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बेटियों का संयुक्त हिंदू परिवार की पैतृक संपत्ति पर है बराबर का हक, जान लें सुप्रीम कोर्ट का नया फैसला

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बेटियों के हक में एक बड़ा फैसला ​दिया है.

August 12, 2020 7:49 AM
Daughters have equal rights over joint Hindu family property, amended Hindu Succession act that came in force in 2005 will have retrospective effect, Supreme Courtपीठ में जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस एस नजीर और जस्टिस एमआर शाह शामिल थे. Image: IE

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बेटियों के हक में एक बड़ा फैसला ​दिया है. कोर्ट ने कहा है कि बेटियों का संयुक्त हिंदू परिवार की पैतृक संपत्ति पर उतना ही हक है, जितना कि बेटों का. बेटी जन्म के साथ ही पिता की संपत्ति में बराबर की हकदार हो जाती है. यानी अब बेटी चाहे तो पैतृक संपत्ति में अपनी हिस्सेदारी का दावा कर सकती है. देश की सर्वोच्च अदालत की तीन जजों की पीठ ने स्पष्ट कर दिया है कि भले ही पिता की मृत्यु हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) कानून, 2005 लागू होने से पहले हो गई हो, फिर भी बेटियों का माता-पिता की संपत्ति पर अधिकार होगा. पीठ में जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस एस नजीर और जस्टिस एमआर शाह शामिल थे.

सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में कहा है कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 में 2005 में संशोधन कर बेटियों को पैतृक संपत्ति में बराबरी का हक देने की जो व्यवस्था की गई है, वह उन बेटियों पर भी लागू है, जिनका जन्म 2005 से पहले हुआ है. 2005 के बाद जन्म लेने वाली बेटियों के लिए तो यह फैसला संशोधन के बाद से लागू है ही. पैतृक संपत्ति में बेटी को हिस्सा देने से इस आधार पर इनकार नहीं किया जा सकता कि उसका जन्म 2005 में बने कानून से पहले हुआ है.

2015 में दिए गए पुराने फैसले को किया खारिज

इस नए फैसले के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने साल 2015 में दिए गए अपने उस निर्णय को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि हिंदू उत्तराधिकार कानून में संशोधन के तहत अधिकार 9 सितंबर 2005 तक संपत्ति के जीवित हिस्सेदार की जीवित बेटियों के लिए लागू हैं. फिर चाहे बेटियां कभी भी पैदा हुई हों. सुप्रीम कोर्ट के 2015 के इस फैसले के खिलाफ कई अपील की गई थीं. अब यह स्पष्ट है कि भले ही पिता की मृत्यु हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) कानून, 2005 लागू होने से पहले हो गई हो, फिर भी बेटियों का माता-पिता की संपत्ति पर अधिकार होगा.

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अटके मामलों को 6 माह में निपटाने की अपील

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि बेटियों के पैतृक संपत्ति में अधिकार को लेकर कई अपीलें विभिन्न हाईकोर्ट और सबोर्डिनेट कोर्ट्स में पेंडिंग हैं. अब चूंकि इस मुद्दे पर कोई कानूनी उलझन नहीं है तो विभिन्न अदालतों से अपील की जाती है कि वे पेंडिंग मामलों का 6 माह के अंदर जितना जल्दी संभव हो सके फैसला करें.

Input: PTI

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