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Budget 2019 : किसानों के लिए इनकम कमीशन बनाए सरकार, हर महीने 18 हजार हो न्यूनतम आमदनी- कृषि विशेषज्ञ

चुनावी साल में पेश होने वाले बजट में लोकलुभावन घोषणाएं होती हैं. ऐसे में 1 फरवरी को पेश होने वाला अंतरिम बजट सरकार के साथ-साथ आम लोगों के लिए बेहद खास होगा. देश के कृषि क्षेत्र और किसानों की बात की जाए तो उसे भी प्रधानमंत्री मोदी के इस चुनावी बजट काफी उम्मीदें हैं.

Updated: Jan 31, 2019 3:53 PM
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1 फरवरी को मोदी सरकार के पहले टर्म का आखिरी Budget संसद में पेश होगा. संभावना है कि इस बार अंतरिम वित्त मंत्री पीयूष गोयल मोदी सरकार का पहला अंतरिम बजट पेश करेंगे. आमतौर पर ऐसा देखा गया है कि चुनावी साल में पेश होने वाले बजट में लोकलुभावन घोषणाएं होती हैं. ऐसे में यह बजट सरकार के साथ-साथ आम लोगों के लिए बेहद खास होगा. देश के कृषि क्षेत्र और किसानों की बात की जाए तो उसे भी प्रधानमंत्री मोदी के इस चुनावी बजट काफी उम्मीदें हैं.

हाल ही तीन बड़े राज्यों में विधानसभा चुनाव में मिली शिकस्त के बाद बीजेपी अब किसानों को अपने पाले में लाने की हर मुमकिन कोशिश करेगी. इसलिए बजट में इसकी बानगी दिखाई दे सकती है. ऐसा माना जा रहा है कि सरकार किसानों के लिए तेलंगाना के ‘रायतु बंधु’ स्कीम की तरह नेशनल स्कीम ला सकती है. किसानों के बैंक खाते में सीधे फंड ट्रांसफर की सुविधा का एलान हो सकता है.

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‘किसानों के लिए घोषणाएं नहीं हुई तो किसान हित का दावा भी जुमला’
कृषि मामलों के जानकार और किसान हितों की आवाज उठाने वाले देवेन्द्र शर्मा ने फाइनेंशियल एक्सप्रेस हिंदी ऑनलाइन से बातचीत में कहा कि अंतरिम बजट में किसानों के लिए अगर बेहतर घोषणाएं नहीं की गईं तो यह भी एक जुमला हो जाएगा. उनका मानना है कि अगर सब्सिडी को डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर (DBT) के जरिए किसानों को नकदी दी जाती है तो यह धोखा होगा. इसकी मुख्य वजह यह है कि किसानों को सब्सिडी अगर डीबीटी के जरिए मिलती है तो उन्हें खाद-बीज इत्यादि महंगे दामों पर खरीदनी होगी और सब्सिडी का कोई मतलब नहीं रह जाएगा. नीति आयोग का आकलन है कि अगर किसानों को सारी सब्सिडी डीबीटी के जरिए दी जाए तो प्रति हेक्टेयर यह राशि करीब 15 रुपये होगी.

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‘सब्सिडी को DBT के जरिेए देना इनकम सोर्स नहीं’
केंद्र सरकार किसानों को कर्जमाफी की बजाय इनकम सोर्स उपलब्ध कराने की बात कह रही है. इसके लिए अनुमान लगाया जा रहा है कि किसानों को सीधे उनके बैंक खाते में कैश ट्रांसफर किया जाएगा. हालांकि कृषि विशेषज्ञ देवेन्द्र शर्मा के मुताबिक, सब्सिडी को डीबीटी के जरिए देना इनकम सोर्स नहीं है और सरकार को किसानों के लिए इनकम सोर्स की व्यवस्था करनी चाहिए.

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‘बजट से खास उम्मीद नहीं’
चुनावी बजट होने के बावजूद कृषि विशेषज्ञ देवेन्द्र शर्मा को इससे खास उम्मीद नहीं है. इसकी वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि अगर केंद्र सरकार तेलंगाना का रायतु बंधु स्कीम की तरह किसानों को 10 हजार करोड़ रुपये प्रति हेक्टेयर देने का प्रावधान करती है तो उसका राजकोषीय घाटा बढ़ सकता है. एसबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक अगर प्रति किसान परिवार 12 हजार रुपये दिए जाएं तो सरकार को 50 हजार करोड़ रुपये देने होंगे.

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अंतरिम बजट के लिए सरकार को सुझाव
केंद्र सरकार से हालांकि कोई खास उम्मीद नहीं है लेकिन उन्होंने सरकार को कुछ सुझाव जरूर दिए हैं. केंद्र सरकार किसानों को ब्याज मुक्त कर्ज देने पर विचार कर सकती है. इसके अलावा उन्होंने तेलंगाना का उदाहरण देते हुए कहा कि जिन किसानों के पास खुद की कृषि योग्य भूमि नहीं है उन्हें भी इनकम सोर्स दिया जाए. जिन किसानों की कर्जमाफी हो गई है, उन्हें तो सरकारी राहत मिल गई है लेकिन जिनकी नहीं हुई है उन्हें प्रति परिवार 50 हजार रुपये की राहत दी जाए.

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किसानों के लिए इनकम कमीशन का गठन हो
देवेंदर शर्मा के मुताबिक किसानों के लिए एक इनकम कमीशन का गठन किया जाए. यह आयोग किसानों के लिए न्यूनतम इनकम की राशि का निर्धारण करेगा. किसानों की न्यूनतम आय कम से कम 18 हजार रुपये प्रति माह निर्धारित की जाए. उन्होंने मण्डी पर अधिक से अधिक से निवेश की जरूरत बताई. इस समय देश भर में 7600 मण्डिया हैं जबकि किसानों की उपज के मुताबिक अभी कम से कम 42 हजार मण्डियों की जरूरत है.

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कॉरपोरेट और किसानों के कर्ज का भार या तो सिर्फ सरकार उठाए या बैंक
उन्होंने राजकोषीय घाटे की सीमा पर भी सवाल उठाया. Fiscal Responsibility and Budget Management (FRDM) के तहत अधिकतम घाटा 3 फीसदी तक निर्धारित किया गया है, देवेंदर शर्मा का कहना है कि इस सीमा का क्या तुक है. उन्होंने मध्य प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां किसानों के लिए बजट राशि का सिर्फ 6.75 फीसदी ही मिलता है जबकि राज्य में 85 फीसदी किसान हैं. किसानों की कर्जमाफी से राज्यों पर पड़ने वाले दबाव पर उन्होंने सवाल उठाया कि कॉरपोरेट भी तो बैंकों से कर्ज लेते हैं फिर उनको राहत मिलने पर सवाल क्यों नहीं उठाएं जाते हैं. देवेंदर शर्मा का सुझावा है कि या तो दोनों राहत बैंक दे या दोनों का दबाव राज्य उठाए.

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