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Covid-19: पिछले सभी वित्तीय संकट से गहरी है इस बार की मंदी! ग्रोथ के लिए RBI करेगा हर जरूरी उपाय

कोरोना वायरस की वजह से दुनियाभर में चल रहे लॉकडाउन के चलते वैश्विक मंदी की आशंका बढ़ रही है.

April 13, 2020 4:19 PM
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कोरोना वायरस की वजह से दुनियाभर में चल रहे लॉकडाउन के चलते वैश्विक मंदी की आशंका बढ़ रही है. इस बार की मंदी का असर पिछली सभी फाइनेंशियल क्राइसिस के मुकाबले ज्यादा गहरा हो सकता है. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की नीतिगत समीक्षा बैठक के ब्योरे के मुताबिक यह कहा गया है कि कोविड-19 एक न दिखने वाला हत्यारा है, जिसे मानव जीवन और व्यापक अर्थव्यवस्था पर कहर बरपाने ​​से पहले काबू में किए जाने की जरूरत है. आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता वाली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बीते 24, 26 और 27 मार्च को हुई बैठक के ब्योरे में यह कहा गया है.

स्थिरता के लिए हर जरूरी उपाय करेगा

आरबीआई के मुताबिक कोविड-19 महामारी के प्रतिकूल प्रभाव को कम करने के लिए चौतरफा उपायों की जरूरत है. रिजर्व बैंक इस स्थिति को देखते हुये आर्थिक वृद्धि बहाल करने तथा वित्तीय स्थिरता बनाये रखने के लिए वह हर जरूरी उपाय करेगा, जिसकी आवश्यकता होगी. यह बैठक मूल रूप से 31 मार्च, एक और तीन अप्रैल को होनी थी, लेकिन कोरोना वायरस महामारी के चलते इसे तय समय से कुछ दिन पहले ही कर लिया गया. एमपीसी बैठक के बाद सेंट्रल बैंक ने प्रमुख नीतिगत दर ‘रेपो रेट’ में 0.75 फीसदी की कटौती कर इसे 4.40 फीसदी और रिवर्स रेपो रेट को 0.90 फीसदी घटाकर 4 फीसदी कर दिया था.

वृद्धि अनुमानों में तेजी से गिरावट

उन्होंने कहा कि भारत में भी अल्पकालीन अवधि के वृद्धि अनुमानों में तेजी से गिरावट आई है. शुरुआत में वैश्विक गिरावट और कोविड-19 संक्रमण बढ़ने के चलते और इसके बाद सरकार द्वारा महामारी को रोकने के लिए घोषित देशव्यापी लॉकडाउन से यह स्थिति बनती दिख रही है. रिजर्व बैंक द्वारा इस बैठक के सोमवार को जारी ब्योरे के अनुसार दास ने कहा कि वैश्विक वृहद आर्थिक स्थिति पिछले कुछ दिनों में अचानक बिगड़ी है. वैश्विक मंदी की आशंका बढ़ रही है, जो पहले के वैश्विक वित्तीय संकट के मुकाबले अधिक गहरी हो सकती है.

गर्मियों की मांग में कमजोरी

महंगाई के बारे में दास ने कहा कि आउटलुक में व्यापक बदलाव आया है. अगर मांग की दशाओं के सामान्य होने में अधिक समय लगा तो आमतौर पर गर्मियों के महीनों में बढ़ने वाली मांग के कमजोर रहने के आसार हैं. सकल घरेलू मांग के कमजोर रहने से महंगाई को रोकने में मदद मिल सकती है.

कोविड-19 एक न दिखने वाला हत्यारा

उन्होंने कहा कि कोविड-19 एक न दिखने वाला हत्यारा है, जिसे मानव जीवन और व्यापक अर्थव्यवस्था पर कहर बरपाने ​​से पहले काबू में किए जाने की जरूरत है. इस परिदृश्य में यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि वित्त, जो अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा है, अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में निर्बाध रूप से बहता रहे. ऐसे में रिजर्व बैंक सतर्क रहेगा और कोविड-19 के प्रभाव को कम करने, विकास को बहाल करने और वित्तीय स्थिरता को बनाए रखने के लिए किसी भी उपकरण, चाहें वह पारंपरिक हो या अपारंपरिक, का उपयोग करने में संकोच नहीं करेगा.

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