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Delhi Govt Vs LG SC Verdict: सर्विसेज पर बड़ी बेंच करेगी फैसला; ACB केंद्र के पास, रेवेन्यू-इलेक्ट्रिसिटी पर दिल्ली का अधिकार

दिल्ली सरकार बनाम उपराज्यपाल मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है.

February 14, 2019 11:44 AM
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Delhi Govt vs LG Supreme Court Verdict : दिल्ली सरकार बनाम उपराज्यपाल मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है. सर्विसेज को छोड़कर एंटी करप्शन ब्यूरो, रेवेन्यू, कमिशन बैठाने का अधिकार समेत कई मामलों पर जजों की राय एक रही. दिल्ली में अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग का मामला एलजी के पास रहे या दिल्ली सरकार के पास, इस पर जजों की राय अलग-अलग रही. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को बड़ी बेंच को भेज दिया.

जस्टिस सीकरी ने कहा है कि ज्वाइंट सेक्रेटरी और ऊपर के अधिकारियों की ट्रांसफर व पोस्टिस एलजी करेंगे जबकि ग्रेड 3, 4 के अधिकारियों की ट्रांसफर व पोस्टिंग सीएम ऑफिस करेगा. अगर कोई मतभेद होता है तो एलजी के विचार को तरजीह दी जाएगी. दो जजों की बेंच में शामिल जस्टिस अशोक भूषण ने कहा सर्विसेज केंद्र के पास रहेगा.

दोनों जजों ने सर्वसम्मति से जांच आयोग बैठाने का अधिकार केंद्र के पास रहने का फैसला दिया. सुप्रीम कोर्ट के जज ने कहा, चुनी हुई दिल्ली की सरकार कमशिन ऑफ इन्क्वायरी का गठन नहीं कर सकती. जस्टिस सीकरी ने कहा, ‘जरूरी है ज्वाइंट सेक्रेटरी के ऊपर के अफसरों की पोस्टिंग और ट्रांसफर का अधिकार उपराज्यपाल के पास रहे.

केंद्र के पक्ष में फैसले

दिल्ली सरकार बनाम एलजी मामले में अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 6 मामलों पर फैसला दिया. इनमें से 4 फैसले केंद्र के पक्ष में रहे. एंटी करप्शन ब्यूरो, ग्रेड 1 व ग्रेड 2 के अधिकारियों के ट्रांसफर, पोस्टिंग का अधिकार और जांच आयोग गठित करने का अधिकार केंद्र सरकार के अधिकार में रहेगा.

दिल्ली सरकार को मिले ये अधिकार

अश्विनी उपाध्याय ने बताया कि इलेक्ट्रिसिटी डिपार्टमेंट, रेवेन्यू डिपार्टमेंट, ग्रेड 3 और ग्रेड 4 के अधिकारियों के ट्रांसफर पोस्टिंग का अधिकार दिल्ली सरकार के अधीन रहेगा. मतभेद की स्थिति में एलजी के विचार को तरजीह मिलेगी.

दिल्ली सरकार करेगी स्पेशल पब्लिक प्रॉसीक्यूटर की नियुक्ति

शीर्ष अदालत के फैसले के तहत स्पेशल पब्लिक प्रॉसीक्यूटर की नियुक्ति का अधिकार दिल्ली सरकार के पास रहेगा. वहीं, एंटी-करप्शन ब्रांच केंद्र के अधीन रहेगी क्योंकि पुलिस केंद्र के पास है. रेवेन्यू पर एलजी की सहमति लेनी होगी. इलेक्ट्रिसिटी मामले में डायरेक्टर की नियुक्ति सीएम के पास होगी.

जमीन का मामला दिल्ली सरकार के पास

सुप्रीम कोर्ट के फैसले में कहा गया है कि जमीन से जुड़े मामले दिल्ली सरकार के नियंत्रण में रहेंगे। इसके मुताबिक दिल्ली सरकार जमीनों के रेट और मुआवजे की राशि तय कर सकती है। दिल्ली सरकार को राहत मिली है कि जमीनों का सर्किल सीएम ऑफिस के कंट्रोल में होगा।

क्या कहता है 2015 का नोटिफिकेशन?

गृह मंत्रालय की ओर से 21 मई 2015 को एक नोटिफिकेशन जारी किया था जिसमें सर्विस मैटर, पब्लिक ऑर्डर, पुलिस और भूमि से जुड़े मामले एलजी के अधिकार क्षेत्र में दिए गए थे. ब्यूरोक्रेट की सर्विस के मामले भी एलजी को दिए गए थे. केंद्र सरकार ने दिल्ली सरकार की कार्यकारी शक्तियों को सीमित कर दिया था.

(Input: ANI)

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