चंद्रयान-2: चांद की सतह पर ‘प्रज्ञान’ करेगा चहलकदमी, मिशन से जुड़ी 10 रोचक बातें

GSLV Mk-III भारत का अब तक का सबसे शक्तिशाली लॉन्चर है, और इसे पूरी तरह से देश में ही बनाया गया है.

Chandrayaan 2, ISRO's Chandrayaan 2
ISRO had informed earlier that the landing schedule of the Chandrayaan 2 is unchanged

Chandrayaan 2: भारत के चांद पर दूसरे मिशन चंद्रयान-2 को लॉन्च कर दिया गया है. इसी के साथ भारत ने अंतरिक्ष में एक और बड़ी छलांग लगा दी है. चंद्रयान-2 दोपहर 2 बजकर 43 मिनट पर श्रीहरिकोटा के सतीश धवन सेंटर से लॉन्च सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया. बाहुबली नाम से फेमस सबसे ताकतवर GSLVMkIII-M1 रॉकेट चंद्रयान-2 को लेकर अंतरिक्ष में गया.

‘चंद्रयान-2’ चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में उतरेगा, जहां अभी तक कोई देश नहीं पहुंच पाया है. इससे चांद के बारे में समझ बढ़ाने में मदद मिलेगी और नई खोज होगी जिनका भारत और पूरी मानवता को लाभ मिलेगा.

सफलतापूर्वक लॉन्च होने के बाद चांद के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-2 को लैंड करने में अब 48 दिन लगेंगे. चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण पहले 15 जुलाई 2019 को सुबह 2:51 बजे होना था, जिसे तकनीकी खराबी के चलते 1.55 बजे रोक दिया गया था.

लागत 978 करोड़ रु

पहले चंद्र मिशन की सफलता के 11 साल बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने भू-समकालिक प्रक्षेपण यान GSLV-MK III से 978 करोड़ रुपये की लागत से बने ‘चंद्रयान-2’ का प्रक्षेपण किया है.

चंद्रयान 2 मिशन की 10 इंट्रेस्टिंग बातें

1. GSLV Mk-III भारत का अब तक का सबसे शक्तिशाली लॉन्चर है, और इसे पूरी तरह से देश में ही बनाया गया है. इसे बाहुबली कहा जाता है.

2. GSLV Mk-III में तीन मॉड्यूल होंगे- ऑर्बिटर, लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान. स्वदेशी तकनीक से निर्मित चंद्रयान-2 में कुल 13 पेलोड हैं. आठ ऑर्बिटर में, तीन पेलोड लैंडर ‘विक्रम’ और दो पेलोड रोवर ‘प्रज्ञान’ में हैं. पांच पेलोड भारत के, तीन यूरोप, दो अमेरिका और एक बुल्गारिया के हैं.

3. इसरो के मुताबिक ऑर्बिटर, चंद्रमा की सतह का निरीक्षण करेगा और पृथ्वी व चंद्रयान 2 के लैंडर-विक्रम के बीच संकेत रिले करेगा. लैंडर विक्रम को चंद्रमा की सतह पर भारत की पहली सफल लैंडिंग के लिए डिजाइन किया गया है. रोवर ए आई-संचालित 6-पहिया वाहन है, इसका नाम ”प्रज्ञान” है, जो संस्कृत के ज्ञान शब्द से लिया गया है. चांद की सतह पर पहुंचने के बाद लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) 14 दिनों तक सक्रिय रहेंगे. रोवर इस दौरान 1 सेंटीमीटर/सेकंड की गति से चांद की सतह पर चलेगा और उसके तत्वों की स्टडी करेगा व तस्वीरें भेजेगा. रोवर वहां 14 दिनों में कुल 500 मीटर कवर करेगा. दूसरी तरफ, ऑर्बिटर चंद्रमा की कक्षा में 100 किलोमीटर की ऊंचाई पर उसकी परिक्रमा करता रहेगा. ऑर्बिटर वहां 1 साल तक सक्रिय रहेगा.

4. इस बार मिशन का वजन 3,850 किलो होगा जो कि चंद्रयान-1 मिशन (1380 किलो) से करीब तीन गुना ज्यादा है.

5. भारत चंद्रमा की सतह पर रॉकेट उतारने वाला चौथा देश है लेकिन चंद्रयान 2 पहला अंतरिक्ष मिशन है, जो चंद्रमा के दक्षिण ध्रुवीय क्षेत्र पर सफलतापूर्वक लैंडिंग का संचालन करेगा.

6. यह पहला भारतीय अभियान है, जो देश में विकसित प्रौद्योगिकी के साथ चाँद की सतह के बारे में जानकारियां जुटाएगा.

7. 18 सिंतबर 2008 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने चंद्रयान 2 मिशन को मंजूरी दी थी.

8. चंद्रमा की सतह पर पानी होने के सबूत तो चंद्रयान 1 ने खोज लिए थे लेकिन चंद्रयान 2 से यह पता लगाया जा सकेगा कि चांद की सतह और उपसतह के कितने भाग में पानी है.

9. चंद्रयान-2 लॉन्च होने के बाद धरती की कक्षा से निकलकर GSLVMkIII-M1 रॉकेट से अलग हो जाएगा और रॉकेट अंतरिक्ष में ही नष्ट हो जाएगा. इसके बाद चंद्रयान-2 चांद की कक्षा में पहुंचेगा और लैंडर ऑर्बिटर से अलग हो जाएगा और चंद्रमा की कक्षा का चक्कर लगाना शुरू कर देगा.

10. लैंडर को चंद्रमा के दक्षिणी हिस्से पर उतरने में करीब 15 मिनट लगेंगे. यह 15 मिनट काफी मुश्किल भरें होंगे क्योंकि भारत ने पहले ऐसा कभी नहीं किया है.

Get Business News in Hindi, latest India News in Hindi, and other breaking news on share market, investment scheme and much more on Financial Express Hindi. Like us on Facebook, Follow us on Twitter for latest financial news and share market updates.

Financial Express Telegram Financial Express is now on Telegram. Click here to join our channel and stay updated with the latest Biz news and updates.

TRENDING NOW

Business News

Debate