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दिल्ली वालों का घुटने लगा दम! दिवाली के पहले ही कई इलाकों में 3 गुना बढ़ा प्रदूषण

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कल बृहस्पतिवार को प्रदूषण से निपटने के लिए एक अभियान 'रेड लाइट ऑन, गाड़ी ऑफ' की शुरुआत की.

Updated: Oct 16, 2020 11:55 AM
Ventilation index is the speed at which pollutants can get dispersed.team of volunteers in my constituency has started an awareness drive, urging commuters to do their bit.

राजधानी दिल्ली में सर्दियों से पहले ही हवा जहरीली हो चुकी है, जबकि अभी दीवाली के आने में करीब एक महीने बाकी है. आमतौर पर अक्टूबर अंत से लेकर नवंबर की शुरुआत में स्मॉग का असर दिखता है लेकिन इस बार अभी से इसका असर दिखने लगा है. राजधानी के कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर सुरक्षित माने जाने वाले मानक से 3 गुना से भी ज्यादा हो गया है. भीड़भाड़ वाले इलाकों में सबसे बुरा हाल है. हालत यह है कि कई इलाकों में सुबह लोगों को गाड़ी की लाइट जलानी पड़ी. फिलहाल एक्सपट्र भी खासतौर से बुजुर्गों को सुबह की सैर के लिए बाहर निकलने से मना कर रहे हैं. प्रदूषण को देखते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ‘रेड लाइट ऑन, गाड़ी ऑफ’ नाम से अभियान भी शुरू किया है.

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दिल्ली 5वां प्रदूषित शहर: रिपोर्ट

एक साल पहले IQAirVisual 2019 World Air Quality Report में खुलासा हुआ था कि दुनिया भर में सबसे अधिक प्रदूषित शहर भारत में हैं. इस रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली का सालाना 143 µg/m के PM 2.5 औसत रहा. यह कितना खतरनाक है, इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि इस हवा में अगर कोई दिल्ली की हवा में सांस ले तो सालाना वह 2372 सिगरेट फूंकने के बराबर धुआं अपने अंदर ले रहा है. इस सूची में पहले स्थान पर गाजियाबाद था और दिल्ली के बाद नोएडा था. गाजियाबाद और नोएडा दोनों दिल्ली एनसीआर के हिस्से हैं.

पराली, गाड़ियां, पटाखे जिम्मेदार

हर साल सर्दियों में दिल्ली की हवा जहरीली होने का मुख्य कारण पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने को बताया जाता है. हालांकि केंद्रीय पर्यावरण मंत्री का मानना है कि यह दिल्ली के प्रदूषण के लिए सिर्फ 4 फीसदी ही जिम्मेदार है. उन्होने पड़ोसी राज्यों में पराली जलने की बजाय राजधानी दिल्ली में होने वाले कंस्ट्रक्शन और जलाए जाने वाले जंतुओं को प्रदूषण की मुख्य वजह बताया. दिवाली पर पटाखे जलाए जाने को भी प्रदूषण की मुख्य वजह बताया जाता रहा है लेकिन इस बार दीवाली अभी एक महीने दूर है फिर भी स्थिति खराब हो चुकी है. इसके अलावा दिल्ली में लगातार गाड़ियों की बढ़ती संख्सा और आबादी भी प्रदूषण की प्रमुख वजह है.

पराली पर राजनीति शुरू

आमतौर पर माना जाता है कि पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने के कारण दिल्ली में प्रदूषण बढ़ता है लेकिन केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर का कहना है कि दिल्ली के वातावरण में पराली जलाने की वजह से सिर्फ 4 फीसदी प्रदूषण होता है जबकि बाकी प्रदूषण स्थानीय कारणों जैसे कि धूल, कंस्ट्रक्शन और जंतुओं के जलाने से होता है. दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने प्रकाश जावडेकर के बयान का विरोध करते हुए कहा कि अगर पराली जलाने से सिर्फ चार फीसदी प्रदूषण बढ़ता तो एकाएक राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण कैसे बढ़ गया जबकि पिछले कुछ समय से दिल्ली में प्रदूषण बढ़ाने वाले किसी स्थानीय स्रोत की खबर नहीं है. केंद्रीय मंत्री के मुताबिक दिल्ली एनसीआर में सीपीसीबी की 50 टीम प्रदूषण के मामले को देख रही है.

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