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कोरोना पीड़ितों को 4 लाख रुपये मुआवजा देना संभव नहीं, सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने दिया जवाब

गृह मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि जिन लोगों की कोविड-19 की वजह से मौत हुई है, उनके परिजनों को 4 लाख रुपये का मुआवजा देना संभव नहीं होगा.

Updated: Jun 20, 2021 1:10 PM
"Police is a state subject. We will issue notice and pass comprehensive orders. This cannot continue. Judiciary we can take care separately but police are also there," Justice Nariman said."Police is a state subject. We will issue notice and pass comprehensive orders. This cannot continue. Judiciary we can take care separately but police are also there," Justice Nariman said.

गृह मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि जिन लोगों की कोविड-19 की वजह से मौत हुई है, उनके परिजनों को 4 लाख रुपये का मुआवजा देना संभव नहीं होगा क्योंकि सरकार के संसाधनों की सीमा है. MHA ने सर्वोच्च अदालत को बताया कि इससे पूरा सरकार का आपदा राहत कोष खाली हो जाएगा. यह दूसरे मामलों पर महामारी के खिलाफ कदमों पर असर डालेगा और अच्छे से ज्यादा नुकसान करेगा.

सरकार ने एफिडेविट में कहा कि दुर्लभ संसाधनों का मुआवजा देने के लिए इस्तेमाल करने से, महामारी के खिलाफ कदमों और दूसरे मामलों में स्वास्थ्य पर खर्च प्रभावित हो सकता है. और इसलिए इससे अच्छे से ज्यादा नुकसान हो सकता है.

मुआवजे की मांग को लेकर थी याचिका

मंत्रालय एक याचिका का जवाब दे रहा था, जिसमें केंद्र और राज्यों की सरकारों को कोरोना या कोरोना के बाद जटिलताओं की वजह से मरे लोगों के परिवार के सदस्यों को मुआवजा देने की मांग की गई थी. वकील गौरव कुमार बंसल और रीपक कंसल की याचिका में आपदा प्रबंधन एक्ट (DMA) 2005 के सेक्शन 12 का हवाला दिया गया है, जिसमें कहा गया है कि राष्ट्रीय अथॉरिटी को आपदा से प्रभावित लोगों को राहत के न्यूनतम मापदंडों के लिए गाइडलाइंस की सिफारिश करनी चाहिए, जिसमें मुआवजा शामिल हो.

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केंद्र सरकार ने कहा कि 4 लाख रुपये का मुआवजा राज्य सरकारों की वित्तीय स्थिति से बाहर है. गृह मंत्रालय ने कहा कि पहले ही राज्य सरकार और केंद्र सरकारों की वित्तीय स्थिति दबाव में है, जिसके पीछे कारण टैक्स रेवेन्यू में कटौती और महामारी की वजह से स्वास्थ्य पर खर्चों में बढ़ोतरी है.

आपदा प्रबंधन एक्ट के सेक्शन 12 को लेकर जवाब में कहा गया है कि वह राष्ट्रीय अथॉरिटी है, जिसका काम राहत के न्यूनतम मापदंडों को लेकर गाइडलाइंस की सिफारिश करना है, जिसमें मुआवजा भी शामिल है.

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