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Covishield वैक्सीन ट्रायल पर संकट, वॉलंटियर ने लगाया गंभीर साइड इफेक्ट का आरोप; मांगा 5 करोड़ का हर्जाना

तमिलनाडु में कोविशील्ड (Covishield) वैक्सीन के ट्रायल में हिस्सा लेने वाले एक 40 वर्षीय व्यक्ति ने वर्चुअल न्यूरोलॉजिकल ब्रेकडाउन और कॉग्निटिव फंक्शंस के खराब होने समेत गंभीर साइड इफेक्ट होने का आरोप लगाया है.

Updated: Nov 29, 2020 9:00 PM
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तमिलनाडु में कोविशील्ड (Covishield) वैक्सीन के ट्रायल में हिस्सा लेने वाले एक 40 वर्षीय व्यक्ति ने वर्चुअल न्यूरोलॉजिकल ब्रेकडाउन और कॉग्निटिव फंक्शंस के खराब होने समेत गंभीर साइड इफेक्ट होने का आरोप लगाया है. व्यक्ति ने वैक्सीन के ट्रायल रोके जाने के साथ ही सीरम इंस्टीट्यूट व अन्य को कानूनी नोटिस भेजकर 5 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है. कॉग्निटिव इंपेयरमेंट में व्यक्ति को याद रखने, नई चीजें सीखने, एक चीज पर ध्यान केन्द्रित करने या निर्णय लेने में परेशानी होती है. यह इंपेयरमेंट हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकता है.

कोविशील्ड वैक्सीन, एस्ट्राजेनेका और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित की जा रही वैक्सीन है, जिसके उत्पादन और भारत में ट्रायल्स का जिम्मा पुणे की सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया का है. व्यक्ति ने आरोप लगाया है कि कोविशील्ड वैक्सीन सुरक्षित नहीं है, इसलिए इसकी टेस्टिंग, मैन्युफैक्चरिंग और डिस्ट्रीब्यूशन की मंजूरी को रद्द किया जाए. अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो कानूनी एक्शन लिया जाएगा. कानूनी नोटिस सीरम इंस्टीट्यूट (SII) के अलावा ICMR और रामचंद्रा इंस्टीट्यूट ऑफ हायर एजुकेशन एंड रिसर्च को भेजा गया है. ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI), ऑक्सफोर्ड वैक्सीन ट्रायल के चीफ इन्वेस्टिगेटर एंड्रयू पोलार्ड, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की जेनर इंस्टीट्यूट लैबोरेटरी और एस्ट्राजेनेका को भी नोटिस भेजा गया है.

वॉलंटियर जिस तकलीफ से गुजर रहा है, उसे देखते हुए और भविष्य में उसके स्वास्थ्य को लेकर अनिश्चितता को देखते हुए नोटिस में दो सप्ताह के अंदर 5 करोड़ रुपये का हर्जाना दिए जाने की मांग की गई है. DCGI और इंप्लीमेंटेशन साइट की इंस्टीट्यूशनल एथिक्स कमेटी जांच कर रहे हैं कि वॉलंटियर में दिखे प्रतिकूल प्रभाव वाकई उसे दी गई कोविड19 कैंडिडेट वैक्सीन की वजह से हैं या नहीं.

आरोप दुर्भावनापूर्ण और गलत: सीरम इंस्टीट्यूट

वहीं दूसरी ओर सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया इन आरोपों को खारिज किया है. कंपनी ने गलत आरोप लगाने को लेकर भारी-भरकम जुर्माना वसूलने की भी धमकी दी है. सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने एक बयान में कहा, ‘‘नोटिस में लगाये गये आरोप दुर्भावनापूर्ण और गलत हैं. सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया उक्त व्यक्ति की चिकित्सा स्थिति के प्रति सहानुभूति रखता है, लेकिन टीके के परीक्षण का उसकी स्थिति के साथ कोई संबंध नहीं है.’’ कंपनी ने कहा कि वह व्यक्ति अपनी स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों के लिये गलत तरीके से टीके को जिम्मेदार बता रहा है. वह ऐसे आरोपों से अपना बचाव करेगी और गलत आरोप के लिये 100 करोड़ रुपये तक की मानहानि का दावा कर सकती है.

प्रतिकूल प्रभाव का छिपाने की कोशिश

वॉलंटियर की ओर से भेजे गए नोटिस में कहा गया है कि आरोप लगाने वाले व्यक्ति को वैक्सीन लगने के बाद एक्यूट एन्सेफलॉपैथी, मस्तिष्क को प्रभावित करने वाले डैमेज/बीमारी सामने आई. सभी टेस्ट में यह पुष्ट हुआ है कि वॉलंटियर के स्वास्थ्य को पहुंचा नुकसान कोविड19 की कैंडिडेट वैक्सीन की ​टेस्टिंग के कारण है. वैक्सीन लगने के बाद वॉ​लंटियर जिस ट्रॉमा से गुजरा वह स्पष्ट तौर पर साबित करता है कि वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित नहीं है. सभी स्टेकहोल्डर इसके प्रतिकूल प्रभाव का छिपाने की कोशिश कर रहे हैं.

आगे कहा गया कि इलेक्ट्रोएनसेफलोग्राम (EEG) टेस्ट से सामने आया है कि वॉलंटियर का मस्तिष्क आंशिक रूप से प्रभावित हुआ है. एक साइकिएट्रिक इवैल्युएशन से व्यक्ति की वर्बल और विजुअल मैमोरी फंक्शंस में हल्का नुकसान सामने आया है और कुल मिलाकर कॉग्निटिव फंक्शंस अच्छे से काम नहीं कर रहे हैं. वॉलंटियर न्यूरोलॉजिकली और साइकोलॉजिकली बेहद तकलीफ से गुजर रहा है. कोरानावायरस वैक्सीन ने उसमें वर्चुअल न्यूरोलॉजिकल ब्रेकडाउन क्रिएट किया है.

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पहले 10 दिन कोई साइड इफेक्ट नहीं

नोटिस में कहा गया है कि पार्टिसिपेंट इनफॉरमेशन शीट में कहा गया था कि कोविशील्ड वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है. व्यक्ति ने इस पर विश्वास कर लिया और 29 सितंबर को ट्रायल्स के लिए वॉलंटियर बन गया. 1 अक्टूबर को उसे कैंडिडेट वैक्सीन दी गई. पहले 10 दिन कोई साइड इफेक्ट नजर नहीं आए लेकिन 11 अक्टूबर से तेज सिरदर्द और उल्टियों की तकलीफ होने लगी. बाद में उसके व्यवहार में बदलाव दिखने लगा, वह न ही किसी को पहचान रहा था और न ही बात कर पा रहा था. हालत और खराब होने पर उसे आईसीयू में रखा गया और परिवार वालों के कहने पर 26 अक्टूबर को घर भेज दिया गया. घर पर वह कभी-कभी खोया खोया रहने लगता था और काम या चीजों से नहीं जुड़ पा रहा था.

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