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कृषि विधेयकों के समर्थन में FAIFA, कहा- किसानों की आय दोगुनी करने में मिलेगी मदद

FAIFA का दावा है कि वह आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और गुजरात में कॉमर्शियल फसलों की खेती करने वाले किसानों और खेत श्रमिकों का प्रतिनिधित्व करती है.

September 22, 2020 1:40 PM
Expected 20-fold growth in online grocery sales over the next five years is the surest shot to end the stifling status quo, provided farmers can unite and hold their own in negotiations with aggregators. 

विपक्षी दलों के तरफ से पुरजोर विरोध के बावजूद संसद से पास कृषि विधेयकों का किसान संगठनों के अखिल भारतीय परिसंघ (FAIFA) ने समर्थन किया है. संगठन का कहना है कि हाल में पारित कृषि विधेयकों से किसानों को किसी भी राज्य में अपनी फसल बेचने की आजादी मिलेगी और फसल खरीद की प्रक्रिया में उनका नियंत्रण बढ़ेगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए FAIFA ने कहा कि संसद में पारित दोनों विधेयकों से किसानों की समृद्धि और उनकी आय दोगुनी करने में मदद मिलेगी. संगठन का दावा है कि वह आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और गुजरात में कॉमर्शियल फसलों की खेती करने वाले किसानों और खेत श्रमिकों का प्रतिनिधित्व करती है.

परिसंघ ने एक बयान में कहा, ‘‘ये दूरदर्शी विधेयक किसानों के लिए एक स्थायी और लाभदायक भविष्य सुनिश्चित करेंगे.’’ एफएआईएफए के अध्यक्ष बी वी जवारे गौड़ा ने कहा कि नए नियमों से एक ऐसे इकोसिस्टम का निर्माण होगा, जहां किसान और व्यापारी कृषि उपज की बिक्री और खरीद पूरी आजादी के साथ अपनी पसंद से कर सकेंगे और राज्यों के बीच व्यापार और वाणिज्य को बढ़ावा मिलेगा.

केंद्र सरकार ने जिन दो कृषि विधेयकों को पास कराया है. माना जा रहा है कि उससे छोटे और मझोले वर्ग के किसानों को काफी फायदा पहुंचेगा. नीति आयोग की 2015 की एक रिपोर्ट में यह कहा गया कि सरकार के लिए यह संभव नहीं है कि वह हर सीजन में बड़े पैमाने पर हर कमोडिटी की एमएसपी पर खरीदारी करे.

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सदन से पास बिल, विरोध

गौरतलब है कि राज्यसभा की मंजूरी के साथ ही दो किसान बिल- फॉर्मर्स प्रोड्यूस ट्रेड ऐंड कमर्श (प्रमोशन ऐंड फैसिलिटेशन) बिल 2020 और फॉर्मर्स ( एम्पॉवरमेंट ऐंड प्रोटेक्शन) अग्रीमेंट ऑन प्राइस एश्योरेंस ऐंड फार्म सर्विसेज बिल 2020 संसद से पास हो गया. इस बिल को लेकर विपक्षी दल विरोध कर रहे हैं और पुरजोर तरीके से हमलावर है.

खासकर पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान इस बिल का विरोध कर रहे हैं. इन क्षेत्रों में ज्यादातर बड़ी जोत वाले किसान हैं. किसानों में यह आशंका है कि सरकार एमएसपी यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था से बाहर निकलना चाहती है. कृषि का कॉरपोरेटाइजेशन हो जाएगा और किसान अपनी ही खेत में बंधुआ मजदूर हो जाएगा.

हालांकि, इस बिल पर उपजे विवाद के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद यह स्पष्ट कर चुके हैं कि सरकारी खरीद और एमएसपी की व्यवस्था पहले की तरह बनी रहेगी. इस कानून से किसानों को लाभ यह होगी कि वे अपनी फसल अपनी सहूलियत और फायदे के हिसाब से कहीं भी बेच सकेंगे.

(Input: PTI)

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