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COVID19 के नए प्रकार से भी बचाव करेंगी वैक्सीन, असफल रहने का अभी तक कोई सबूत नहीं: सरकार

नीति आयोग के सदस्य डॉ वी के पॉल ने मंगलवार को कहा कि बड़ी आबादी इस सर्दी के मौसम में कोविड-19 के प्रति बहुत संवेदनशील है.

Updated: Dec 29, 2020 7:52 PM
Covid 19 niti aayog member dr vk paul says major population sensitive to coronavirus cannot be carelessनीति आयोग के सदस्य डॉ वी के पॉल ने मंगलवार को कहा कि बड़ी आबादी इस सर्दी के मौसम में कोविड-19 के प्रति बहुत संवेदनशील है.

Covid-19 India: कोरोना वैक्सीन्स महामारी के नए प्रकार के खिलाफ भी कारगर साबित होंगी. ब्रिटेन या साउथ अफ्रीका से SARS-CoV-2 म्यूटेंट्स से बचाव में मौजूदा वैक्सीन्स के असफल रहने को लेकर कोई सबूत नहीं मिला है. यह बात प्रिंसिपल साइंटिफिक एडवायजर के विजय राघवन ने कही है. उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि अब तक यह नहीं पाया गया है कि नए वेरिएंट से बीमारी की गंभीरता बढ़ती है.

उन्होंने कहा कि ज्यादातर वैक्सीन स्पाइक प्रोटीन को टारगेट करती हैं, जिनमें वेरिएंट में बदलाव आते हैं लेकिन वैक्सीन हमारे इम्यून सिस्टम की सुरक्षा देने वाली एंटीबॉटीज की बड़ी संख्या का उत्पादन करने में मदद करती हैं. ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि मौजूदा वैक्सीन ब्रिटेन या दक्षिण अफ्रीका से आए SARS-CoV-2 के खिलाफ सुरक्षा देने में असफल रहेंगी.

नए मामलों और मौतों में लगातार गिरावट

नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ वी के पॉल ने कहा कि एक बड़ी आबादी इस सर्दी के मौसम में कोविड-19 के प्रति बहुत संवेदनशील है. ब्रिटेन का वेरिएंट दूसरे कुछ देशों और भारत में भी आया है और इस वेरिएंट की अपनी रफ्तार रह सकती है और कोई व्यक्ति लापरवाह नहीं हो सकता. पॉल ने कहा कि कोविड-19 के नए मामलों और मौतों में लगातार गिरावट आई है, जो दुनिया भर में वर्तमान की स्थिति को देखते हुए अच्छी बात है. हम नए कोविड-19 के मामलों, एक्टिव केस और मौतों की संख्या की निरंतर गिरावट देख रहे हैं, जो दोबारा से भरोसा दिलाने वाला है. यह विशेषकर इस अवधि के लिए अहम है जब कई देश भयानक स्थिति का सामना कर रहे हैं.

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63 फीसदी केस पुरुषों में पाए गए

कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों के लिंग और उम्र को लकर जानकारी देते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा कि देश में कुल मामलों का 63 फीसदी पुरुषों और 37 फीसदी मामले महिलाओं में पाए गए हैं. उन्होंने बताया कि आठ फीसदी मामले 17 साल से कम उम्र के बच्चों में पाए गए हैं, 13 फीसदी 18 से 25 साल की उम्र, 39 फीसदी 26 से 44 साल, 26 फीसदी 45 से 60 साल और 14 फीसदी 60 साल की उम्र से ज्यादा में देखे गए हैं.

(Input: PTI)

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