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दिल्ली की अनाधिकृत कॉलोनियों में रहने वालों को मिलगा मालिकाना हक, कैबिनेट ने दी मंजूरी

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने को बुधवार को मंजूरी दे दी.

Updated: Oct 24, 2019 12:14 AM
Centre approves proposal to grant ownership rights to people in unauthorised colonies in DelhiImage: PTI

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने को बुधवार को मंजूरी दे दी. सरकार के इस कदम से इन कॉलोनियों में रह रहे लाखों संपत्ति मालिकों को उनकी संपत्ति का मालिकाना हक देने का रास्ता साफ हो गया है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई. बैठक के बाद आवास एवं शहरी मामलों के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभाव) हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि केन्द्र सरकार के इस फैसले का लाभ दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों में रह रहे लगभग 40 लाख लोगों को मिलेगा, जिन्हें पिछले कई दशकों से संपत्ति का मालिकाना हक मिलने का इंतजार था.

पुरी ने स्पष्ट किया कि इस फैसले के दायरे में सरकारी और निजी, दोनों श्रेणियों की जमीन पर बसी अनाधिकृत कॉलोनियों को शामिल किया गया है लेकिन दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की जमीन पर बने फार्म हाउस, सैनिक फार्म, महरौली एंक्लेव और अनंत राम डेयरी इलाके में बने फार्म हाउस इस फैसले के दायरे से बाहर होंगे.

खाली प्लॉट वालों को भी मिलेगा मालिकाना हक

उल्लेखनीय है कि इन इलाकों में निर्मित फार्म हाउस के मालिकों को भी अपनी संपत्ति को नियमित कराने की अनुमति मिलने की दरकार है. फार्म हाउस वाले ये इलाके अनाधिकृत होने के कारण इनमें निर्मित फार्म हाउस भी कानूनी तौर पर नियमित नहीं हो पाए हैं. पुरी ने स्पष्ट किया कि नियमित होने वाली कॉलोनी में निर्मित संपत्ति के अलावा खाली प्लॉट को भी नियमित कराकर संपत्ति का मालिकाना हक दिया जाएगा.

देना होगा मामूली शुल्क

उन्होंने कहा कि इन कॉलोनियों में आम तौर पर निम्न आय वर्ग के लोग रहते हैं, इसलिए संपत्ति को नियमित करने के लिए मामूली शुल्क निर्धारित किया गया है. इसके तहत सौ वर्ग मीटर से कम क्षेत्रफल वाले भूखंड को नियमित कराने का शुल्क उस क्षेत्र के सर्किल रेट का 0.5 फीसदी होगा. इसी प्रकार 100 से 250 वर्गमीटर तक क्षेत्रफल वाले भूखंड के लिए सर्किल रेट का एक फीसदी और 250 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले भूखंड को नियमित कराने का शुल्क सर्किल रेट का 2.5 फीसदी देना होगा.

इस शुल्क का भुगतान तीन समान किश्तों में एक साल के भीतर किया जा सकेगा. शुल्क का एकमुश्त भुगतान करने वालों को संपत्ति का मालिकाना हक तत्काल प्रभाव से मिल जाएगा. किश्तों में शुल्क देने वालों को अस्थाई मालिकाना हक दिया जाएगा, भुगतान पूरा होने पर स्वामित्व का स्थायी अधिकार मिलेगा.

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1797 कॉलोनियों की हुई पहचान

नियमित की जाने वाली कॉलोनियों में दिल्ली के लगभग 175 वर्ग किमी क्षेत्र में बसी 1797 कॉलोनियों को चिन्हित किया गया है. उल्लेखनीय है कि दिल्ली सरकार की तरफ से 1639 अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने के कई साल पुराने प्रस्ताव पर केन्द्र सरकार ने नए सिरे से क्षेत्रवार सर्वेक्षण कर 1797 कालोनियों को नियमित करने का फैसला किया है. इन कॉलोनियों के नियमित नहीं होने के कारण इनमें बिजली, पानी, सड़क और सीवर सहित अन्य मूलभूत नागरिक सुविधाओं की बहाली में दिल्ली सरकार और स्थानीय निकायों को कानूनी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा था.

संसद के आगामी सत्र में पेश होगा विधेयक

पुरी ने कहा कि इस फैसले के बाद अनाधिकृत कॉलोनियों में भूखंड मालिकों को मकान बनवाने के लिए बैंक से ऋण भी मिल सकेगा. उन्होंने बताया कि इस फैसले को कानूनी जामा पहनाने के लिए सरकार संसद के आगामी सत्र में विधेयक पेश किया जाएगा. मंत्रिमंडल ने अनाधिकृत कॉलोनियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया निर्धारित करने वाले विधेयक के ड्राफ्ट प्रस्ताव को भी मंजूरी प्रदान कर दी है.

उन्होंने बताया कि अनधिकृत कालोनियों के सीमांकन की जिम्मेदारी डीडीए को सौंपी गई है. डीडीए प्रत्येक कालोनी का सीमांकन कर इनके नियमितीकरण की कार्ययोजना (लोकल एरिया प्लान) भी बनाएगा. पुरी ने बताया कि नियमित करने की प्रक्रिया में विलंब शुल्क और अतिरिक्त विकास शुल्क नहीं वसूला जाएगा.

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