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1 सितंबर: अमल में आ गए ये 10 बदलाव, जानें आप पर कैसे होगा असर

1 सितंबर से देश में कई बड़े बदलाव लागू होने जा रहे हैं.

September 1, 2019 1:39 PM

changes that are going to be effective from 1st september 2019

1 सितंबर से देश में कई बड़े बदलाव लागू होने जा रहे हैं. इनमें कई बैंकों द्वारा रेपो रेट से लिंक्ड लेंडिंग रेट की पेशकश से लेकर टैक्स से जुड़े कुछ नए नियम और ज्यादा जुर्माने वाले मोटर व्हीकल एक्ट के 63 क्लॉज लागू होना तक शामिल है. आइए जानते हैं ऐसे ही 8 बदलावों के बारे में जो आज से अमल में आने वाले हैं…

रेपो रेट से लिंक्ड लोन प्रॉडक्ट

देश के कई बैंक रेपो रेट से लिंक्ड लोन प्रॉडक्ट की पेशकश करने का एलान कर चुके हैं. आज 1 सितंबर से कुछ बैंकों के रेपो रेट लिंक्ड लेंडिंग रेट यानी RLLR लागू हो रहे हैं. इनमें SBI, बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, इलाहाबाद बैंक आदि शामिल हैं. वहीं कुछ बैंक RLLR पहले से लागू कर चुके हैं और कुछ जल्द ही करने वाले हैं. इस बारे में डिटेल स्टोरी पढ़ें…आज से मिलेगा सस्ता कर्ज, इन बैंकों में लागू हुए रेपो रेट से लिंक्ड लेंडिंग रेट

IRCTC ई-टिकट खरीदना महंगा

IRCTC से ई-टिकट खरीदना अब महंगा होगा. एक आदेश के तहत भारतीय रेलवे ने 1 सितंबर से ई-टिकट पर सेवा शुल्क (सर्विस चार्ज) बहाल करने का फैसला किया है. IRCTC की ओर से 30 अगस्त को जारी आदेश के मुताबिक, अब IRCTC नॉन-एसी श्रेणी की ई-टिकट पर 15 रुपये और फर्स्ट क्लास समेत एसी कैटेगरी की सभी ई-टिकट पर 30 रुपये का सेवा शुल्क वसूल करेगा. GST अलग से लागू होगा.

तीन साल पहले मोदी सरकार ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए ई-टिकट पर सेवा शुल्क वापस ले लिया था. पहले IRCTC नॉन-एसी श्रेणी की ई-टिकटों पर 20 रुपये और सभी एसी श्रेणी की ई-टिकटों पर 40 रुपये का सेवा शुल्क लेता था.

टैक्स से जुड़े नियमों में बदलाव

1 सितंबर से टैक्स से जुड़े 4 नियमों में बदलाव होने जा रहा है. इनमें बैंक खाते/खातों से 1 साल में 1 करोड़ रुपये से ज्यादा की कैश निकासी पर 2 फीसदी टीडीएस लगना; अचल संपत्ति की खरीद के लिए किए गए भुगतान पर TDS काटने के लिए कुछ अन्य चार्जों जैसे क्लब की सदस्यता, कार पार्किंग शुल्क, बिजली या जलापूर्ति सेवाओं का भुगतान, रख-रखाव शुल्क समेत अन्य तरह के शुल्क को भी कंसीडरेशन में लेना; ठेकेदारों या पेशेवरों को एक साल में 50 लाख रुपये सालाना से अधिक का भुगतान करने वाले व्यक्ति/HUF के लिए 5 प्रतिशत की दर से TDS अनिवार्य होना और लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी का मैच्योरिटी पीरियड पूरा होने पर मिली रकम टैक्स के दायरे में आने पर कुल इनकम वाले हिस्से पर 5 फीसदी की दर से TDS काटा जाना शामिल है. इन नियमों के बारे में डिटेल में पढ़ें…बदल रहे हैं टैक्स से जुड़े 4 नियम, जान लेना होगा फायदेमंद

रॉयल एनफील्ड की दो बाइक महंगी

रॉयल एनफील्ड (Royal Enfield) की फ्लैगशिप बाइक्स Interceptor 650 और Continental GT 650 की कीमतें आज से बढ़ गई हैं. कंपनी ने इन दोनों बाइक्स की कीमतों में 2 फीसदी की बढ़ोत्तरी की है. यह पहली बार है जब Interceptor 650 और Continental GT 650 की कीमतें बढ़ाई गई हैं. इन दोनों बाइक्स को भारत में नवंबर 2018 में लॉन्च किया गया था. उस वक्त Interceptor 650 की एक्स शोरूम दिल्ली कीमत 2.50 लाख रुपये और Continental GT 650 की 2.65 लाख रुपये रखी गई थी. अब 2 फीसदी की बढ़ोत्तरी के बाद Interceptor 650 5400 रुपये तक महंगी हो जाएगी. वहीं Continental GT 650 के लिए 5700 रुपये तक ज्यादा देने होंगे.

