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क्या Plasma Therapy के कारण और खतरनाक हो सकता है कोरोना वायरस? कई विशेषज्ञों ने उठाए सवाल, सरकार को चिट्ठी भी लिखी

Covid-19 के इलाज में Plasma Therapy के इस्तेमाल पर कुछ चिकित्सक और वैज्ञानिक सवाल उठा रहे हैं. उन्होंने इस बारे में मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार के विजय राघवन को पत्र भी लिखा है.

Updated: May 11, 2021 5:47 PM
COVID-19 Experts caution against irrational and non-scientific use of convalescent plasmaप्लाज्मा थेरेपी में कोरोना से ठीक हुए लोगों के खून से एंटीबॉडी लेकर कोरोना संक्रमितों के शरीर में प्रवेश कराया जाता है.

Plasma Therapy: कोरोना संक्रमितों के इलाज के लिए अधिकतर अस्पतालों में प्लाज्मा थेरेपी का भी सहारा लिया जा रहा है. अब कुछ डॉक्टर और वैज्ञानिक इस पर सवाल उठा रहे हैं. इस बारे में उन्होंने भारत सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार के विजय राघवन को पत्र भी लिखा है. कोरोना संक्रमण से ठीक हुए लोगों से प्लाज्मा रिसीव कर इसे कोरोना संक्रमितों के इलाज में इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसे कुछ डॉक्टर्स और वैज्ञानिकों ने अतार्किक और गैर-वैज्ञानिक बताया है.
कुछ पब्लिक हेल्थ प्रोफेशनल्स का कहना है कि कोरोना संक्रमण के इलाज में प्लाज्मा थेरेपी का इस्तेमाल और इस बारे में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के गाइडलाइंस तथ्यों पर आधारित नहीं हैं. इतना ही नहीं, उन्होंने यह आशंका भी जाहिर की है कि प्लाज़्मा थेरेपी के अतार्किक इस्तेमाल से कोरोना वायरस के ज्यादा खतरनाक स्ट्रेन सामने आने की आशंका भी बढ़ रही है.

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एमसीआई और एम्स के निदेशक से हस्तक्षेप की गुहार

राघवन को भेजे गए पत्र में आशंका जताई गई है कि प्लाज्मा थेरेपी के अतार्किक प्रयोग से अधिक खतरनाक स्ट्रेन विकसित होने की आशंका है जिससे महामारी तेज हो सकती है. इस पत्र पर वैक्सीनोलॉजिस्ट गगनदीप कांग और सर्जन प्रमेश सीएस समेत कई विशेषज्ञों के हस्ताक्षर हैं. पत्र के मुताबिक देश के कई चिकित्सकों, पब्लिक हेल्थ प्रोफेशनल्स और साइंटिस्ट्स ने अतार्किक और गैर-वैज्ञानिक प्लाज्मा थेरेपी के इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई है. पत्र में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) के डीजी बलराम भार्गव और एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया से हस्तक्षेप की मांग की गई है, ताकि कोरोना मरीजों और उनके संबंधियों का उत्पीड़न रोका जा सके, जिन्हें प्लाज्मा का इंतजाम करने के लिए बड़ी मुश्किलें उठानी पड़ रही हैं. पत्र में अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ और इंफेक्शस डिजीजेज सोसायटी ऑफ अमेरिका द्वारा कोरोना के इलाज में प्लाज्मा थेरेपी के सामान्य प्रयोग के अगेन्स्ट रिकमेंडशन का हवाला भी दिया गया है.

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केंद्रीय मंत्रालय ने सात दिनों तक प्लाज्मा थेरेपी के दिए हैं निर्देश

पिछले महीने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना मरीजों के इलाज के लिए गाइडेंस जारी किया था. इसमें कोरोना के लक्षण सामने आने पर शुरुआती सात दिनों के भीतर ही प्लाज्मा देने की सलाह दी गई है. मंत्रालय द्वारा जारी गाइडेंस के मुताबिक सात दिनों के बाद प्लाज्मा देने का कोई मतलब नहीं रह जाता. पत्र के मुताबिक प्लाज्मा थेरेपी का कोई तथ्यात्मक प्रमाण नहीं है लेकिन फिर भी देश भर के अस्पतालों में इसे धड़ल्ले से अपनाया जा रहा है. प्लाज्मा थेरेपी में कोरोना से ठीक हुए लोगों के खून से एंटीबॉडी लेकर कोरोना संक्रमितों के शरीर में इंजेक्ट किया जाता है.

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