सरकार को डबल झटका! इंडस्ट्री की रफ्तार पड़ी नरम, खुदरा महंगाई दर 8 महीने के टॉप पर

अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर मोदी सरकार को डबल झटका लगा है.

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अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर मोदी सरकार को डबल झटका लगा है.

अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर मोदी सरकार को डबल झटका लगा है. मई में एक तरफ जहां औद्योगिक उत्पादन की रफ्तार नरम पड़ गई, वहीं जून में खुदरा महंगाई दर में उछाल आया है. औद्योगिक उत्पादन की ग्रोथ रेट मई में घटकर 3.1 फीसदी पर आई. अप्रैल में यह 3.4 फीसदी पर रही थी. दूसरी ओर, जून महीने की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.18 फीसदी पर पहुंच गई, जोकि आठ महीने में सबसे ज्‍यादा है. मई महीने में यह आंकड़ा 3.01 फीसदी था.

IIP को मैन्युफैक्चरिंग, माइनिंग से झटका

सरकार की ओर से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, मई महीने में औद्योगिक उत्पादन की रफ्तार (आईआईपी) को माइनिंग, मैन्युफैक्चरिंग ने झटका दिया है. मई महीने में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ रेट घटकर 2.5 फीसदी पर आ गई, जोकि अप्रैल में 2.8 फीसदी थी. माइनिंग सेक्टर की ग्रोथ रेट 3.4 फीसदी से गिरकर 3.2 फीसदी रह गया.

इसी तरह, इलेक्ट्रिसिटी सेक्टर की ग्रोथ रेट अप्रैल के 6 फीसदी से बढ़कर मई में 7.4 फीसदी हो गई.

खाद्य महंगाई में आया उछाल

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जून महीने में खुदरा महंगाई दर (सीपीआई) बढ़कर 3.18 फीसदी पर पहुंच गई, जोकि मई में 3.05 फीसदी थी. इस दौरान खाने-पीने की चीजों की कीमतों में इजाफा देखा गया. पिछले महीने खाद्य महंगाई दर बढ़कर 2.17 फीसदी हो गई, जो मई महीने में 1.83 फीसदी थी.

जून 2018 में सीपीआई 4.92 फीसदी रही थी. खुदरा महंगाई में इस साल जनवरी से लगातार बढ़ोतरी हो रही है. सीएसओ की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, प्रोटीन उत्पादों जैसेकि अंडा, मीट व मछली की कीमतें जून में इससे पिछले महीने के मुकाबले ज्यादा रहीं. हालांकि, बीते महीने सब्ज्यिों और फलों की महंगाई में कमी देखी गई.

बता दें, रिजर्व बैंक मॉनिटरी पॉलिसी की बैठक में ब्याज दरों पर फैसला करने के दौरान खुदरा महंगाई के आंकड़ों पर गौर करता है. अगले महीने यानी अगस्त में आरबीआई की मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी की मीटिंग होने वाली है. इंडस्ट्री की डिमांड है कि ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए रिजर्व बैंक को रेपो रेट में कटौती करनी चाहिए.

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