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भारत में ही क्यों फैल रहा है ब्लैक फंगस, कोरोना प्रभावित बाकी देश इससे कैसे बचे हुए हैं?

कोरोना महामारी से सारी दुनिया जूझ रही है, लेकिन ब्लैक फंगस सिर्फ भारत में ही क्यों कहर बरपा रहा है? बाकी देश इस नई मुसीबत से कैसे सुरक्षित हैं?

Updated: May 21, 2021 8:06 PM
Covid-19 is a global menace but why is mucormycosis more rampant in India know here in detailsमहामारी से पहले भी ब्लैक फंगस के सबसे अधिक मामले भारत में थे.

कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने भारत में काफी तबाही मचाई है. बड़ी संख्या में मरीजों को ऑक्सीजन और अस्पताल में बेड्स की शॉर्टेज का भी सामना करना पड़ा है. लेकिन पिछले कुछ दिनों के दौरान ब्लैक फंगस इंफेक्शन के रूप में देश के लोगों को एक और बड़ी मुसीबत से जूझना पड़ रहा है. इस खतरनाक इंफेक्शन की वजह से बहुत से ऐसे मरीजों की जान जोखिम में पड़ रही है, जो किसी तरह कोरोना का मुकाबला करके ठीक हुए हैं.

भारत में जिस तरह से ब्लैक फंगस के मामले बढ़ रहे हैं, उससे यह सवाल भी उठ रहा है कि कोरोना महामारी की समस्या तो दुनिया भर में है. लेकिन ब्लैक फंगस के मामले सिर्फ भारत में ही इतनी तेजी से क्यों बढ़ रहे हैं? दुनिया के बाकी देश इस मुसीबत से कैसे बचे हुए हैं? इस सवाल का जवाब जानने के लिए फाइनेंशियल एक्सप्रेस ऑनलाइन ने कुछ एक्सपर्ट्स से बात की.

पुणे के सह्याद्रि हॉस्पिटल्स के डायरेक्टर और एंडोक्राइनोलॉजिस्ट व डायबेटोलॉजिस्ट डॉ उदय फडके बताते हैं कि कोरोना महामारी की दूसरी लहर आने से पहले आमतौर पर साल में ब्लैक फंगस के एक या दो मामले ही देखने को मिलते थे. वो भी ऐसे मरीजों में जिनकी रोक प्रतिरोध क्षमता कैंसर या ऑर्गन ट्रांसप्लांट जैसे किसी कारण से बेहद कम होती थी. लेकिन अब हालात इतने खराब हैं कि उनके सह्याद्रि हॉस्पिटल्स में ही एक महीने में ब्लैक फंगस के 30-35 मामले सामने आ रहे हैं, यानी हर दिन एक केस.

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डायबिटीज के मरीजों में तेजी से फैलता है संक्रमण

भारत में ब्लैक फंगस के मामले अधिक आने की सबसे बड़ी वजह यह है कि दुनिया भर में सबसे अधिक डायबिटीज के मामले भारत में हैं. यहां डायबिटीज के लगभग 7 करोड़ मरीज हैं. इनमें से कई लोगों को कोरोना इंफेक्शन होने पर स्टेरॉयड देना पड़ता है, जिनसे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता और कम हो जाती है. ऐसे मरीजों के ब्लैक फंगस संक्रमण की चपेट में आने का खतरा बहुत अधिक रहता है.

चेन्नई के डायबिटीज स्पेशिलिटीज सेंटर के चीफ कंसल्टेंट व चेयरमैन डॉ वी मोहन के मुताबिक भारत में न सिर्फ डायबिटीज की मरीजों की संख्या बहुत अधिक है, बल्कि उनमें बड़ी तादाद ऐसे रोगियों की है, जिनका शुगर कंट्रोल में नहीं रहता. इसके साथ ही यहां इलाज में स्टेरॉयड का इस्तेमाल लंबे समय तक हो रहा है, जो बहुत खतरनाक साबित हो रहा है. डॉ मोहन के मुताबिक इसके अलावा हाइजीन यानी स्वच्छता की कमी और संक्रमित इक्विपमेंट के इस्तेमाल के कारण भी ब्लैक फंगस के मामले बढ़ रहे हैं. डॉ मोहन का कहना है कि कोरोना केसेज की बाढ़ के चलते बहुत से अस्पताल साफ-सफाई पर ज्यादा ध्यान नहीं दे पा रहे हैं. इससे इक्विपमेंट पर फंगस जमा होने का खतरा बढ़ गया है.

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ऑक्सीजन थेरेपी और स्टेरॉयड के चलते बढ़ रहे केसेज!

देश के अग्रणी वैक्सीन एक्सपर्ट और वेल्लोर स्थित क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज की प्रोफेसर डॉ गगनदीप कांग का कहना है कि हमें इस बात पर गौर करना चाहिए कि ऑक्सीजन थेरेपी की वजह से कितने फीसदी लोगों को ब्लैक फंगस हो रहा है और उनमें से स्टेरॉयड पर कितने लोग हैं. कांग के मुताबिक स्टेरॉयड्स का इस्तेमाल रिस्की होता है लेकिन जिनकी ऑक्सीजन थेरेपी चल रही है, उनके मामले में सांस लेने के लिए इस्तेमाल होने वाले उपकरणों को डिसइनफेक्ट करने पर भी ध्यान देना होगा. कांग का मानना है कि शायद इन बातों पर पर्याप्त ध्यान  नहीं देने के कारण ही ब्लैक फंगस के मामले बढ़ रहे हैं. उनका यह भी मानना है कि स्टेरॉयड का इस्तेमाल जरूरत से छह गुना अधिक हो रहा है, जिसके चलते शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो रही है. ऐसे हालात ब्लैग फंगस को फैलने का पूरा मौका दे रहे हैं.

तीन चरणों में ब्लैक फंगस का इलाज

  • ब्लैक फंगस के इलाज को लेकर डॉ फडके का कहना है कि इसका इलाज तीन चरणों में है. पहले चरण में ब्लैक फंगस के कारणों का पता लगाया जाए और स्टेरॉयड का इस्तेमाल बंद किया जाए, शुगर लेवल को तुरंत चेक किया जाए, एसिडोसिस चेक किया जाए.
  • इसके बाद सर्जरी के जरिए एग्रेसिव तरीके से डेड टिश्यू हटाए जाएं जिसमें कई स्पेशलिस्ट्स की जरूरत पड़ सकती है. इस चरण में यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि फंगस और न फैले.
  • इसके बाद तीसरे चरण में ब्लैक फंगस पर काबू पाने के लिए दवाइयां दी जाएं. इस समय इसके इलाज में Amphotericin B इंजेक्शन का इस्तेमाल किया जाता है. इस दवा की मांग पहले इतनी अधिक नहीं होती थी. जिसके चलते इसका उत्पादन कम है, जो फिलहाल इसकी किल्लत की बड़ी वजह है.
  • हाल ही में सरकार ने सन फॉर्मा, सिप्ला, भारत सीरम्स समेत कई कंपनियों को यह दवा बनाने की छूट दे दी है. देश की सबसे बड़ी दवा कंपनी सन फार्मा के प्रवक्ता ने जानकारी दी है कि Lambin 50 (Amphotericin B के लिए कंपनी का ब्रांड नाम) का उत्पादन मांग के मुताबिक बढ़ाया जा रहा है. लेकिन अतिरिक्त स्टॉक बाजार तक आने में दो से चार हफ्ते का समय लग सकता है.
    (Article: E Kumar Sharma)

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