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दूसरे राज्य या शहर से भी डाल पाएंगे वोट, नई टेक्नोलॉजी पर चल रहा काम

चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने बताया कि प्रॉजेक्ट फिलहाल शोध और विकास के चरण में है और इसका मकसद ‘प्रोटोटाइप’ विकसित करना है.

February 16, 2020 7:20 PM
electors to vote from far away cities without going to the designated polling station of their respective constituencies, Election Commission, IIT Madras join hands to develop new technologyRepresentational Image

चुनाव आयोग IIT मद्रास के साथ मिलकर एक ऐसी नई प्रौद्योगिकी विकसित करने पर काम कर रहा है, जिसमें अपने निर्वाचन क्षेत्र से दूर किसी अन्य शहर या राज्य में होने पर भी मतदाता मतदान कर पाएगा. चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने बताया कि प्रॉजेक्ट फिलहाल शोध और विकास के चरण में है और इसका मकसद ‘प्रोटोटाइप’ विकसित करना है.

आयोग की इस भावी पहल से मतदान प्रतिशत बढ़ने और चुनाव संपन्न कराने के खर्च में कमी आने के भी आसार हैं. मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने हाल ही में इस व्यवस्था के बारे में खुलासा किया था कि आईआईटी मद्रास के सहयोग से विकसित की जा रही मतदान की इस पद्धति के तहत किसी भी राज्य में पंजीकृत मतदाता किसी अन्य राज्य से मतदान कर सकेगा.

घर से नहीं होगा मतदान

वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त संदीप सक्सेना ने स्पष्ट किया कि मतदाता को इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए पहले से तय वक्त पर नियत स्थल पर पहुंचना होगा. इस व्यवस्था का मतलब घर से मतदान करना नहीं है. घर से मतदान के लिए और वक्त व उन्नत प्रौद्योगिकी की जरूरत है.

सक्सेना ने कहा, ‘‘मानिए कि लोकसभा चुनाव है और चेन्नई का मतदाता दिल्ली में है. तो मताधिकार का इस्तेमाल करने के लिए अपने निर्वाचन क्षेत्र जाने के बजाय या मतदान नहीं करने के बजाय वह चुनाव आयोग द्वारा बनाए गए स्थान पर खास समय पर आ सकता है और अपना वोट दे सकता है. ऐसे मतदाताओं को यह सुविधा लेने के लिए अपने चुनाव अधिकारी के यहां पहले से आवेदन देना होगा.’’

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सबसे पहले 2010 में इस्तेमाल हुई थी ई-वोटिंग

इस प्रॉजेक्ट से जुड़े एक अन्य अधिकारी ने बताया कि दूरस्थ मतदान का प्रयोग ई-वोटिंग के रूप में सबसे पहले 2010 में गुजरात के स्थानीय निकाय चुनाव में किया गया था. इसमें राज्य के प्रत्येक स्थानीय निकाय के एक-एक वार्ड में ई-वोटिंग का विकल्प मतदाताओं को दिया गया था. इसके बाद 2015 में गुजरात राज्य निर्वाचन आयोग ने अहमदाबाद और सूरत सहित छह स्थानीय निकायों के चुनाव में मतदाताओं को ई-वोटिंग की सुविधा से जोड़ा था. हालांकि व्यापक प्रचार न हो पाने के कारण इस चुनाव में 95.9 लाख पंजीकृत मतदाताओं में से सिर्फ 809 मतदाताओं ने ही ई-वोटिंग का इस्तेमाल किया था.

ओपी रावत के कार्यकाल में शुरू हुआ था ई-वोटिंग प्रॉजेक्ट

देशव्यापी स्तर पर ई-वोटिंग लागू करने के लिए पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत के कार्यकाल में मतदाता पहचान पत्र को ‘आधार’ से जोड़कर सीडेक के सहयोग से ई-वोटिंग सॉफ्टवेयर विकसित करने की परियोजना को आगे बढ़ाया गया था. इस परियोजना से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि आधार को मतदाता पहचान पत्र से लिंक करने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के कारण यह परियोजना लंबित थी लेकिन हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने आधार संबंधी पूर्व निर्धारित दिशा-निर्देशों के तहत इसे मतदाता पहचान पत्र से जोड़ने की मंजूरी दे दी है.

45 करोड़ लोग हैं प्रवासी

एक अनुमान के मुताबिक देश में लगभग 45 करोड़ प्रवासी लोग हैं, जो रोजगार आदि के कारण अपने मूल निवास स्थान से अन्यत्र निवास करते हैं. इनमें से कई मतदाता विभिन्न विवशताओं के कारण मतदान वाले दिन अपने उस चुनाव क्षेत्र में नहीं पहुंच पाते हैं, जहां के वे पंजीकृत मतदाता हैं.

 

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