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देश में दवाओं की कमी पड़ने का डर! सरकार ने 26 दवाओं के निर्यात पर लगाई रोक

कोरोना वायरस के चलते देश में दवाओं की कमी न हो इसके लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है.

March 3, 2020 5:44 PM
restrict export of 26 medicine and API, fear of medicine shortage as low import of API from china, coronavirus impact on pharma industry, Indian drug manufacturers, drug prices may surgeकोरोना वायरस के चलते देश में दवाओं की कमी न हो इसके लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है.

Medicine Shortage Fear as COVID-19: कोरोना वायरस के चलते देश में दवाओं की कमी होने का डर बढ़ गया है. इसके लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. पैरासोटामोल, विटामिन B1 और विटामिन B12 सहित 26 जरूरी दवाओं और इनग्रेडिएंट्स के निर्यात पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी है. इस बारे में सरकार ने मंगलवार को नोटिफिकेशन भी जारी किया है. असल में सरकार को कोरोना वायरस के चलते चीन से फार्मा इंडस्ट्री द्वारा आयात किए जाने वाले जरूरी इनग्रेडिएंट्स यानी एपीआई की देश में कमी होने और इसके चलते दवाओं की ब्लैक मार्केटिंग का डर है. इसके पहले सरकार ने एपीआई का इंपोर्ट घटने के चलते इनकी उपलब्धता और मौजूदा कीमतों की जानकारी मांगी थी.

डायरक्टरेट जनरल ऑफ फॉरन ट्रेड (DGFT) द्वारा जारी नोटिफिकेशन के अनुसार जिन जरूरी दवाओं या इनग्रेडिएंट्स पर रोक लगाई गई है, उनमें पैरासिटामोल, टिनिडैजॉल, विटामिन B12, विटामिन B1, विटामिन B6, विटामिन E, पैरासीटामॉल, नॉरफ्लॉक्सासीन, नियोमाइसीन जैसे नाम शामिल हैं. इनके एक्सपोर्ट के लिए DGFT से लाइसेंस लेना जरूरी है.

दवाओं की उपलब्धता का हुआ है रिव्यू

सरकार ने उन महत्वपूर्ण और जरूरी दवाइयों की पहचान की है जिनका स्टॉक खत्म हो सकता है. इनमें से ज्यादातर दवाओं की मैन्युफैक्चरिंग के लिए रॉ मटेरियल चीन से आता है. बता दें कि सरकार ने 58 एपीआई की उपलब्धता और मौजूदा कीमतों की जानकारी भी दवा कंपनियों ने मांगी थी. इसके लिए हाई लेवल कमिटी का गठन किया गया था, जिसे दवा कंपनियों ने आज अपनी रिपोर्ट सौंपी है. इसका रिव्यू करने के बाद ही सरकार ने 26 दवाओं के निर्यात पर रोक लगाने का फैसला किया है.

चीन से बड़ी मात्रा में API का आयात

असल में भारत की फार्मा इंडस्ट्री एक्टिव फॉर्मास्युटिकल्स इनग्रेडिएंट्स (API) यानी जरूरी इनग्रेडिएंट्स के लिए चीन पर बहुत हद त​क निर्भर है. लेकिन अभी चीन में कोरोना वायरस के चलते एक्टिव फॉर्मास्युटिकल्स इनग्रेडिएंट्स मैन्युफैक्चरर्स ने अपने प्लांट बंद कर दिए हैं या वहां प्रोडक्शन सुस्त पड़ गया है. प्रोडक्शन बंद होने से चीन से भारत में होने वाला API का इंपोर्ट प्रभावित हो रहा है. ऐसे में दवा कंपनियों के पास इनग्रेडिएंट्स की इन्वेट्री घटने लगी है, जिससे इसके ब्लैक मार्केटिंग का खतरा बढ़ गया है. अगर ब्लैक मार्केटिंग होती है तो दवाओं की जरूरी कीमतों में अचानक से तेजी आ सकती है.

बता दें कि पिछले साल भारत से API का होने वाला निर्यात करीब 22.5 करोड़ डॉलर का था. जबकि हर साल भारत 350 करोड़ डॉलर का API आयात कर रहा है. इसमें से 250 करोड़ डॉलर का आयात चीन से हो रहा है.

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