सर्वाधिक पढ़ी गईं

कोविड वैक्सीन की ऊंची कीमतों पर भड़की कांग्रेस, पूछा- क्या 1 लाख 11 हजार करोड़ की मुनाफाखोरी में केंद्र भी है शामिल?

रणदीप सुरजेवाला ने कहा, एक देश में वैक्सीन की 5 अलग-अलग कीमतें मंजूर नहीं, चिदंबरम ने पूछा, दाम घटाने के लिए कंपलसरी लाइसेंसिंग का सहारा क्यों नहीं लेती केंद्र सरकार?

Updated: Apr 25, 2021 8:51 PM
पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम और कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कोरोना वैक्सीन निर्माताओं को मनमानी कीमतें तय करने की छूट देने पर सरकार पर तीखा हमला किया है.

Covid-19 Vaccine Pricing Controversy: भारत में कोविड वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों की तरफ से ऊंचे दामों के एलान को लेकर मोदी सरकार की खामोशी पर कांग्रेस ने तीखा हमला किया है. पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम और पार्टी प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने वैक्सीन कंपनियों पर राष्ट्रीय संकट के समय में बेशर्मी से मुनाफाखोरी करने का आरोप लगाते हुए मोदी सरकार पर भी उंगली उठाई है.

मुसीबत के दौर में जनता पर बढ़ेगा बोझ : सुरजेवाला

सुरजेवाला ने कहा है कि भारत बायोटेक और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने हाल ही में सरकार की तरफ से कीमतें तय करने की छूट मिलने के बाद राज्यय सरकारों और निजी अस्पतालों के लिए वैक्सीन की जो कीमतें घोषित की हैं, वे बेहद ऊंची हैं. उन्होंने दावा किया है कि घोषित कीमतों के लागू होने पर दोनों कंपनियां मुसीबत के इस दौर में करीब 1 लाख 11 हजार 100 करोड़ रुपये का भारी-भरकम मुनाफा कमाएंगी, जिसका बोझ आखिरकार देश की जनता पर ही पड़ेगा.

वैक्सीन में मुनाफाखोरी की इजाजत क्यों : सुरजेवाला

सुरजेवाला ने सवाल किया है कि वैक्सीन मुहैया कराने में इस तरह की बेशर्म मुनाफाखोरी की इजाजत भला कैसे दी जा सकती है? महामारी के भयावह दौर में मोदी सरकार मुनाफाखोरी के इस खेल में क्यों शामिल हो रही है? कांग्रेस ने कहा है कि टीकाकरण न तो इवेंट है और न ही पीआर एक्सरसाइज़. यह एक महत्वपूर्ण जनसेवा का काम है, जिसे किसी भी हाल में लोगों की जान की कीमत पर मुनाफाखोरी करके बिजनेस चमकाने का अवसर नहीं बनाया जा सकता. क्या दोनों कंपनियों की यह मुनाफाखोरी मोदी सरकार की मिलीभगत का नतीजा है?

केंद्र ने 101 करोड़ लोगों की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ा : कांग्रेस

कांग्रेस प्रवक्ता ने यह भी कहा है कि मोदी सरकार की नई टीकाकरण नीति दुनिया में सबसे अधिक भेदभावपूर्ण और असंवेदनशील है. इस नीति के जरिए मोदी सरकार ने देश की 18 से 45 साल की उम्र वाले लोगों के प्रति अपनी जिम्मेदारी से पूरी तरह पल्ला झाड़ लिया है. जबकि देश की कुल आबादी में 74.35 फीसदी यानी करीब 101 करोड़ लोग इसी उम्र के हैं. सुरजेवाला ने कहा कि मोदी सरकार को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि खुद सरकार के ही आंकड़ों के मुताबिक देश में 28 फीसदी आबादी गरीबी रेखा से नीचे और 41 फीसदी जनसंख्या पिछड़े वर्गों की है। इतना ही नहीं, देश में 81.35 करोड़ लोग फूड सिक्योरिटी एक्ट के तहत सब्सिडी वाला राशन पाने के हकदार माने गए हैं. कांग्रेस ने पूछा है कि इन तमाम लोगों को मुफ्त वैक्सीन दी जाएगी या नहीं?

