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Netflix-Amazon Prime बंद नहीं होंगे, दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

अपने कंटेंट की वजह से नेटफ्लिक्स और अमेजन प्राइम आलोचकों के निशाने पर था और इसे लेकर आशंकाएं जताई जा रही थी कि जल्द ही यह बंद हो सकता है.

February 9, 2019 4:27 PM
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अपने कंटेंट की वजह से Netflix और Amazon Prime आलोचकों के निशाने पर था और इसे लेकर आशंकाएं जताई जा रही थी कि जल्द ही यह बंद हो सकता है. इसे लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में एक PIL दाखिल की गई थी. इस जनहित याचिका (पीआईएल) पर दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को अपना फैसला सुनाया. हाईकोर्ट ने नेटफ्लिक्स और अमेजन प्राइम जैसे डिजिटल स्ट्रीमिंग सर्विसेज अपने फैसले में राहत दी है. अब इनके बंद होने की संभावना पर विराम लग चुका है.

कंटेंट की वजह से निशाने पर

नेटफ्लिक्स और अमेजन प्राइम अपने कंटेंट की वजह से आलोचकों के निशाने पर है. आलोचकों का कहना है कि डिजिटल वीडियो स्ट्रीमिंग सर्विसेज के लिए कोई रेगुलेटरी नहीं होने की वजह से इस पर पोर्नोग्राफिक, मोरली एथिकल और सेक्सुअली एक्सप्लिसिट कंटेंट की भरमार हो रही है.

पिछले साल अक्टूबर में पीआईएल दायर

सेक्रेड गेम्स, गेम्स ऑफ थ्रोन्स और स्पार्टकस जैसे वेब टेलीविजन सीरिज दिखाए जाने को लेकर नेटफ्लिक्स आलोचकों के निशान पर आ गया. एक NGO जस्टिस फॉर राइट्स फाउंडेशन ने पीआईएल में आरोप लगाया कि ऑनलाइन वीडियो प्लेटफॉर्म पर औरतों को ऑब्जेक्ट के रूप में प्रदर्शित किया जा रहा है और इसमें वल्गर, प्रोफेन, सेक्सुअली एक्प्लिसिट, पोर्नोग्राफिक, मोरली एथिकल वीडियोज की बाढ़ आई हुई है. पीआईएल में नेटफ्लिक्स और अमेजन प्राइम जैसे ऑनलाइन वीडियो स्ट्रीमिंग सर्विसेज पर तब तक रोक लगाने की मांग की गई जब तक इसे लेकर कोई रेगुलटरी नहीं बन जाती है. एनजीओ ने कम्युनिकेशन, इंफॉर्मेसन एंड ब्राडकास्टिंग और लॉ एंड जस्टिस के मिनिस्ट्री को इस पर कानून बनाने के लिए निर्देश जारी करने का अनुरोध किया था.

कोर्ट ने पीआईएल पर मंत्रालय से मांगा था जवाब

पीआईएल को संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने नवंबर में सूचना व प्रसारण मंत्रालय से ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर वीडियोज दिखाने के लिए लाइसेंस की जरूरत पर जवाब मांगा था. इस पर मंत्रालय ने अपना जवाब भेजा था कि ऑनलाइन वीडियोज प्रदर्शन के लिए किसी भी प्रकार के लाइसेंस की जरूरत नहीं है.

पिछले महीने सेल्फ सेंसरशिप की शुरुआत

ऑनलाइन वीडियो स्ट्रीमिंग के लिए कोई रेगलुटरी नहीं है. हालांकि पिछले महीने ही हॉटस्टार, जियो, वूट, नेटफ्लिक्स, जी5, सोनीलिव, आल्ट बालाजी, अर्रे और इरोज नाऊ ने सेल्फ सेंसरशिप कोड पर साइन किए हैं. इस कोड के तहत राष्ट्रीय प्रतीकों के असम्मान, धार्मिक भावना को आहत पहुंचाने वाले, आतंक को प्रमोट करने वाले, सेक्सुअल एक्ट में बच्चों को दिखाने वाले इत्यादि प्रकार के वीडियोज को प्रतिबंधित किया जाएगा. यह कोड Internet & Mobile Association of India (IAMAI) ने ड्राफ्ट किया है.

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