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किसान आंदोलन: दिल्ली-NCR में 50,000 करोड़ के व्यापार को लगा झटका, व्यापारियों के लिए हालात चिंताजनक

जब कोरोना महामारी के कारण तबाह हुआ व्यापार जैसे तैसे ठीक होने की कगार पर था, किसानों के आंदोलन से हो रहा नुकसान व्यापारियों के लिए बेहद चिंताजनक है.

January 21, 2021 12:58 PM
Farmers protest in Delhi NCR resulted in loss of 50 thousand crores rupee business, cait, confederation of all india traders, farm lawsसरकार का नया प्रस्ताव न्यायसंगत व उचित. Image: PTI

Farmers’ Protest: पिछले 57 दिनों से चले आ रहे किसानों के आंदोलन से दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में व्यापारियों को लगभग 50 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. ऐसे समय में जब कोरोना महामारी के कारण तबाह हुआ व्यापार जैसे तैसे ठीक होने की कगार पर था, किसानों के आंदोलन से हो रहा नुकसान व्यापारियों के लिए बेहद चिंताजनक है. कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने यह बात कही है. कैट का कहना है कि सरकार का नया प्रस्ताव जिसमें डेढ़ साल के लिए कृषि कानूनों को स्थगित करने व किसान नेताओं के साथ एक संयुक्त समिति बनाने की बात कही गई है, काफी न्यायसंगत और उचित है. इसलिए अब किसानों को लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस प्रस्ताव को स्वीकार करना चाहिए और अपना आंदोलन वापस ले लेना चाहिए.

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया और राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि यदि अब भी किसान सरकार के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करते हैं तो यह माना जाएगा कि वे समाधान में रुचि नहीं रखते हैं और कुछ विभाजनकारी ताकतें समस्याएं बनाए रखने के लिए किसानों का इस्तेमाल कर रही हैं.

अकेले किसानों से नहीं जुड़े हैं कृषि कानून

खंडेलवाल ने कहा कि कृषि कानून अकेले किसानों से नहीं जुड़े हैं. देश भर में लगभग 1.25 करोड़ व्यापारी मंडियों में काम कर रहे हैं. ये व्यापारी किसानों को न केवल फसल बेचने में सुविधा प्रदान करते हैं बल्कि उनकी जरूरत के समय में उनकी कई तरह से  मदद भी करते हैं. ये व्यापारी 4 करोड़ से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार प्रदान करते हैं. कृषि कानून में सप्लाई चेन के इस महत्वपूर्ण घटक को ही हटाने के बारे में साफ कहा गया है. ऐसे में इन बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका का क्या होगा? क्या वे एक ही झटके में अपनी आजीविका से बाहर हो जाएंगे? इन लोगों के हितों को भी संरक्षित करने की जरूरत है.

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व्यापारियों को संयुक्त समिति में किया जाए शामिल

भरतिया और खंडेलवाल ने सरकार से अपील की है कि व्यापारियों को भी प्रस्तावित संयुक्त समिति में प्रतिनिधित्व दिया जाए. यदि व्यापारियों को विश्वास में लिए बिना कोई भी समझौता किया जाता है तो कृषि अधिनियम मुद्दा विवादों में रहेगा और सरकार की अब तक की सारी कवायद बेकार साबित हो सकती है. इसलिए इस विवादास्पद मुद्दे का व्यापक समाधान हो और सभी हितधारकों के वैध हित को संरक्षित किया जाए.

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