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Chandrayaan-2 के ऑर्बिटर से मिल सकते हैं बेहतर परिणाम: पूर्व इसरो प्रमुख

इस बार का ऑर्बिटर महत्वपूर्ण उपकरणों से लैस है जो एक दशक पहले भेजे गए ‘चंद्रयान-1’ की तुलना में अधिक शानदार परिणाम देने पर केंद्रित हैं.

September 12, 2019 9:39 PM
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व प्रमुख ए एस किरण कुमार ने गुरुवार को कहा कि लैंडर ‘विक्रम’ और इसके भीतर मौजूद रोवर ‘प्रज्ञान’ से संपर्क टूट जाने के बावजूद ‘चंद्रयान-2’ का ऑर्बिटर ‘‘बेहतर परिणाम’’ प्राप्त करने में सक्षम है. कुमार ने कहा कि, ‘‘अंतिम ‘लैंडिंग’ गतिविधि को छोड़कर अन्य सभी योजनाबद्ध गतिविधियां सफलतापूर्वक पूरी हुई हैं.’’ उन्होंने कहा कि इस बार का ऑर्बिटर महत्वपूर्ण उपकरणों से लैस है जो एक दशक पहले भेजे गए ‘चंद्रयान-1’ की तुलना में अधिक शानदार परिणाम देने पर केंद्रित हैं. कुमार ने कहा कि पूर्व में नासा जेपीएल से ‘चंद्रयान-1’ द्वारा ले जाए गए दो उपकरणों की तुलना में इस बार के उपकरण तीन माइक्रोन से लेकर पांच माइक्रोन तक की स्पेक्ट्रम रेंज तथा रडारों, दोनों के मामलों में ‘‘शानदार प्रदर्शन’’ करने की क्षमता से लैस हैं.

पहले से बेहतर उपकरण

उन्होंने कहा, ‘‘एक सिंथेटिक अपर्चर रडार की जगह (इस बार) हमारे पास दो फ्रीक्वेंसी रडार हैं. इस तरह इसमें अनेक नई क्षमताएं हैं. वास्तव में यह बेहतर परिणाम हासिल करने में हमारी मदद करेगा.’’पूर्व इसरो प्रमुख ने कहा, ‘‘हम शानदार परिणाम मिलने की उम्मीद कर रहे हैं क्योंकि हम अपने माइक्रोवेव ड्युअल फ्रीक्वेंसी सेंसरों का इस्तेमाल कर स्थाई रूप से अंधकार में छाए रहने वाले (चांद के) क्षेत्रों का मानचित्रीकरण करने में सफल होंगे.’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसके अलावा हमारे पास बहुत ही हाई क्वालिटी वाले कैमरे तथा दीर्घ स्पेक्ट्रल रेंज है.’’

विक्रम से जमीनी स्टेशन से संपर्क टूटा

इसरो के महत्वाकांक्षी दूसरे चंद्र मिशन के तहत ‘चंद्रयान-2’ ने गत 22 जुलाई को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से उड़ान भरी थी. यान ने पृथ्वी और चंद्रमा की कक्षा सहित सभी चरणों को सफलतापूर्वक पूरा किया. हालांकि, गत सात सितंबर को चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ के प्रयास के अंतिम क्षणों में लैंडर ‘विक्रम’ का जमीनी स्टेशन से संपर्क टूट गया था.

7 साल तक काम कर सकता है ऑर्बिटर

यान का ऑर्बिटर एकदम ठीक है और शान के साथ चंद्रमा की परिक्रमा कर रहा है. इसका कार्यकाल एक साल निर्धारित था, लेकिन अब इसरो ने कहा है कि पर्याप्त मात्रा में ईंधन होने के चलते ऑर्बिटर लगभग सात साल तक काम कर सकता है. यदि ‘विक्रम’ सॉफ्ट लैंडिंग में सफल रहता तो इसके भीतर से रोवर ‘प्रज्ञान’ बाहर निकलता और एक चंद्र दिवस यानी कि पृथ्वी के 14 दिन जितनी अवधि तक चंद्र सतह पर वैज्ञानिक प्रयोगों को अंजाम देता. इसरो वैज्ञानिक अब भी लैंडर से संपर्क की हरसंभव कोशिशों में लगे हैं. अंतरिक्ष एजेंसी ने गत रविवार को कहा था कि ऑर्बिटर ने चंद्र सतह पर पलटे ‘विक्रम’ का पता लगा लिया है और उससे संपर्क के सभी प्रयास किए जा रहे हैं.

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