मिलेगा अलग से ओन डैमेज इंश्योरेंस

साधारण बीमा कंपनियां अब वाहनों को भूकंप, बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं, तोडफोड़ एवं दंगे जैसी घटनाओं से होने वाले नुकसान के लिये अलग से बीमा कवर उपलब्ध कराएंगी. बीमा नियामक इरडा ने साधारण बीमा कंपनियों को 1 सितंबर से नई व पुरानी कारों और दोपहिया वाहनों के लिए अलग से इस प्रकार का बीमा उपलब्ध कराने को कहा है. इरडा के सर्कुलर के मुताबिक, ‘बीमा कंपनियों को 1 सितंबर 2019 से नई और पुरानी कारों एवं दोपहिया वाहनों के लिए वार्षिक स्वत: नुकसान यानी ओन डैमेज कवर वाली पॉलिसी पेश करनी होगी. इसमें पॉलिसीधारक के कहने पर आग और चोरी के नुकसान को भी कवर किया जा सकता है.’

बीमा कंपनियों को अलग से ओन डैमेज के कवर के साथ पूरी पैकेज पॉलिसी की पेशकश करने का भी विकल्प होगा. इसमें ​थर्ड पाटी बीमा पॉलिसी के साथ ही ओन डैमेज का जोखिम कवर भी होगा. अभी तक कंपनियों को ओन डैमेज वाली बीमा पॉलिसी लंबी अवधि के लिये जारी करने की अनुमति नहीं थी. पॉलिसी धारकों के पास सभी जोखिम एकमुश्त कवर करने वाली पालिसी में से केवल केवल ओन डैमेज कवर को रिन्यू करने का भी विकल्प होगा.

सर्विस टैक्स और एक्साइज ड्यूटी माफी योजना

सर्विस टैक्स और सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी के पुराने विरासती मामलों को कम करने के लिए विवाद निपटान और माफी योजना 1 सितंबर से चार महीने के लिए अमल में आ गई है. वित्त मंत्रालय के बयान के मुताबिक, इस योजना ‘सबका विश्वास-विरासत विवाद निपटान योजना 2019’ के तहत सभी श्रेणी के मामलों में उल्लेखनीय कर राहत दी जाएगी. साथ ही इसमें ब्याज, जुर्माने की पूरी छूट उपलब्ध होगी।.इन सभी मामलों में ब्याज, जुर्माने या हर्जाने की कोई और देनदारी नहीं होगी. इसमें अभियोजन से भी पूरी माफी मिलेगी. यह योजना 1 सितंबर से 31 दिसंबर 2019 तक लागू रहेगी.

ट्रैफिक नियम

सरकार ने मोटर वाहन संशोधन कानून 2019 के 63 प्रावधानों को अधिसूचित कर दिया है. संसद ने मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक 2019 को इस महीने की शुरुआत में पारित किया था. इसमें यातायात के नियमों के उल्लंघन को लेकर अधिक जुर्माना लगाने का प्रावधान शामिल है. नए प्रावधान 1 सितंबर, 2019 से प्रभाव में आ गए हैं. इन 63 प्रावधानों में शराब पीकर गाड़ी चलाने, तेज गति से दौड़ने (ओवरस्पीड) और ओवरलोडिंग समेत अन्य मामलों में जुर्माना बढ़ाया गया है, वहीं एंबुलेंस या अन्य किसी इमरजेंसी व्हीकल को रास्ता न देने पर भी जुर्माने का प्रावधान किया गया है. किस ट्रैफिक नियम को तोड़ने पर अब कितना जुर्माना देना होगा, इस बारे में डिटेल में पढ़ें…1 सितंबर से शराब पीकर गाड़ी चलाना जेब पर पड़ेगा भारी, मोटर व्हीकल एक्ट के 63 क्लॉज होंगे लागू

SBI सेविंग्स अकाउंट की ब्याज दर

1 सितंबर 2019 से एसबीआई सेविंग्स बैंक अकाउंट पर 1 लाख रुपये तक के बैलेंस पर 3.50 फीसदी सालाना की ब्याज दर लागू होगी. वहीं 1 लाख रुपये से ज्यादा अमाउंट वाले सेविंग्स अकाउंट के लिए ब्याज दर 3 फीसदी सालाना रहेगी. 1 मई 2019 से SBI ने सेविंग बैंक डिपॉजिट (1 लाख से ज्यादा जमा राशि) पर मिलने वाले इंटरेस्ट को रेपो रेट से लिंक कर दिया था.

PAN के बजाय आधार का इस्तेमाल

बजट 2019 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टैक्सपेयर्स की सुविधा के लिए पैन और आधार को इंटरचेंजेबल बनाने का प्रस्ताव रखा था. साथ ही आईटीआर फाइल करने के लिए पैन की बजाय आधार इस्तेमाल करने का भी प्रस्ताव दिया गया. यह भी कहा गया कि अब जहां भी पैन का उल्लेख करने की जरूरत है, वहां आधार नंबर के जरिए काम चलाया जा सकता है. यह नया नियम भी 1 सितंबर 2019 से प्रभावी होने वाला है. हालांकि यह कुछ ट्रांजेक्शंस तक सीमित रह सकता है.

इसके अलावा अब 30 सितंबर 2019 तक पैन के आधार से लिंक न होने की स्थिति में पैन को ‘इनवैलिड’ के बजाय ‘इनऑपरेटिव’ करार दिया जाएगा.

बैंकों को छोटे ट्रांजेक्शन की देनी पड़ सकती है जानकारी

अभी तक बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों को 50,000 रुपये या इससे ज्यादा के ट्रांजेक्शन की जानकारी देनी पड़ती थी. लेकिन एक सितंबर से बैंकों को इससे कम मूल्य के ट्रांजेक्शन की भी जानकारी आपको देनी पड़ सकती है.

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