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  1. चंद्रयान-2 लॉन्च: 7 सितंबर को चांद की सतह पर उतरेगा, अंतरिक्ष में भारत की एक और छलांग

चंद्रयान-2 लॉन्च: 7 सितंबर को चांद की सतह पर उतरेगा, अंतरिक्ष में भारत की एक और छलांग

‘चंद्रयान-2’ चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में उतरेगा, जहां अभी तक कोई देश नहीं पहुंच पाया है.

July 22, 2019 4:04 PM
Chandrayaan 2 launch: ISRO’s historic mission to MoonChandrayaan 2

चंद्रयान-2: भारत के चांद पर दूसरे मिशन चंद्रयान-2 को लॉन्च कर दिया गया है.  इसी के साथ भारत ने अंतरिक्ष में एक और बड़ी छलांग लगा दी है.  ‘चंद्रयान-2’ चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में उतरेगा, जहां अभी तक कोई देश नहीं पहुंच पाया है. इससे चांद के बारे में समझ बढ़ाने में मदद मिलेगी और नई खोज होगी जिनका भारत और पूरी मानवता को लाभ मिलेगा.

चंद्रयान-2 को लेकर बाहुबली नाम से फेमस सबसे ताकतवर GSLVMkIII-M1 रॉकेट ने दोपहर 2.43 बजे सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र, श्रीहरिकोटा से उड़ान भरी. चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण पहले 15 जुलाई 2019 को सुबह 2:51 बजे होना था, जिसे तकनीकी खराबी के चलते 1.55 बजे रोक दिया गया था.

क्या बोले ISRO चीफ

ISRO चीफ के सीवन ने चंद्रयान-2 की लॉन्च के बाद कहा, ‘मैं यह एलान करते हुए बेहद खुश हूं कि GSLVMkIII-M1 ने चंद्रयान—2 को पृथ्वी की कक्षा में सफलतापूर्वक पहुंचा दिया है. यह चांद की ओर और चांद पर साउथ पोल के निकट उतरने की भारत की ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत है. पहले 15 जुलाई को हो रही लॉन्चिंग कैंसिल होने पर सीवन ने कहा कि उस तकनीकी खामी के मिलने के बाद हमने उसे फिक्स किया और अब ISRO ने दमदार वापसी की है.’

 

चांद तक पहुंचने में लगेंगे 48 दिन

चंद्रयान-2 तीन चरणों का 3,850 किलोग्राम वजनी अंतरिक्ष यान है. इसके साथ एक ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर भी जाने हैं. पहले चंद्र मिशन की सफलता के 11 साल बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) भू-समकालिक प्रक्षेपण यान GSLV-MK III से 978 करोड़ रुपये की लागत से बने ‘चंद्रयान-2’ का प्रक्षेपण करेगा. इसे चांद तक पहुंचने में अब 48 दिन लगेंगे. स्वदेशी तकनीक से निर्मित चंद्रयान-2 में कुल 13 पेलोड हैं. आठ ऑर्बिटर में, तीन पेलोड लैंडर ‘विक्रम’ और दो पेलोड रोवर ‘प्रज्ञान’ में हैं. पांच पेलोड भारत के, तीन यूरोप, दो अमेरिका और एक बुल्गारिया के हैं.

युवा विज्ञान के प्रति होंगे और प्रोत्साहित: PM मोदी

चंद्रयान-2 की सफलतापूर्वक लॉन्चिंग के बाद PM मोदी ने ट्वीट कर कहा, ‘ये विशेष क्षण हैं, जो हमारे गौरवशाली इतिहास के पन्नों में दर्ज किए जाएंगे. चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण विज्ञान के नए स्तरों को निर्धारित करने की दिशा में हमारे वैज्ञानिकों के कौशल और 130 करोड़ भारतीयों के संकल्प को दर्शाता है. हर भारतीय आज बेहद गर्व महसूस कर रहा है. जो बात हर भारतीय को आनंदित कर रही है, वह यह कि चंद्रयान-2 पूरी तरह से स्वदेशी मिशन है.’

‘चंद्रयान-2 यूनीक है क्योंकि यह चांद के दक्षिणी ध्रुव पर खोज करेगा और अध्ययन करेगा. इस हिस्से पर अभी तक किसी अन्य मिशन में खोजें नहीं हुई हैं. यह मिशन चांद के बारे में नया ज्ञान उपलब्ध कराएगा. चंद्रयान-2 जैसी कोशिशें हमारे युवाओं को विज्ञान, टॉप क्वालिटी रिसर्च और इनोवेशन के लिए और प्रोत्साहित करेंगी.’

चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग कराने वाला भारत बनेगा चौथा देश

इसरो के सबसे जटिल और अब तक के सबसे प्रतिष्ठित मिशन माने जाने वाले ‘चंद्रयान-2’ के साथ भारत, रूस, अमेरिका और चीन के बाद चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग कराने वाला चौथा देश बन जाएगा.

 

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