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बेनामी लेन-देन मामलों के जल्द निपटारे की कवायद शुरू, विशेष अदालतों की अधिसूचना हुई जारी

काले धन पर रोक लगाने के उद्देश्य से संसद ने अगस्त 2016 में बेनामी लेन-देन (रोकथाम) अधिनियम पारित किया था.

October 21, 2018 1:24 PM
Centre notifies special courts for benami transaction casesबेनामी लेन-देन उन सौदों को कहा जाता है जो संदिग्ध नाम से किए जाते हैं या संपत्ति के मालिक को मालिकाना हक की सूचना नहीं होती है या लेन-देन में भुगतान करने वाला पक्ष संपर्क में नहीं हो. (Representational Image)

केंद्र सरकार ने 34 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में ऐसी सत्र अदालतों को अधिसूचित किया है, जो बेनामी लेनदेन कानून के तहत अपराधों की सुनवाई के लिए विशेष अदालत के रूप में कार्य करेंगी.

वित्त मंत्रालय ने एक अधिसूचना में कहा कि बेनामी संपत्ति लेन-देन रोकथाम अधिनियम 1988 के तहत दंडनीय अपराधों की सुनवाई के लिए संबंधित उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों के साथ परामर्श के बाद राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में इन सत्र अदालतों को अधिसूचित किया गया है.

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के मामले में हर जिले में दूसरे अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत को विशेष अदालत बनाया गया है. कानून में यह कहा गया है कि हर मुकदमे की सुनवाई जितनी तेजी से संभव हो, की जाए और विशेष अदालत द्वारा सुनवाई को शिकायत दर्ज करने के छह महीने के भीतर पूरा करने का हर संभव प्रयास किया जाए.

क्या है बेनामी लेन-देन

बेनामी लेन-देन उन सौदों को कहा जाता है जो संदिग्ध नाम से किए जाते हैं या संपत्ति के मालिक को मालिकाना हक की सूचना नहीं होती है या लेन-देन में भुगतान करने वाला पक्ष संपर्क में नहीं हो. काले धन पर रोक लगाने के उद्देश्य से संसद ने अगस्त 2016 में बेनामी लेन-देन (रोकथाम) अधिनियम पारित किया था. इस अधिनियम के सभी नियम एवं प्रावधान एक नवंबर 2016 से प्रभावी हैं.

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