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ONGC, OIL को केंद्र सरकार का अल्टीमेटम, मॉनेटाइज नहीं किया तो नीलाम कर देंगे तेल और गैस के रिजर्व

पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ONGC और ऑयल इंडिया लिमिटेड से कहा है कि सरकार उन्हें अपने तेल और गैस के भंडारों को अनंतकाल तक लेकर बैठे रहने की इजाजत नहीं देगी.

Updated: Jun 29, 2021 8:27 PM
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि ONGC और OIL अपने तेल और गैस के भंडारों को 'मॉनेटाइज़' करें, वरना सरकार उन्हें नीलाम कर देगी.

ONGC, OIL On Central Government Notice: केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने देश की सबसे बड़ी सरकारी कंपनियों में शामिल ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) और ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) को मंगलवार को कड़ा अल्टीमेटम दे दिया है. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक केंद्रीय मंत्री ने कहा है कि दोनों कंपनियां अपने खनिज तेल और गैस के भंडारों को तय समय सीमा के भीतर ‘मॉनेटाइज़’ करें, वरना सरकार उन्हें अपने हाथ में लेकर नीलाम कर डालेगी. केंद्रीय मंत्री ने तेल और गैस के भंडारों को ‘मॉनेटाइज़’ करने के लिए डोमेन एक्सपर्ट्स या विदेशी कंपनियों के साथ साझा उपक्रम बनाकर काम करने की सलाह भी दी है.

बीएनईएफ समिट (BNEF Summit) को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री प्रधान ने कहा कि देश को बड़ी मात्रा में तेल और गैस का आयात करना पड़ता है, ऐसे में सरकारी कंपनियां इन संसाधनों को अपने पास रखकर हमेशा के लिए बैठी नहीं रह सकतीं. उन्होंने कहा कि भारत में तेल और गैस के भंडारों को 90 के दशक से ही निजी कंपनियों को नीलाम किया जाता रहा है, फिर भी उनका काफी बड़ा हिस्सा बरसों से ONGC और OIL के पास है. प्रधान ने कहा कि हमने इन कंपनियो के सामने दो विकल्प रखे हैं. या तो आप खुद तेल और गैस का उत्पादन बढ़ाने का काम करें या फिर डोमेन एक्सपर्ट्स और विदेशी कंपनियों के साथ साझा उपक्रम बनाकर या किसी नए बिजनेस मॉडल के जरिए ऐसा करें. लेकिन सरकार आपको अनंतकाल तक संसाधनों को अपने नियंत्रण में बनाए रखने की इजाजत नहीं दे सकती.

तय समय के बाद सरकार खुद नीलाम करेगी तेल, गैस के भंडार : धर्मेंद्र प्रधान

प्रधान ने कहा कि भारत को तेजी से विकास करने के महत्वाकांक्षी एजेंडे पर आगे बढ़ने के लिए बड़े पैमाने पर एनर्जी की जरूरत है. उन्होंने कहा कि हम इंपोर्ट पर निर्भरता कम करना चाहते हैं. इसके लिए हम अपने संसाधनों को मॉनेटाइज़ करना चाहते हैं. यही वजह है कि हमने सरकारी तेल-गैस कंपनियों को नीतिगत दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं – या तो आप खुद नए पार्टनर्स और नए इकनॉमिक मॉडल के जरिए यह काम कीजिए, वरना एक निश्चित समय सीमा के बाद सरकार खुद इस मामले में दखल देगी और अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए संसाधनों को नीलाम कर देगी.

देश के सभी आठ सेडिमेंट्री बेसिन्स (sedimentary basins) में तेल और गैस की खोज और उनमें उत्पादन शुरू करने का काम ONGC और OIL ने ही किया है. देश में तेल और गैस का करीब तीन-चौथाई यानी 75% उत्पादन ये दोनों कंपनियां ही करती हैं.

सरकार दोनों कंपनियों द्वारा खोजे गए दर्जनों छोटे ऑयल और गैस फील्ड्स को पहले ही नीलाम कर चुकी है. ये नीलामी डिस्कवर्ड स्माल फील्ड (DSF) राउंड्स के तहत की गई है. DSF के तहत इन छोटे फील्ड्स को खरीदने वाले ऑपरेटर्स को कीमतों के निर्धारण और मार्केटिंग के मामले में ज्यादा स्वतंत्रता मिलती है, जो फिलहाल ONGC और ऑयल इंडिया लिमिटेड के पास नहीं है. इससे उन्हें अपने तेल और गैस के छोटे भंडारों को मॉनेटाइज़ करने में दिक्कत होती है. लेकिन अब धर्मेंद्र प्रधान ने संकेत दिए हैं कि सरकार इन छोटे भंडारों के साथ ही साथ तेल और गैस के बड़े निष्क्रिय भंडारों को भी सरकारी कंपनियों के हाथ से छीनकर निजी कंपनियों और विदेशी खिलाड़ियों के हाथों में सौंपने से नहीं हिचकिचाएगी.

पेट्रोलियम मंत्रालय ने कुछ हफ्ते पहले ही ओएनजीसी से कहा था कि वह देश के पश्चिमी इलाके के मौजूदा आयल प्रोड्यूसिंग ऑफशोर फील्ड रत्ना आर-सीरीज (Ratna R-Series) की हिस्सेदारी निजी कंपनियों को बेच दे और केजी बेसिन के गैस फील्ड के लिए विदेशी पार्टनर की तलाश करे.

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