कच्चे तेल के दाम 100 डॉलर/बैरल के पार जाने की संभावना नहीं: BPCL

भारत के लिए क्रूड के दाम 80—85 डॉलर प्रति बैरल के बीच में रह सकते हैं.

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R Ramchandran, Director of Refineries, Bharat Petroleum

क्रूड की कीमतें 83.30 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचने और सप्लाई में अवरोधों जैसे अन्य कारकों का असर भारत में तेल की कीमतों पर भी पड़ेगा. भारत पेट्रोलियम BPCL रिफाइनरीज के डायरेक्टर आर रामचंद्रन का कहना है कि भारत के लिए क्रूड के दाम 80-85 डॉलर प्रति बैरल के बीच में रह सकते हैं लेकिन इसके 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने की संभावना नहीं है. विकास श्रीवास्तव को दिए एक इंटरव्यू में रामंचंद्रन ने कहा कि ईरान पर अमेरिका के प्रतिबंधों को लेकर भारत और चीन के कदम भी आगे चलकर तेल कीमतों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालेंगे. पढें इस इंटरव्यू के प्रमुख अंश

ओपेक की ओर से क्रूड की सप्लाई बढ़ाने से इनकार किया जा रहा है. ऐसे में क्या आपको लगता है कि क्रूड आने वाले वक्त में 100 डॉलर प्रति बैरल का आंकड़ा छुएगा?

आने वाले वक्त में क्रूड की कीमतें बढ़ने की संभावना हैं. हालांकि यह 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाएगा या नहीं, इसे लेकर मुझे संदेह है. इसकी वजह है कि अगर ऐसा हुआ तो उभरते बाजारों और विकसित अर्थव्यवस्थाओं पर बहुत ज्यादा नकारात्मक असर होगा. क्रूड उत्पादकों के लिए उच्च तेल कीमतें अच्छी हो सकती हैं लेकिन वर्ल्ड इकोनॉमी पर बड़े प्रभाव के चलते जरूरी नहीं है कि ये लंबे समय तक रहें. जहां तक रिफाइनरीज की बात है तो अगर मार्जिन बढ़ा तो उनका मुनाफा भी बढ़ेगा. हालांकि कच्चे माल और प्रोडक्ट की कीमत में तेजी कंज्यूमर और मार्केट को प्रभावित करेगी. अगर कीमतें बढ़ती हैं तो हो सकता है कि डिमांड घटने लगे. मुझे लगता है कि तेल उत्पादक देशों को सभी स्टेकहोल्डर्स के लिए उचित कीमत तय करने की जरूरत है.

ईरान पर प्रतिबंधों की क्रूड की कीमतों में क्या भूमिका रहेगी? क्या भारत ईरान से तेल आयात जारी रखेगा?

अभी ईरान भारत के लिए महत्वपूर्ण सप्लायर्स में से है. हालांकि भारतीय रिफाइनरीज ईरान पर प्रतिबंधों के प्रभाव को हैंडल करने के लिए पर्याप्त रूप से सक्षम हैं लेकिन दीर्घ अवधि में विकल्प के तौर पर अन्य सोर्सज की पहचान करनी होगी. जहां तक बीपीसीएल की बात है तो हमने सितंबर में ईरान से क्रूड का आयात नहीं किया है. भविष्य की संभावना सरकार के फैसले और दिशा-निर्देश तय करेंगे.

तेल कीमतों के 90 रुपये प्रति लीटर पर पहुंचने के बाद क्या देश में तेल की डिमांड में कमी आई है?

पिछली तिमाही में हमें डिमांड या ग्रोथ में कोई उल्लेखनीय गिरावट देखने को नहीं मिली. इसकी वजह थी कि मानूसन सीजन में ​वैसे ही डिमांड कम रहती है. आगे चलकर फेस्टिव सीजन मे आकलन किया जाएगा कि डिमांड पर पेट्रोल की बढ़ती कीमतों का असर पड़ा है या नहीं.

उच्च क्रूड कीमतों का भारत पर क्या सीधा असर हुआ है?

हर कोई उच्च क्रूड कीमतों और प्रोडक्ट प्राइस को हैंडल करने में सक्षम नहीं होता. ऐसी अर्थव्यवस्थाएं, जहां ट्रांसपोर्टेशन फ्यूल की प्रति व्यक्ति खपत बहुत ज्यादा है, उच्च क्रूड कीमतों का असर बहुत ज्यादा होगा. भारत में कृषि और अन्य कारोबारों में डीजल पर निर्भरता बहुत ज्यादा है. ऐसे में डिमांड ग्रोथ रेट पर विपरीत प्रभावों से बचने, मैन्युफैक्चरिंग में गिरावट को रोकने और महंगाई के बढ़े दबाव को लेकर कदम उठाने की जरूरत है.

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