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भारत को इस साल के अंत तक मिल सकती है कोरोना वैक्सीन, रूस की Sputnik-V के लिए Dr. Reddy’s से करार

रूस का सॉवरेन वेल्थ फंड अपनी कोरोना वायरस वैक्सीन Sputnik-V के 10 करोड़ डोज को भारतीय ड्रग कंपनी डॉ रेड्डीज लेबोरेटरीज को बेचने के लिए सहमत हुआ है.

Updated: Sep 16, 2020 5:41 PM
Dr. Reddy agreed to do phase three trails of russian vaccine Sputnik-V in india will sell ten crore dosesरूस का सॉवरेन वेल्थ फंड अपनी कोरोना वायरस वैक्सीन Sputnik-V के 10 करोड़ डोज को भारतीय ड्रग कंपनी डॉ रेड्डीज लेबोरेटरीज को बेचने के लिए सहमत हुआ है.

रूस का सॉवरेन वेल्थ फंड अपनी कोरोना वायरस वैक्सीन Sputnik-V के 10 करोड़ डोज को भारतीय ड्रग कंपनी डॉ रेड्डीज लेबोरेटरीज को बेचने के लिए सहमत हुआ है. फंड ने बुधवार को इसकी जानकारी दी. रूस विदेश में अपनी वैक्सीन को वितरित करने की योजना को तेज कर रहा है. यह डील रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड (RDIF) के भारतीय निर्माताओं के साथ भारत में 30 करोड़ डोज का उत्पादन करने की सहमति के बाद हुई है, जो रूसी तेल और हथियारों का बड़ा ग्राहक है.

नियामक की मंजूरी का इंतजार

नियामक की मंजूरी मिलते ही प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. भारत में डिलीवरी 2020 के अंत में संभावित रूप से शुरू हो सकती है. रूसी डायरेक्ट इनवेस्टमेंट फंड के सीईओ, किरिल डिमिट्रिव ने कहा का कहना है कि  भारत कोविड-19 से सबसे अधिक प्रभावित देशों में से है. हमें भरोसा है कि हमारे ह्यूमन एडीनोवायरस ड्यूल वेक्टर प्लेटफॉर्म कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में भारत को एक सुरक्षित और वैज्ञानिक रूप से मान्य विकल्प प्रदान करेंगे.

RDIF के बयान के मुताबिक डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज के को-चेयरमैन जीवी प्रसाद ने कहा कि फेज I और फेज II के परिणाम अच्छे रहे हैं और हम भारतीय नियामकों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भारत में फेज 3 का ट्रायल करेंगे.

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कीमत को लेकर खुलासा नहीं

वैक्सीन की कीमत को लेकर अभी कोई खुलासा नहीं किया गया है. लेकिन RDIF पहले ही कह चुकी है कि उसका मकसद मुनाफा कमाना नहीं है, वह सिर्फ लागत को निकालेगी. स्पुतनिक-वी वैक्सीन को गामालेया नेशनल रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी द्वारा 11 अगस्त को विकसित किया गया है. इसे रूस के स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से रजिस्टर्ड किया गया था और ह्यूमन एडीनोवायरस ड्यूल वेक्टर प्लेटफॉर्म के आधार पर ये कोविड-19 के खिलाफ दुनिया की पहली रजिस्टर्ड वैक्सीन बन गई.

रूस ने बड़े पैमाने पर फेज 3 ट्रायल पूरा किए बगैर ही इस वैक्सीन को लाइसेंस दे दिया. वैज्ञानिकों और डॉक्टर्स इस वैक्सीन की सेफ्टी और क्षमता पर चिंता जता चुके हैं.

RDIF इस वैक्सीन की सप्लाई के लिए पहले ही कजाकिस्तान, ब्राजील और मैक्सिको से डील कर चुका है. इसके अलावा उसने सउदी केमिकल कंपनी के साथ भी एक सहमति पत्र पर दस्तखत किए हैं.

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