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देश में वैक्सीन की कमी पर केंद्र सरकार की सफाई, विपक्ष के तमाम आरोपों का दिया जवाब

देश भर में वैक्सीन की उपलब्धता को लेकर केंद्र सरकार पर लग रहे तमाम आरोपों का नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. विनोद पॉल ने बिंदुवार जवाब दिया है.

Updated: May 27, 2021 6:31 PM
central government issues Myths and Facts on India Vaccination Process know here detailsभारत में 16 जनवरी से दुनिया का सबसे बड़ी टीकाकरण कार्यक्रम चल रहा है.

भारत में 16 जनवरी से कोविड-19 से बचाव के लिए बड़े पैमाने पर वैक्सीन लगाई जा रही है. लेकिन कई राज्यों में जरूरत के मुताबिक वैक्सीन की सप्लाई नहीं मिल पाने की शिकायतें भी लगातार आ रही हैं. दिल्ली, पंजाब समेत कई राज्य सरकारों ने और विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार पर्याप्त वैक्सीन मुहैया नहीं करा रही है और विदेशों से टीके आयात करने की जिम्मेदारी राज्यों पर डालकर पल्ला झाड़ रही है. अब केंद्र सरकार ने इन आरोपों का बिंदुवार जवाब दिया है. नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) और कोरोना वैक्सीनेशन एडमिनिस्ट्रेशन को लेकर बने विशेषज्ञों के राष्ट्रीय समूह NEGVAC के प्रमुख डॉ. विनोद पॉल ने तमाम आरोपों को खारिज करते हुए सरकार का पक्ष सामने रखा है.

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विपक्ष का आरोप: केंद्र विदेशों से टीके खरीदने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं कर रहा है

सरकार की सफाई: केंद्र सरकार पिछले साल 2020 के मध्य से ही वैक्सीन बनाने वाली सभी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय कंपनियों से लगातार संपर्क बनाए हुए है. इसे लेकर फाइजर, जेएंडजे और मॉडर्ना के साथ कई दौर की बातचीत भी हो चुकी है. केंद्र सरकार ने उन्हें भारत में उनके टीकों की आपूर्ति और/या इन्हें बनाने के लिए सभी प्रकार की सहायता की पेशकश की है. हालांकि यह समझना चाहिए कि विश्व स्तर पर टीके सीमित आपूर्ति में हैं और सीमित स्टॉक को आवंटित करने में कंपनियों की अपनी प्राथमिकताएं, योजनाएं और मजबूरियां हैं. वे पहले उस देश में इसे देंगी, जहां इसे बना रही हैं. फाइजर ने जैसे ही वैक्सीन की उपलब्धता का संकेत दिया, इसके जल्द आयात के लिए मिलकर कार्य किया जा रहा है. इसके अलावा भारत सरकार के प्रयासों के चलते स्पुतनिक वैक्सीन परीक्षणों में तेजी आई और रूस ने हमारी कंपनियों को टीके की दो किश्तें भेजते हुए तकनीक-हस्तांतरण पहले ही कर दी हैं और अब बहुत जल्द ही ये कंपनियां इसका निर्माण भी शुरू कर देंगी. सभी विदेशी वैक्सीन निर्माताओं से भारत में आने और भारत व दुनिया के लिए वैक्सीन बनाने के लिए एक बार फिर अनुरोध किया जा रहा है.

विपक्ष का आरोप: केंद्र ने विश्व स्तर पर उपलब्ध टीकों को मंजूरी नहीं दी है

सरकार की सफाई: केंद्र सरकार ने अप्रैल में ही भारत में अमेरिका, यूरोप, ब्रिटेन व जापान की नियामकों द्वारा और डब्ल्यूएचओ की इमरजेंसी यूज लिस्टिंग के लिए मंजूर टीकों को मंगाने की प्रक्रिया को आसान बना दिया है. इन टीकों को प्रयोग से पहले ब्रिजिंग ट्रायल्स से गुजरने की आवश्यकता नहीं होगी. इसके अलावा भी अन्य देशों में बनाई गई और बेहतर तरीके से परीक्षण की गई वैक्सीन के लिए ट्रॉयल की जरूरत को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए प्रावधान में अब और संशोधन किया गया है. दवा नियामक के पास इस समय किसी भी विदेशी कंपनी का आवेदन अप्रूवल के लिए नहीं अटका नहीं है.

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विपक्ष का आरोप: केंद्र टीकों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं कर रहा

सरकार की सफाई:

