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राहुल गांधी का चुनावी वादा: गरीबों को सालाना 72 हजार देने के लिए क्या बदलेगा सब्सिडी का गणित?

केंद्र की सत्ता में वापसी के लिए राहुल गांधी ने अब मिनिमम बेसिक इनकम गारंटी का बड़ा दांव खेला है.

March 26, 2019 9:12 AM
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केंद्र की सत्ता में वापसी की हर मुमकिन कोशिश में लगी कांग्रेस ने अब मिनिमम बेसिक इनकम गारंटी का बड़ा दांव खेला है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने लोकसभा चुनाव 2019 के अब तक के अपने सबसे बड़े चुनावी वादे में कहा कि कांग्रेस की सरकार सत्ता में आई तो 5 करोड़ गरीब परिवारों के लिए 12 हजार रुपये महीने की ‘मिनिमम इनकम’ सुनिश्चित की जाएगी. यानी, कांग्रेस ने गारंटी दी कि 20 फीसदी सबसे गरीब परिवारों को 72 हजार रुपये सालाना दिए जाएंगे. यह रकम सीधे उनके खाते में ट्रांसफर किए जाएंगे. अनुमान के अनुसार, इस स्कीम पर हर साल करीब 3.60 लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे. यह मनरेगा के बजट का करीब छह गुना है. अब सवाल यह है कि य​ह पैसे कहां से आएंगे? क्या बीपीएल को दी जा रही मौजूदा सब्सिडी का कैलकुलेशन बदला जाएगा?

बहरहाल, आर्थिक मोर्चे पर कई चुनौतियों से जूझ रही भारतीय अर्थव्यवस्था क्या राहुल गांधी की ‘न्याय’ (न्यूनतम आय योजना) स्कीम का खर्च उठा जाएगी. फाइनेंशियल एक्सप्रेस आनलाइन ने इस बारे में जाने माने अर्थशास्त्री और पूर्व सीएसओ प्रणब सेन से बातचीत की.

राहुल की स्कीम के सामने कैसा चैलेंज?

प्रणब सेन का मानना है कि मिनिमम इनकम गांरटी की मुसीबत यह है कि पहले इनकम तलाशना पड़ेगा. मेरा मानना है कि मनरेगा के साथ सरकार छेड़छाड़ नहीं कर सकती है. क्योंकि इसका महत्व अलग है. अगर आपके पास काम नहीं है, आप मनरेगा साइट पर जाइए काम कीजिए वहां से कमा लीजिए. यह रोजगार गारंटी है. लेकिन मिनिमम इनकम तो कमाने की बात नहीं है ये तो भत्ते की बात है.

सेन कहते हैं परिवार को लेकर भी चैलेंज है. एक व्यक्ति का भी परिवार है, उसको अगर आप 6 हजार रुपये महीने दे रहे हैं तो उसके लिए बहुत मायने है. लेकिन यदि बड़ा परिवार हो तो जहां 10-12 लोग हो तो उनके लिए 6 हजार रुपये कुछ भी नहीं है. इसलिए कैसे करेंगे, किस ढंग से करेगे, वो तो देखने वाली बात है.

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क्या BPL ​सब्सिडी खत्म करना होगा रास्ता!

सेन का कहना है कि मिनिमम इनकम स्कीम के लिए पैसे जुटाने का सबसे आसान है कि पीडीएस में बीपीएल सब्सिडी को आप हटा दीजिए. गरीबों को दी जा रही सब्सिडी आप हटा सकते हैं. आप ये कह सकते हैं हम आपको पैसे दे रहे हैं आप सीधे जाकर खरीदो. इससे काफी पैसा बच जाएगा.

लेकिन इसकी एक मुश्किल यह है कि आपने पीडीएस के लिए जो गेहूं या अनाज खरीदा वो तो प्राइस सपोर्ट सिस्टम किसान के लिए है, वो पैसा किसान को मिलेगा. जिससे कि उन्हें उचित मूल्य मिले. इसे तो सरकार खत्म नहीं कर सकती है. इसे तो खरीदना पड़ेगा ही. अब सवाल यह है कि सरकार उस अनाज का क्या करेगी? उसे किसे बेचेगी, उसके लिए खरीदार होंगे या नहीं, ये सब हिसाब करना जरूरी है.

सेन का कहना है, देखा जाए तो देश में करीब 20 फीसदी असली बीपीएल हैं. यदि आप उनको सीधे महीने का 6 हजार दे देते हो तो काफी बीपीएल सब्सिडी हटा सकते हो. इसका एक पहलू यह है कि पैसे ट्रांसफर करने का फायदा सीधे बीपीएल परिवार को मिलेगा, जबकि पीडीएस के जरिए सब्सिडी का फायदा अन्य दूसरे भी उठा लेते हैं.

सब्सिडी का क्या है गणित?

नीति आयोग के वाइस चेयरमैन राजीव कुमार का आकलन है कि राहुल गांधी के इस स्कीम पर खर्च होने वाली रकम जीडीपी का करीब 2 फीसदी होगी. जोकि बहुत ज्यादा है और इसका नकारात्मक असर राजकोषीय ​स्थिति पर होगा. वहीं, कांग्रेस का मानना है कि यह जीडीपी का करीब 1.5 फीसदी होगा.

प्रणब सेन का कहना है कि हमारी पूरी सब्सिडी जीडीपी का करीब 2.5 फीसदी है. इसमें से कुछ सब्सिडी सरकार छू भी नहीं सकती है. जैसेकि फर्टिलाइजर सब्सिडी है. इसे आप छू नहीं सकते हैं. क्योंकि इसका किसानों पर झटका पड़ेगा.

अब सब्सिडी का कैलकुलेशन ये कहता है कि आप मिनिमम इनकम पर जीडीपी का 2 फीसदी खर्च कर रहे हैं. कुल सब्सिडी जीडीपी का 2.5 फीसदी है, यदि सरकार इस 2.5 फीसदी पर 1 फीसदी बचा सके तो ​तब बात बनती है. लेकिन, आखिर में जबतक डिटेल नहीं आ जाती है, यह कहना मुश्किल है कि ये पैसा कहां से आएगा और कैसे आएगा? लेकिन, ये सही है कि बीपीएल सब्सिडी को हटाकर सीधे पैसे ट्रांसफर करना एक विकल्प हो सकता है.

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