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Covid-19 Vaccine Update: बॉयोटेक की स्वदेशी Covaxin के फेज-3 ट्रॉयल को मंजूरी, दिल्ली समेत 19 शहरों में होगा परीक्षण

दिल्ली, मुंबई, पटना और लखनऊ समेत देश भर के 19 शहरों में ट्रॉयल होगा.

Updated: Oct 23, 2020 10:10 AM
CDSCO recommends granting permission to phase 3 clinical trials biotech icmr covaxinजुलाई में पहले और दूसरे चरण के ट्रॉयल के लिए मंजूरी मिली थी.

Covid-19 टीके के तीसरे चरण के क्लिनिकल ट्रॉयल की मंजूरी के लिए सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO)की एक विशेषज्ञ समिति ने अपना प्रस्ताव ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) के पास रेकमेंडेशन भेजा था जिसे मंजूरी मिल गई है. इस Covaxin को भारत बॉयोटेक ने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के साथ मिलकर तैयार किया है.

जुलाई में पहले और दूसरे चरण के लिए मिली थी मंजूरी

हैदराबाद स्थित कंपनी बॉयोटेक ने 2 अक्टूबर को डीसीजीआई के पास तीसरे चरण के ट्रॉयल के लिए मंजूरी मांगी थी. तब उससे कहा गया था कि अगले चरण के क्लिनिकल ट्रॉयल की मंजूरी से पहले वह दूसरे चरण के ट्रॉयल की पूरी सेफ्टी और इम्यूनोजेनेसिटी डेटा सबमिट करे. डीसीजीआई ने बॉयोटेक को जुलाई में कोरोना वैक्सनी की पहले और दूसरे चरण के क्लिनिकल ट्रॉयल की मंजूरी दी थी.

10 राज्यों के 19 शहरों में होगा Covaxin का ट्रॉयल

कंपनी ने अपने आवेदन में कहा है कि इस ट्रॉयल में 18 वर्ष और उससे ऊपर के करीब 28500 लोगों पर यह परीक्षण होगा. इसके अलावा इसे 10 राज्यों के 19 शहरों में किया जाएगा. इसमें दिल्ली, मुंबई, पटना और लखनऊ शामिल है. तीसरे चरण के क्लिनिकल ट्रॉयल के आवेदन में जीरो और अट्ठाइसवें दिन 0.5 एमएल की डोज का प्रस्ताव रखा गया है.

शर्तों के साथ मंजूरी देने की सिफारिश

कंपनी द्वारा उपलब्ध कराए गए पहले और दूसरे चरण के क्लिनिकल ट्रॉयल की रिपोर्ट के आधार पर सीडीएससीओ के एक्सपर्ट पैनल ने खास शर्तों के साथ तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रॉयल की मंजूरी देने की संस्तुति की थी. इन शर्तों के मुताबिक कोई सस्पेक्ट केस प्रमाणित होता है तो मुख्य जांचकर्ता उसकी पूरी क्लिनिकल इंफॉर्मेशन का मूल्यांकन करेगा और इसे सिंपटोमेटिक केस के रूप में दर्ज करेगा. इसके अलावा ट्रॉयल में शामिल होने वाले लोगों को सिंपटोमेटिक केस होने के लिए कम से कम दो क्राइटेरिया जरूर पूरे होने चाहिए, पॉजिटिव आरटी-पीसीआर कंफर्मेशन के साथ या तो क्राइटेरिया ए या बी.

क्राइटेरिया ए और बी

क्राइटेरिया ए में सांस लेने में कठिनाई, एनोस्मिया या ऑगेसिया का होना, 94 फीसदी से कम का ऑक्सीजन स्तर या ऑक्सीजन की आपूर्ति में उतार-चढ़ाव होना, चेस्ट एक्स-रे या सीटी स्कैन के जरिए निमोनिया का उपचार, शॉक के प्रमाण, आइसीयू में भर्ती या मृत्यु हैं. क्राइटेरिया बी में बुखार, ठंडी, खांसी, थकावट, सिरदर्द, गले में खराश, उल्टी, डायरिया, बहती नाक शामिल हैं.

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