  • केंद्र सरकार 2020 की शुरुआत से ही अधिक कंपनियों को टीके का उत्पादन करने में सक्षम बनाने में प्रभावी भूमिका निभा रही है. हालांकि कोरोना वैक्सीन को लेकर भारत में सिर्फ भारत बायोटेक के पास आईपी (इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी) है. यह भारत सरकार ने सुनिश्चित किया है कि भारत बायोटेक के अपने प्लांटों को बढ़ाने के अलावा 3 अन्य कंपनियां/प्लांट कोवैक्सीन का उत्पादन शुरू करेंगी.
  • भारत बायोटेक द्वारा कोवैक्सीन का उत्पादन अक्टूबर तक 1 करोड़ प्रति माह से बढ़ाकर 10 करोड़ माह किया जा रहा है. इसके अलावा तीन अन्य सरकारी कंपनियों के लिए दिसंबर तक 4 करोड़ खुराक तक उत्पादन करने का लक्ष्य रखा गया है.
    सरकार के प्रोत्साहन से सीरम इंस्टीट्यूट हर महीने 6.5 करोड़ डोज के कोविशील्ड उत्पादन को बढ़ाकर 11 करोड़ डोज प्रति माह कर रहा है.
  • भारत सरकार रूस के साथ साझेदारी में यह भी सुनिश्चित कर रही है कि डॉ. रेड्डी के साथ मिलकर 6 कंपनियां स्पुतनिक का उत्पादन करेंगी.
  • केन्द्र सरकार जायडस कैडिला, बायोई के साथ-साथ जेनोवा को अपने-अपने स्वदेशी टीकों के लिए कोविड सुरक्षा योजना के तहत फंडिंग के साथ-साथ राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं में तकनीकी सहायता के जरिए समर्थन कर रही है.
  • इसके अलावा भारत बायोटेक सिंगल डोज वाली इंट्रानसल वैक्सीन बना रही है जिसके लिए सरकार फंडिंग कर रही है.
  • इस साल 2021 के अंत तक भारत में 200 करोड़ से अधिक वैक्सीन डोज के उत्पादन का अनुमान है.

विपक्ष का आरोप: केंद्र को अनिवार्य लाइसेंसिंग लागू करनी चाहिए

सरकार की सफाई: अनिवार्य लाइसेंसिंग बहुत आकर्षक विकल्प नहीं है क्योंकि सक्रिय भागीदारी, मानव संसाधनों को प्रशिक्षण, कच्चे माल को जुटाना और उच्च स्तर के बॉयो-सेफ्टी लैब्स की जरूरत है. तकनीकी हस्तांतरण सिर्फ वही कंपनी कर सकती है जिसने शोध और विकास किया हो. भारत की बात करें तो हम अनिवार्य लाइसेंसिंग से एक कदम आगे बढ़ चुके हैं और कोवैक्सीन के उत्पादन को बढ़ाने के लिए भारत बायोटेक और 3 अन्य संस्थाओं के बीच सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित कर रहे हैं. इसके अलावा स्पुतनिक के लिए भी ऐसी कोशिशें की जा रही हैं.
मॉडर्ना ने अक्टूबर 2020 में कहा था कि वह अपनी वैक्सीन बनाने वाली किसी भी कंपनी पर मुकदमा नहीं करेगी, लेकिन फिर भी एक भी कंपनी ने ऐसा नहीं किया है. इससे पता चलता है कि लाइसेंसिंग कोई समस्या नहीं है. अगर वैक्सीन बनाना इतना आसान होता, तो विकसित देशों में भी वैक्सीन डोज की इतनी कमी क्यों होती?

विपक्ष का आरोप: केंद्र ने राज्यों पर अपनी जिम्मेदारी को छोड़ दिया है

सरकार की सफाई: केंद्र सरकार वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों को फंडिंग से लेकर उन्हें भारत में विदेशी टीके लाने के लिए उत्पादन में तेजी लाने हेतु शीघ्रता से मंजूरी देने से लेकर हर तरह के जरूरी कार्यों को अंजाम दे रही है. केंद्र द्वारा खरीदा गया टीका लोगों को बिना कोई पैसे लिए राज्यों को भेजा जाता है. भारत सरकार ने राज्यों के अनुरोध पर ही उन्हें खुद वैक्सीन खरीदने के लिए मंजूरी दी थी. हालांकि ग्लोबल टेंडर का कई परिणाम नहीं निकला और यह इस बात की भी पुष्टि करता है जिसे हम राज्यों को पहले दिन से बता रहे हैं कि दुनिया में टीके की आपूर्ति कम मात्रा में हैं और उन्हें कम समय में खरीदना आसान नहीं है.

विपक्ष का आरोप: केंद्र राज्यों को पर्याप्त वैक्सीन नहीं दे रहा है

सरकार की सफाई: केंद्र राज्यों को तय दिशा-निर्देशों के अनुसार पारदर्शी तरीके से पर्याप्त टीके आवंटित कर रहा है और राज्यों को भी वैक्सीन की उपलब्धता के बारे में पहले से ही सूचित किया जा रहा है. जल्द ही वैक्सीन की उपलब्धता बढ़ने वाली है और बहुत अधिक आपूर्ति संभव होगी. गैर-सरकारी माध्यम में, राज्यों को 25% डोज मिल रही है और निजी अस्पतालों को 25% डोज मिल रही है. हालांकि राज्यों द्वारा लोगों को इन 25% खुराकों को देने में ही हो रही मुश्किलों और समस्याओं को बहुत अधिक करके बताया जाता है.

विपक्ष का आरोप: केंद्र बच्चों के टीकाकरण के लिए कोई कदम नहीं उठा रहा है

सरकार की सफाई: अभी तक दुनिया का कोई भी देश बच्चों को वैक्सीन नहीं दे रहा है. इसके अलावा डब्ल्यूएचओ ने भी बच्चों के टीकाकरण के लिए कोई सिफारिश नहीं की है. हालांकि बच्चों में टीकों की सुरक्षा के बारे में अध्ययन किए गए हैं जो प्रोत्साहित करने वाले हैं. अब जल्द ही भारत में भी बच्चों पर ट्रायल शुरू होने जा रहा है. परीक्षणों के आधार पर पर्याप्त डेटा उपलब्ध होने के बाद ही बच्चों के टीकाकरण को लेकर वैज्ञानिकों द्वारा निर्णय लिया जाएगा.

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