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कोरोना संकट: घर पर मास्क बना रहे हैं? तो इस बात का जरूर रखें ध्यान, रहेंगे ज्यादा सुरक्षित

अगर आप घर में बने मास्क को पहन रहे हैं, तो उसमें दो फैब्रिक का इस्तेमाल करें.

Updated: Apr 29, 2020 4:01 PM
coronavirus crisis if you are making masks at home use two fabrics to stay protectedअगर आप घर में बने मास्क को पहन रहे हैं, तो उसमें दो फैब्रिक का इस्तेमाल करें. (Representational Image)

अगर आप घर में बने मास्क को पहन रहे हैं, तो उसमें दो फैब्रिक का इस्तेमाल करें. इस समय N95 और सर्जिकल मास्क की सप्लाई कम है, ऐसे में केंद्र ने कोरोना वायरस से बचने के लिए घर में बने मास्क का इस्तेमाल करने की एडवायजरी जारी की है. भारत की एडवायजरी में कॉटन इस्तेमाल करने को कहा गया है. दूसरी तरफ, US सेंटर फॉर डिसिस कंट्रोल एंड प्रीवेंशन ने कोई एक फैब्रिक का सुझाव नहीं दिया है जिसे मास्क को बनाने में इस्तेमाल करना चाहिए.

हालांकि, एक स्टडी का मानना है कि अलग-अलग मैटिरियल की अलग क्षमताएं होती हैं और इसलिए दो फैब्रिक को मिलाया और इस्तेमाल किया जाना चाहिए.

इन फैब्रिक का करें इस्तेमाल

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकिन कैमिकल सोसायटी के जरनल ACS में कहा गया है कि मास्क को बनाने के लिए सिल्क और कॉटन या कॉटन और शिफॉन को संयुक्त तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है. इसमें ऐसे मास्क बनाने की बात की गई है जो aerosol पार्टिकल को बाहर रखने में मदद कर सके. इस पार्टिकल को बाहर रखने से हवा में आई बूंदों से बचा जा सकता है. कोरोना वायरस व्यक्ति के खांसने या छींकने पर हवा में आई बूंदों के जरिए ही मुख्य तौर पर फैलता है.

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दो मैटिरियल से कैसे ज्यादा सुरक्षा होती है ?

रिपोर्ट में कहा गया है कि जब कॉटन जैसे फैब्रिक से मास्क को मजबूती से बुना जाता है, तो यह पार्टिकल के लिए बाधा के तौर पर काम करता है. शिफॉन और सिल्क जैसे फैब्रिक से स्टैटिक चार्ज आता है और इसलिए ये इलेक्ट्रॉस्टैटिक बैरियर के तौर पर काम करते हैं. इस तरह के मिश्रित फैब्रिक की मदद से छोटी से छोटी बूंदों को इंसान के शरीर में घुसने से रोकने में मदद मिलती है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने बूंदों को दो साइज में बांटा है जो कोरोना वायरस को संक्रमित करते हैं. एक साइज 5-10 माइक्रोन का है जबकि दूसरे 5 माइक्रोन से कम होते हैं. 5-10 माइक्रोन के रेसपिरेट्री डॉपलेट होते हैं और ये कोविड-19 के संक्रमण के लिए मुख्य तौर पर जिम्मेदार हैं. हालांकि, दूसरे साइज से भी संक्रमण फैल सकता है.

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