वैक्सीन निर्माताओं की मुनाफाखोरी का साथ दे रही सरकार : चिदंबरम

देश के पूर्व वित्त मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने भी वैक्सीन के ऊंचे दामों को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है. चिदंबरम ने ट्विटर के जरिए सवाल पूछा है, “क्या जो लोग 400 और 600 रुपये के COVISHIELD के मूल्यों को सही ठहराते हैं, वे आज घोषित 600 और 1200 रुपये के COVAXIN के मूल्यों को भी सही ठहराएंगे? सरकार खड़ी है (असहाय नहीं) और चुपचाप दोनों निर्माताओं द्वारा निंदनीय मुनाफाखोरी और शोषण का समर्थन कर रही है। सरकार ‘अनिवार्य लाइसेंसिंग’ के प्रावधान को लागू क्यों नहीं कर रही है?”

सरकार अनिवार्य लाइसेंसिंग के जरिए मनमानी पर लगाम लगाए  : चिदंबरम

चिदंबरम ने अनिवार्य यानी कंपलसरी लाइसेंसिंग के मसले को समझाते हुए आगे लिखा है, “दोनों वैक्सीन निर्माताओं ने एक जैसी वैक्सीन के लिए 5 अलग-अलग कीमतें घोषित कर दी हैं और सरकार खामोशी से देख रही है! यह दोनों कंपनियों की धोखाधड़ी को उजागर करने का सही वक्त है. इसका सबसे अच्छा तरीका यह है कि सरकार अनिवार्य लाइसेंसिंग के प्रावधानों पर अमल करते हुए देश की अन्य फार्मा कंपनियों से यही वैक्सीन बनाने के लिए टेंडर मंगाए दे, जिसके लिए SII और भारत बायोटेक को रॉयल्टी दी जाए. उन कंपनियों के प्रस्तावों से साफ हो जाएगा कि वाजिब मुनाफे के साथ वैक्सीन बनाने की असल लागत कितनी है. बहुत से जानकारों की राय है कि 150 रुपये की कीमत पर भी दोनों वैक्सीन निर्माताओं को थोड़ा मुनाफा तो हो ही रहा है. अगर यह आकलन सही है तो 400 से लेकर 1000 रुपये से ज्यादा दाम वसूलने को बेहिसाब मुनाफाखोरी माना जाएगा. शायद सरकार यही चाहती है. क्या स्वास्थ्य मंत्रालय इसका जवाब देगा?”

वैक्सीन निर्माताओं को दाम तय करने की छूट देने के बाद शुरू हुआ विवाद

दरअसल यह सारा विवाद हाल ही में मोदी सरकार की तरफ से भारत में कोविड-19 का टीका बनाने वाली दोनों कंपनियों को वैक्सीन के दाम खुद तय करने की छूट दिए जाने के बाद शुरू हुआ है. दोनों कंपनियां अब तक केंद्र सरकार को अपनी वैक्सीन 150 रुपये प्रति खुराक की दर से मुहैया कराती रही हैं. लेकिन दाम तय करने की छूट मिलते ही सीरम इंस्टीट्यूट ने अपने टीके कोविशील्ड की एक खुराक के लिए राज्य सरकारों से 400 रुपये और निजी अस्पतालों से 600 रुपये वसूलने का एलान कर दिया. जबकि कंपनी के प्रमुख एक चैनल पर इंटरव्यू के दौरान कह चुके हैं कि 150 रुपये की कीमत पर भी उन्हें कुछ मुनाफा हो रहा है, हालांकि वे सुपर प्रॉफिट नहीं कमा पा रहे हैं.

भारत बायोटेक ने कोवैक्सीन के दाम कोविशील्ड से भी अधिक रखे

कोविशील्ड के ऊंचे दामों पर विवाद अभी थमा भी नहीं था कि देश में कोविड की वैक्सीन बनाने वाली दूसरी कंपनी भारत बायोटेक ने और भी ऊंची कीमतों का एलान करके चौंका दिया है. कंपनी ने अपने टीके कोवैक्सीन के लिए राज्य सरकारों से 600 रुपये और निजी अस्पतालों से 1200 रुपये प्रति खुराक वसूलने की घोषणा की है. जबकि भारत बायोटेक यही वैक्सीन केंद्र सरकार को 150 रुपये में देता रहा है. यही वजह है कि विपक्ष इसे राष्ट्रीय आपदा को मुनाफाखोरी के अवसर में बदलने का प्रयास बताते हुए कड़ी आलोचना कर रहा है.

Get Business News in Hindi, latest India News in Hindi, and other breaking news on share market, investment scheme and much more on Financial Express Hindi. Like us on Facebook, Follow us on Twitter for latest financial news and share market updates.

  1. बिज़नस न्यूज़
  2. राष्ट्रीय
  3. कोविड वैक्सीन की ऊंची कीमतों पर भड़की कांग्रेस, पूछा- क्या 1 लाख 11 हजार करोड़ की मुनाफाखोरी में केंद्र भी है शामिल?

Go to Top