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पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का दावा, महंगे तेल के लिए आपूर्ति नहीं है जिम्मेदार

पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि तेल आपूर्ति की समस्या नहीं है, बल्कि एक बड़े आपूर्तिकर्ता के बाजार से अनुपस्थित होने की आशंका में बाजार घबराया हुआ है.

October 16, 2018 7:22 PM
dharmendra pradhan, statement on oil price, oil price, oil import issues, financial express hindiपेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि तेल आपूर्ति की समस्या नहीं है, बल्कि एक बड़े आपूर्तिकर्ता के बाजार से अनुपस्थित होने की आशंका में बाजार घबराया हुआ है. (Photo source- Reuters)

ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों के लागू होने से पहले भारत ने मंगलवार को कहा कि कच्चा तेल बाजार की प्रतिकूल परिस्थितियों के लिए कच्चे तेल की उपलब्धता कोई वजह नहीं है, बल्कि एक बड़े तेल आपूर्तिकर्ता के बाजार से हटने की आशंका से प्रभावित धारणा के कारण दाम चढ़ रहे हैं.

पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इंडिया एनर्जी फोरम से इतर कहा कि ईरान से आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में उसकी भरपाई के विकल्प मौजूद हैं. उन्होंने कहा कि एक बड़े आपूर्तिकर्ता के बाजार से अनुपस्थित होने की आशंका में बाजार घबराया हुआ है और इसी कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं.

प्रधान ने भारत द्वारा अमेरिका से प्रतिबंधों में राहत दिए जाने की मांग के बारे में पूछे जाने पर कहा कि देश ने नवंबर के लिए ईरान के साथ सौदा कर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है. इसके अलावा दोहराए जाने के लिए कोई नई बात नहीं है. बता दें कि उन्होंने पिछले हफ्ते कहा था कि नवंबर में ईरान से 12.5 लाख टन कच्चा तेल खरीदने का सौदा किया जा चुका है.

उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में कच्चे तेल की उपलब्धता के संबंध में कोई मुद्दा ही नहीं है. लेकिन, विश्व के विभिन्न भागों में भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के चलते ये धारणा से जुड़ा मुद्दा बन गया है. यही प्राथमिक चुनौती है. हम पहले दिन से आश्वस्त हैं कि कच्चा तेल मंगाने में कोई समस्या नहीं होगी. ये अन्य देशों के पास प्रचूर मात्रा में उपलब्ध है.

प्रधान के साथ उपस्थित IHS मार्किट उपाध्यक्ष डैनिएल र्यिगन ने भी संवाददाताओं से कहा कि बाजार के समक्ष धारणा प्रभावित होने की दिक्कत है, आपूर्ति की नहीं.

उल्लेखनीय है कि प्रतिबंध लागू होने का समय नजदीक आते जाने के मद्देनजर इस महीने कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें चार साल के उच्च स्तर 86.74 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई हैं. हालांकि, अमेरिका द्वारा प्रतिबंध लागू होने की समय बढ़ाए जाने के संकेत के बाद दाम कुछ नरम पड़े हैं.

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