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COVID-19 vaccine: 7 भारतीय कंपनियां बना रही हैं कोरोना की वैक्सीन, एक का ह्यूमन ट्रायल शुरू

वैज्ञानिक कुछ महीनों में ही इसका टीका बना लेने की उम्मीद कर रहे हैं.

Updated: Jul 19, 2020 6:08 PM
Seven Indian pharma players race to develop COVID-19 vaccine, Bharat Biotech, Serum Institute, Zydus Cadila, Panacea Biotec, Indian Immunologicals, Mynvax and Biological E, AstraZeneca Oxford, Covaxinदुनियाभर में अब तक 1.4 करोड़ से अधिक लोग इस वायरस से संकमित हो चुके हैं. Image: Reuters

CoronaVirus Vaccine Updates: कम से कम सात भारतीय दवा कंपनियां कोरोना वायरस संक्रमण की वैक्सीन तैयार करने में जुटी हैं. वैश्विक स्तर पर भी इस जानलेवा महामारी के प्रसार को रोकने के लिए टीका बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं. दुनियाभर में अब तक 1.4 करोड़ से अधिक लोग इस वायरस से संकमित हो चुके हैं और वैश्विक स्तर पर छह लाख से अधिक लोगों की जान जा चुकी है.

घरेलू फार्मा कंपनियों की बात की जाए तो भारत बायोटेक, सीरम इंस्टीट्यूट, जायडस कैडिला, पैनेशिया बायोटेक, इंडियन इम्यूनोलॉजिकल्स, मायनवैक्स और बायोलॉजिकल ई कोविड-19 की वैक्सीन तैयार करने का प्रयास कर रही हैं. आमतौर पर कोई भी वैक्सीन बनाने के लिए कई साल परीक्षण और उसके बाद उत्पादन के लिए अतिरिक्त समय की जरूरत होती है. लेकिन इस महामारी की वजह से वैज्ञानिक कुछ महीनों में ही इसका टीका बना लेने की उम्मीद कर रहे हैं.

कोवैक्सीन के शुरू हो चुके हैं ह्यूमन ट्रायल्स

भारत बायोटेक को वैक्सीन कैंडिडेट ‘कोवैक्सीन’ के पहले और दूसरे चरण के क्लिनिकल ट्रायल्स की अनुमति मिली है. इसकी मैन्युफैक्चरिंग कंपनी के हैदराबाद कारखाने में की जाएगी. भारत बायोटेक ने पिछले सप्ताह रोहतक के पोस्ट ग्रेजुऐट चिकित्सा विज्ञान संस्थान में अपने टीके कोवैक्सीन का मानव परीक्षण शुरू कर दिया है. भारतीय औषधि नियामक से कंपनी को सार्स-कोव-2 की वैक्सीन के पहले और दूसरे चरण के क्लिनिकल परीक्षण की मंजूरी मिली है. कंपनी ने यह टीका भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी) के साथ मिलकर विकसित किया है.

सीरम को साल के अंत​ तक वैक्सीन तैयार कर लेने की उम्मीद

एक अन्य कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को उम्मीद है कि वह इस साल के अंत तक कोविड-19 का टीका तैयार कर लेगी. सीरम इंस्टीट्यूट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अदर पूनावाला ने कहा है, ‘‘फिलहाल हम एस्ट्रजेनेका ऑक्सफोर्ड वैक्सीन पर काम कर रहे हैं, जिसका तीसरे चरण का क्लिनिकल परीक्षण चल रहा है. हम अगस्त, 2020 में भारत में मानव परीक्षण शुरू करेंगे. अभी तक क्लिनिकल परीक्षण को लेकर जो सूचना उपलब्ध है, उसके आधार पर हमें उम्मीद है कि एस्ट्राजेनेका ऑक्सफोर्ड वैक्सीन इस साल के अंत तक उपलब्ध होगी.’’

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जायडस कैडिला का क्या है कहना?

इस बीच, फार्मा क्षेत्र की एक अन्य कंपनी जायडस कैडिला ने कहा है कि वह कोविड-19 के वैक्सीन ‘कैंडिडेट’ जाइकोव-डी का क्लिनिकल परीक्षण सात माह में पूरा करने की उम्मीद कर रही है. जायडस कैडिला के चेयरमैन पंकज आर पटेल ने बयान में कहा, ‘‘अध्ययन के नतीजों के बाद यदि डेटा उत्साहवर्धक रहता है और परीक्षण के दौरान टीका प्रभावी साबित होता है तो परीक्षण पूरा करने और टीका उतारने में सात माह लगेंगे.’’

बाकी की कंपनियों की प्लानिंग

पैनेशिया बायोटेक ने जून में कहा था कि वह कोविड-19 का टीका विकसित करने के लिए अमेरिका की रेफैना के साथ मिलकर आयरलैंड में संयुक्त उद्यम लगा रही है. राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) की अनुषंगी इंडियन इम्यूनोलॉजिकल्स ने कोरोना वायरस का टीका विकसित करने के लिए ऑस्ट्रेलिया के ग्रिफिथ विश्वविद्यालय के साथ करार किया है. इसके अलावा मायनवैक्स और बायोलॉजिकल ई भी कोविड-19 का टीका तैयार करने के लिए काम कर रही हैं.

 

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