1:49 AM
 Fiscal slippage for two consecutive years credit negative: Moody'sलगातार दो साल राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाना साख के लिये ठीक नहीं: मूडीज

लगातार दो वित्त वर्ष राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) के बजटीय लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाना, वहीं टैक्स कटौती और आने वाले चुनावों को देखते हुए सरकार का खर्च बढ़ना भारत की साख के लिए ठीक नहीं है. यह बात क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विसेज (Moody’s) ने कही है.

सरकार ने अप्रैल-मई में होने वाले आम चुनावों को देखते हुए 2019-20 के अंतरिम बजट (interim budget) में किसानों को आय समर्थन देने के लिए ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि’ (PM-Kisan) योजना की घोषणा की है. इससे सरकार का खर्च बढ़ेगा. दूसरी तरफ मिडिल क्लास के लिए कटौती का भी प्रस्ताव किया है. इससे राजकोषीय घाटे की स्थिति पर दबाव बढ़ने की आशंका है.

चालू वित्त वर्ष का लक्ष्य

चालू वित्त वर्ष में सरकार ने राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 3.4 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है. यह सरकार के 2018-19 के बजट लक्ष्य 3.3 प्रतिशत से ज्यादा है. इसके अलावा सरकार 2017-18 में भी राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाई थी.
वित्त वर्ष 2019-20 के प्रस्तावित अंतरिम बजट में की गई घोषणाओं को देखते हुए भी राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को पाना मुश्किल नजर आ रहा है.

मूडीज का कहना है, ‘‘आगामी चुनाव को देखते हुए खर्च बढ़ाने और कर कटौती प्रस्ताव से राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाना देश की क्रेडिट रेटिंग के लिए नकारात्मक है.’’

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सरकारी बैंकों के लिए औपचारिक पूंजी समर्थन योजना नहीं होना भी नुकसानदेह

मूडीज का कहना है कि सरकार का लगातार दो वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे के बजटीय लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाना मध्यम अवधि में फिस्कल कंसॉलिडेशन के लिए ठीक नहीं है. इसके अलावा सरकारी बैंकों के लिए सरकार के पास कोई औपचारिक पूंजी समर्थन योजना नहीं होने का भी देश की क्रेडिट रेटिंग पर नकारात्मक असर पड़ेगा.

रेटिंग एजेंसी ने कहा कि बजट में पब्लिक सेक्टर के बैंकों के लिए कोई पूंजी समर्थन योजना नहीं रखी गई है. साथ ही सरकार ने पिछले साल के बजट में घोषित पब्लिक सेक्टर की तीन साधारण बीमा कंपनियों के विलय पर भी कोई योजना पेश नहीं की है. यह विलय कार्यक्रम को लेकर सरकार की अस्पष्टता को दिखाता है.

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