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चाबहार पोर्ट से अफगानिस्तान समेत अन्य देशों के लॉजिस्टिक्स कॉस्ट में आएगी कमी, केंद्रीय मंत्री ने समुद्रों की बताई 21वीं सदी

चाबहार पोर्ट से अफगानिस्तान और अन्य देशों को अपने लॉजिस्टिक्स कॉस्ट्स को कम करने में मदद मिलेगी.

Updated: Mar 04, 2021 7:36 PM
Chabahar Port to help Afghanistan, other countries reduce logistics cost said Governemtn 21th century of seas skies space not of landकेंद्रीय मंत्री के मुताबिक चाबहार पोर्ट शांति, स्थायित्व और संपन्नता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का एक हिस्सा है.

चाबहार पोर्ट से अफगानिस्तान और अन्य देशों को अपने लॉजिस्टिक्स कॉस्ट्स को कम करने में मदद मिलेगी. केंद्र सरकार के मुताबिक इससे भारत और यूरेशिया के बीच कनेक्टिविटी के लिए ट्रांजिट हब विकसित होगा. ईरान के दक्षिणी तट पर सिस्तान-बलोचिस्चान प्रोविंस में स्थित इस पोर्ट को भारत, ईरान और अफगानिस्तान मिलकर विकसित कर रहे हैं. चाबहार पोर्ट फारस की खाड़ी के बाहर स्थित है और बिना पाकिस्तान से गुजरे हुए भारत के पश्चिमी तट से पहुंचा जा सकता है.
चाबहार पोर्ट को भारत, ईरान और अफगानिस्तान मिलकर विकसित कर रहे हैं. इससे समुद्र से दूर स्थित अफगानिस्तान की पहुंच समुद्रों तक हो जाएगी. पोर्ट्स, शिपिंग एंड वाटरवेज मिनिस्टर मनसुख मांडविया के मुताबिक चाबहार पोर्ट से लॉजिस्टिक्स कॉस्ट में कमी आएगी. इसके अलावा यह एक भरोसेमंद और सुरक्षित ट्रांसपोर्ट कोरिडोर का निर्माण करेगा. उन्होंने ये बातें मैरिटाइम इंडिया समिट 2021 में चाबहार डे पर आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए कही. उन्होंने कहा कि 21वीं सदी जमीन की बजाय समुद्रों, आकाश और अंतरिक्ष की है.

21वीं सदी समुद्रों, आकाश और अंतरिक्ष की

मांडविया ने कहा कि चाबहार पोर्ट शांति, स्थायित्व और संपन्नता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का एक हिस्सा है. इस प्रोजेक्ट से भारत और यूरेशिया के बीच कनेक्टिविटी के लिए एक ट्रांजिट हब विकसित करने में आसानी होगी. मांडविया ने कहा कि 21वीं सदी जमीन की नहीं है बल्कि समुद्रों, आसमान और अंतरिक्ष की होगी. ऐसे में भारत, केंद्रीय एशिया और उसके आस-पास के क्षेत्रों से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए भारत हाई प्रायोरिटी के साथ काम कर रहा है.

अफगानिस्तान के कारोबार में होगी बढ़ोतरी

मिनिस्ट्री ऑफ पोर्ट्स ऑफ शिपिंग एंड वाटरवेज के सेक्रेटरी संजीव रंजन ने कहा कि मैरिटाइम इंडिया विजन 2030 का मुख्य जोर उत्पादकता को बढ़ाने, प्रदर्शन में सुधार करने, कनेक्टिविटी बढ़ाने और लॉजिस्टिक्स कॉस्ट कम करने पर है. इसके लिए कॉस्ट रिडक्टिव प्रोसेस को एडॉप्ट किया गया है. चाबहार पोर्ट के जरिए अफगानिस्तान का कारोबार न सिर्फ भारत से बल्कि अन्य क्षेत्रीय देशों के साथ भी बढ़ेगा.

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