डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन लक्ष्य कठिन लेकिन कर सकते हैं हासिल: CBDT

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार छूट और कटौती समाप्त होने के बाद कॉरपोरेट टैक्स की दरों में और कमी लाने के बारे में सोच सकती है.

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सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिये डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन लक्ष्य नये सिरे से तय करते हुए इसे 13.35 लाख करोड़ रुपये कर दिया है. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) प्रमुख ने कठिन लेकिन हासिल किया जा सकने वाला बताया है. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार छूट और कटौती समाप्त होने के बाद कॉरपोरेट टैक्स की दरों में और कमी लाने के बारे में सोच सकती है.

सीबीडीटी चेयरमैन प्रमोद चंद्र मोदी ने कहा, ‘‘पिछले संशोधित अनुमान में 2019-20 के लिये हमारा लक्ष्य 13.78 लाख करोड़ रुपये तय किया गया था. यह अपेक्षाकृत अवास्तविक दिखता था क्योंकि यह सालाना आधार पर करीब 24 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शा रहा था. बजट पर विचार के दौरान हमने इस बारे में अपनी बातें रखी थीं. मुझे यह कहने में खुशी है कि सरकार ने पिछले साल के वास्तविक कलेक्शन को देखते हुए उस आधार पर लक्ष्य तय किया. डायरेक्ट टैक्स के लिये बजट में तय कलेक्शन लक्ष्य को अब 13.35 लाख रुपये तय किया गया है. यह सालाना आधार पर करीब 17.5 प्रतिशत वृद्धि को बताता है. ’’

FY19 में हासिल किया 11.37 लाख करोड़ का डायरेक्ट टैक्स

सीबीडीटी प्रमुख ने कहा, ‘‘यह लक्ष्य हमें काफी उम्मीद देता है कि हम दिये गये लक्ष्य के अनुसार 17.5 प्रतिशत वृद्धि हासिल करने में कामयाब होंगे.’’ आयकर विभाग ने पिछले वित्त वर्ष में 11.37 लाख करोड़ रुपये का डायरेक्ट टैक्स प्राप्त किया. मोदी ने आगे कहा कि निवेश और वृद्धि को गति देने के लिये बजट में जो कदम उठाया गया है, मुझे भरोसा है कि वह अर्थव्यवस्था अच्छी करेगा और परिणामस्वरूप राजस्व कलेक्शन भी अच्छा रहेगा.

वक्त के साथ खत्म की जाएगी कॉरपोरेट टैक्स में छूट व कटौती

डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में व्यक्तिगत आयकर, प्रतिभूति सौदा कर और कॉरपोरेट टैक्स शामिल हैं. कॉरपोरेट टैक्स की दर के बारे में पूछे जाने पर मोदी ने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले सप्ताह बजट में लगभग सभी कंपनियों के लिये कर की दरें कम की.
उन्होंने कहा, ‘‘सवाल यह है कि कॉरपोरेट टैक्स की दरें कुछ छूट और कटौती से जुड़ी हैं, जिसे कंपनियां प्राप्त कर रही हैं. सरकार की नीति कहती है कि छूट और कटौती को समय के साथ समाप्त किया जाएगा. यह समय करीब 5 से 10 साल हो सकता है. इसीलिए छूट और कटौती खत्म होने के साथ हम निश्चित रूप से मान सकते हैं कि कंपनी कर की दर कम होगी.

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