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Doubt Over Covid Test Sticks: कोरोना टेस्ट किट की स्वच्छता और सुरक्षा पर उठे सवाल, वायरल वीडियो ने मचाई खलबली

वायरल वीडियो में बच्चे जमीन पर रखकर खुले हाथों से बना रहे हैं कोरोना टेस्ट में इस्तेमाल होने वाली स्वैब स्टिक.

Updated: May 06, 2021 8:43 PM
does your covid-19 test kit is okay know truth of viral video on social mediaएक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें दिख रहा है कि परिवार के छोटे बच्चे स्वैब टेस्ट स्टिक पैक कर रहे हैं.

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो ने कोरोना टेस्टिंग में इस्तेमाल होने वाली किट की हाइजीन यानी स्वच्छता और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. इस वायरल वीडियो में कुछ बच्चे कोविड-19 की टेस्टिंग के लिए इस्तेमाल होने वाली स्वैब स्टिक जमीन पर रखकर खुले हाथों से तैयार कर रहे हैं. यह वीडियो वाकई हैरान करने वाला है, क्योंकि कोविड-19 के RT-PCR टेस्ट के दौरान जिस स्वैब स्टिक को लोगों के गले या नाक में डालकर सैंपल कलेक्ट किया जाता है, अगर वह स्टरलाइज्ड नहीं होगा तो संक्रमण फैलाने का माध्यम बन सकता है.

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक वायरल वीडियो महाराष्ट्र के उल्हासनगर का है, जहां की गलियों में कॉटन बड लगी प्लास्टिक की स्टिक्स को पैक किया जा रहा है.  इन स्टिक्स की पैकेजिंग में दर्जनों परिवार काम कर रहे हैं. RT-PCR टेस्ट में काम आने वाली यह  nasopharyngeal किट्स लोकल सप्लायर से एक हफ्ते से आ रही हैं.

लोग क्यों कर रहे हैं इन स्वैब टेस्ट किट की पैकिंग?

उल्हासनगर में बहुत से लोगों को ऐसे स्वैब टेस्ट स्टिक पैकिंग करने के लिए मिले हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, हर घर को करीब 5,000 स्वैब स्टिक पैक करने के लिए दिए गए हैं. हर 1000 स्टिक की पैकिंग के लिए 20 रुपये मिलते हैं. यानी अगर पूरा दिन मेहनत करके अगर कोई परिवार 5 हजार स्टिक पैक करता है, तो वो 100 रुपये कमा पाते हैं.

हालांकि इस काम के बदले में मिलने वाली रकम बेहद कम है, लेकिन ऐसे समय में जब इन स्लम में रहने वाले लोगों को कोई और काम नहीं मिल पा रहा है, बड़ी तादाद में लोग यह काम करने को मजबूर हैं. लॉकडाउन और दूसरी पाबंदियों के लागू होने के बाद से, लोगों ने अपनी नौकरी गंवाई है. ऐसे में इन्हें घर बैठे जो भी मिल जाए, ये उसके लिए तैयार हैं. रिपोर्ट के मुताबिक लोगों का कहना है कि उल्हासनगर झोपड़ी के पास एक गोडाउन के मालिक हैं, वे लोगों के बीच इन स्टिक का वितरण करते हैं.

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क्या इंफेक्शन नहीं फैलाएंगी ऐसी स्वैब स्टिक ?

जहां यहां रहने वाले लोग के पास पैसे कमाने के लिए जरिया मिल गया है, वहीं पैकेजिंग का तरीका किसी तरह से भी स्टराइल (Sterile) यानी रोगाणु रहित नहीं है. मेडिकल डिवाइसेज रूल्स, 2017 में जिक्र किया गया है कि स्वैब स्टिक के उत्पादन के लिए रोगाणु रहित माहौल बिलकुल जरूरी है. जबकि यहां इन्हें जमीन पर रखकर बनाया जा रहा है. कोरोना के चौतरफा फैले इंफेक्शन के बीच जब लोगों को हाथ मिलाने तक से मना किया जा रहा है, यहां इनकी पैकिंग नंगे हाथों से होती नजर आ रही है.

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